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कैंसर, दमा, हार्ट व अन्य जानलेवा" बीमारियां "परोस रहा है मोबाइल" टावर"

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टावर के सामने जिला प्रशासन बेबस

कानपुर -सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी टेलीकाॅम कंपनियां बाज नहीं आ रही हैं अपनी हरकतों से। पैसा कमाने की होड़ में लोगों के जान की भी इनको परवाह नहीं रह गईं। कम्पनियों की ओर से लगाए गये टाॅवर से निकलने वाले रेडिएशन लोगों में कैंसर, दमा, हार्ट व अन्य जानलेवा बीमारियां परोस रहा है। शहर के कई रिहायशी इलाकों में इन टावरों की भरमार है और इन टावरों से निकलने वाले रेडिएशन के कारण हजारों लोग मौत के मुहाने पर खड़े हैं। कई बार क्षेत्रीय लोगों ने शासन से प्रशासन स्तर तक गुहार लगाई लेकिन,आजतक कार्रवाई तो दूर कहीं टावर हटे तक नहीं। शहर के कई रिहायसी इलाकों में टाॅवरों की अधिकता के चलते पक्षियों की संख्या में लगातार कमी होती जा रही है। गौरतलब यह भी है कि जिन जिन इलाकों में टाॅवर लगे हुए हैं वहां मौत मुंह बाए खड़ी है। शहर के घनी आबादी वाले पुराने मोहल्लों में पुराना कानपुर वार्ड नम्बर एक में टावरों की बहुत अधिकता के चलते लोग यहां से पलायन करना शुरू कर चुके हैं। हालात यह हैं कि जिन्होंने अपनी पूरी पीढियां गुजार दी अब डाॅक्टरों के रिकमंड पर मोहल्ला छोड़कर जा रहे हैं। क्योकि इस मोहल्ले में लगभग पचास मौतें कैंसर व हार्ट अटैक से हुई हैं। कई लोगों को दमा ब्रेन स्ट्रोक जैसी प्राणलेवा बीमारियां हो गई हैं। हालात यह हैं कि इस मोहल्ले में कई मरीज घातक बीमारियों से जूझ रहे हैं। पुराना कानपुर के चन्द्रपाल के आवास पर छह टावर लगे हुए हैं। जिसके चलते आसपास के रहने वाले आधा किलोमीटर तक के लोग कैंसर जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं। किसी ने अपना बेटा खोया तो किसी ने अपना पति। इस मोहल्ले के हालात यह हैं कि डाॅक्टरों ने यहां रहने वाले मरीजों से साफ शब्दों में मोहल्ला छोड़कर दूसरी जगहों पर जाने को कहा है। अभी तक यहां तकरीबन पचास मौतें कैंसर से हो चुकी हैं। दुख की बात तो यह है कि ज्यादातर मौतों के शिकार हुए लोगों की उम्र तकरीबन 35 साल से कम है। कुछ बच्चों में भी जन्मजात बीमारियां पनप रहीं हैं। लोगों ने अपना मोहल्ला छोड़कर दूर दराज किराए पर रह रहे हैं। क्षे़़त्र के वृद्ध रामआसरे के अनुसार उनकी उम्र लगभग 75 वर्ष है। कहते हैं पूरा जीवन इस मोहल्ले में कट गया। लेकिन अब इन टावरों की वजह से मोहल्ला छोड़कर जाना पड़ रहा वहीं यहां रहने वाली इन्दिरा देवी की हालत यह हो गई कि उनको भूलने की बीमारी के चलते अपना मोहल्ला छोड़कर जाना पड़ा। पुराना कानपुर वार्ड एक के लोगों ने पार्षद से लेकर सीएम तक से गुहार लगाई लेकिन हर जगह सिर्फ उनको आश्वासन मिला। क्षेत्रीय लोगों में इसको लेकर आक्रोश व्याप्त है। कहीं से न्याय न मिलने पर लोग आरपार की लड़ाई के मूड में हैं।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ-
पुराना कानपुर से थोडी दूर विष्णुपुरी में प्रैक्टिस करने वाले हार्ट रोग विशेषज्ञ डाॅ एसके गुप्ता का कहना है कि पुराना कानपुर में लगे टावरों की वजह से लोग घातक बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। मेरे पास आने वाले मरीजों को मैं वहां दूर जाकर रहने की सलाह देता हूं। टावरों से निकलने वाले रेडिएशन कैंसर व मौत को दावत दे रहे हैं। डाॅक्टर मन मोहन मिश्रा का कहना है कि टावर से क्षे़त्र में भीषण बीमारी फैली हुई है। लोगों को इलाज के लिए मैने पीजीआई रेफर किया है। पता नहीं इतनी मौतों के बाद भी प्रशासन क्यों नहीं ध्यान दे रहा है। डाॅ महेन्द्र त्रिपाठी बोले, यहां रहने वालों को मेरी सख्त हिदायत है कि वह मोहल्ला छोड़ दें नही ंतो उनकी बीमारी नासूर बनकर उनकी जान ले लेगी।

जिम्मेदारों की जुबानी-
इस मामले में जब एडीएम सिटी से बात की गई तो उन्होंने कहा, यह तो बेहद संगीन मामला है। तत्काल कार्रवाई कराकर वहां से टावर हटवाए जाएंगे।

केडीए उपाध्यक्ष जयश्री भोज से बात करने की कोशिश की गई तो उनका फोन नाॅट रीजेबल बता रहा था। तो वहीं कमिश्नर ने तत्काल मामले को संज्ञान में लेते हुए त्वरित कार्रवाई की बात कही है।

क्या है सुप्रीमकोर्ट का आदेश-
स्ुप्रीम कोर्ट ने सख्त निर्देश दिया था कि रिहायशी इलाकों में टावर नहीं लगने चाहिए। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। 2007 से इस नियम को सख्ती से लागू करने के आदेश दिए गये थे।


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