aapkikhabar aapkikhabar

रामगोपाल की वापसी मतलब कमजोर हो रहे शिवपाल

aapkikhabar डेस्क - (सियाराम पांडेय ‘शांत’)समाजवादी पार्टी में धीरे से ही सही, लोकतंत्र की वापसी होने लगी है। रामगोपाल यादव फिर समाजवादी पार्टी में शामिल कर लिए गए हैं। जिस सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया था, उन्होंने ही ससम्मान उन्हें पार्टी में वापस ले लिया है। इसे अखिलेश खेमे की जीत के रूप में देखा जा रहा है। हाल ही में इटावा की एक प्रेस काफं्रेस में अपने निष्कासन को लेकर रामगोपाल यादव न केवल भावुक हो गए थे, बल्कि रोने भी लगे थे। समाजवादी पार्टी के थिंक टैंक समझे जाने वाले इस नेता ने कभी भी अपने को न तो पार्टी से अलग समझा और न ही पार्टी लाइन से अलग जाकर कोई बयान दिया। यह अलग बात है कि शिवपाल यादव और अखिलेश यादव की जंग में उन्होंने अखिलेश यादव का पक्ष लिया और यह पक्षधरता उन्हें न केवल भारी पड़ी बल्कि उन्हें उनके अस्तित्व का भी आईना दिखा गई। दो बार मुलायम सिंह यादव को पत्र लिखकर उन्होंने अपने राजनीतिक चिंतक होने का परिचय भी दिया लेकिन जब बयार उल्टी बह रही हो  तो उसमें धीरज से काम लेने का फार्मूला ही असरकारी होता है। कभी-कभी सही बात भी गलत लगती है और इसका खामियाजा बडे़ बड़ों को भुगतना पड़ता है। रामगोपाल यादव का मानना था कि आगामी विधानसभा चुनाव में चेहरा तो अखिलेश का ही चलेगा। वे इस बात के पक्षधर थे कि प्रत्याशियों का चयन करते वक्त मुख्यमंत्री की राय का भी संज्ञान लिया जाना चाहिए। यह बात निश्चित रूप से शिवपाल यादव को रास नहीं आई थी और उन्होंने न केवल नेताजी को गुमराह किया, रामगोपाल यादव को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया बल्कि उन पर भ्रष्टाचार में संलिप्त होने और सीबीआई के भय से भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर भीतरघात करने का भी आरोप लगाया। बात पार्टी के निष्कासन तक ही सीमित होती तो और बात थी लेकिन उन पर जिस तरह आरोपों की तोप दागी गई, वह उनका भावुक सीना छलनी करने के लिए काफी था। जिस समय उन्हें समाजवादी पार्टी से छह साल के लिए बाहर का रास्ता दिखाया गया था तब शिवपाल यादव की ओर से यह घोषणा की गई थी कि वे पार्टी ही नहीं, राज्यसभा की सदस्यता से भी जाएंगे। वे राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के नेता नहीं रहेंगे। नोटबंदी के मुद्दे पर जब राज्यसभा में सभी दल भाजपा को घेरने में जुटे थे, तब शायद रामगोपाल यादव भी इस दुष्चिंता में डूबे थे कि सपा के नेता पद से वापसी का परवाना कब राज्यसभा के सभापति के पास पहुंचेगा। उनका नेता पद से हटाए जाने का पत्र तो नहीं पहुंचा लेकिन मुलायम सिंह यादव ने उन्हें पार्टी में शामिल कर यह जरूर साबित कर दिया कि वह किसी को समझने की भूल तो कर सकते हैं लेकिन अपने रहते किसी के साथ ज्यादती नहीं होने दे सकते। अगर अमर सिंह इस प्रकरण पर मुलायम सिंह यादव को महादेव या बापों का बाप कह रहे हैं तो यह कदाचित उनकी अपनी समझ का दोष नहीं है। मुलायम सिंह यादव कब क्या निर्णय लेंगे, यह समझना सामान्य व्यक्ति के बस का नहीं है। रामगोपाल यादव को छह साल के लिए पार्टी से निकलवाकर शिवपाल और अमरसिंह को शायद यह लगा होगा कि उनकी राह का एक बड़ा कांटा हट गया है तो यह उनकी भूल ही थी और मुलायम सिंह यादव ने उसका सुधार, परिष्कार और परिमार्जन कर दिया है। राज्यसभा सचिवालय में मुलायम की चिठ्ठी पहुंचने का इंतजार किए बगैर रामगोपाल यादव ने राज्यसभा में समाजवादी पार्टी का न केवल प्रतिनिधित्व किया बल्कि केन्द्र सरकार को ताकीद भी की कि अगर नोटबंदी का यह सिलसिला बदस्तूर जारी रहा तो महिलाएं भाजपा को वोट नहीं देंगी, बेलन से मारेंगी। यह किसी भी राजनैतिक दल की ओर से की गई बेहद तल्ख टिप्पणी है। रामगोपाल ने सदन में यह साबित कर दिया कि पार्टी में उनका वजूद हो, न हो लेकिन वे पार्टी के लिए थे, हैं और हमेशा रहेंगे। यही बात शायद मुलायम को अच्छी लगी। एक व्यक्ति पार्टी में न होकर भी उनके लिए सोचता है। इटावा में की गई भावुक प्रेस कांफ्रेंस ने भी सम्भवत: मुलायम सिंह यादव का मानस बदलने का काम किया। अखिलेश बराबर अपने पिता और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पर इस बात का दबाव डाल रहे हैं कि रामगोपाल यादव की सपा में ससम्मान वापसी हो यही नहीं पार्टी के जितने भी युवा नेता निकाले गए हैं उन सभी को पार्टी में बाइज्जत शामिल किया जाए। रामगोपाल यादव की सपा में वापसी से इतना तो तय है कि मुलायम सिंह यादव का आक्रोश अखिलेश यादव के प्रति अब उतना नहीं है जितना कि पहले था। इसके बाद धीरे-धीरे अखिलेश समर्थक युवा विधायकों की भी पार्टी में वापसी तय मानी जा रही है। इस फैसले से जाहिर तौर पर शिवपाल एंड कंपनी की नाराजगी में इजाफा होगा। लेकिन पहले जैसे हालात बनेंगे, इसके आसार कम ही है। महागठबंधन की शिवपाल की कोशिश का बाजा तो तभी बज गया था जब मुलायम सिंह यादव ने सपा के अकेले चुनाव लड़ने की बात कह दी थी। समझदार के लिए इशारा काफी होता है। शिवपाल और अमर सिंह को समझ जाना चाहिए कि हवा का रुख बदल चुका है। कुछ राजनीतिक विश्लेषक हमेशा इस बात के हामी रहे हैं कि समाजवादी पार्टी में कलह नाम की कोई चीज नहीं है। कलह का शोशा उछालकर वह राजनीतिक लाभ लेना चाहती है। रामगोपाल यादव की वापसी से विश्लेषकों की यह आशंका सच साबित हुई है।  रामगोपाल यादव का अपराध बस इतना था कि उन्होंने पार्टी में अमर सिंह की मुखालफत की थी और अपने भतीजे अखिलेश यादव का समर्थन किया था। शिवपाल उनसे इसलिए भी चिढ़ते रहे कि उन्हीं की सलाह पर मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश यादव को 2012 में  यूपी का सीएम  बनाया। शीतकालीन सत्र के पहले दिन जब राज्यसभा में सपा के सांसद आए तो सवाल था कि पार्टी से निकाले गए रामगोपाल की जगह नया नेता कौन होगा,लेकिन नरेश अग्रवाल ने कहा कि रामगोपाल यादव ही राज्यसभा में सपा के नेता हैं। तभी यह तय हो गया था कि मुलायम सिंह यादव रामगोपाल यादव को छोड़ने के पक्ष में नहीं हैं। वे उनकी काबलियत का फायदा अपनी पार्टी को दिलाने में कोई कोर कसर शेष नहीं रखेंगे। नोटबंदी पर विपक्ष की तरफ  से तीसरे नंबर पर आए रामगोपाल ने सरकार को महिलाओं और किसानों को हो रही परेशानी पर खूब घेरा। रामगोपाल ही अमर सिंह की सपा से विदाई की वजह बने थे। अब रामगोपाल सपा को अखिलेश को सौंपने और अमर-शिवपाल को किनारे करने करने की वकालत करते रहे हैं। अखिलेश भी रामगोपाल की रणनीति के कायल हैं। अमर सिंह अगर यह कह रहे हैं कि रामगोपाल अंदर के आदमी हैं और मैं बाहर का तो इसमें उनकी हताशा ही नजर आती है। अमर और शिवपाल का दांव उल्टा पड़ चुका है और मुलायम सिंह यादव को भी अंदर की कहानी समझ आने लगी है। अपने परिवार में और संगठन में विघटन वे हरगिज नहीं चाहेंगे। रामगोपाल यादव के निष्कासन केबाद उनके गांव-जवार के लोग ही यह कहने लगे थे कि मुलायम ने रामगोपाल के रूप में गाय मार दी। देर से ही सही सपा प्रमुख ने सही निर्णय लिया है और इसका फायदा सपा को जरूर होगा लेकिनसाथ ही उन्होंने विरोधियों को अपनी आलोचना का हथियार भी पकड़ा दिया है। सवाल उठता है कि सपा की कलह क्या प्रायोजित थी या मुलायम सिंह यादव का शिवपाल से मोहभंग हो चुका है। तस्वीर तो साफ होनी ही चाहिए। पारिवारिक एकजुटता अगर जरूरी है तो उन युवा नेताओं का क्या, जो अखिलेश की तरफदारी के शिकार हो गए। न्याय की अपेक्षा तो उन्हें भी है। अगर सभी निष्कासित पार्टी में वापस ले लिए जाते हैं तो इससे मुलायम सिंह यादव के बड़े दिल का परिचय तो मिलेगा ही, उन पर आरोप भी लगेंगे कि उन्होंने प्राकृतिक न्याय के सिद्धान्तों की अवहेलना क्यों की। जो भी हो, गलती का सुधार सबसे बड़ा बड़प्पन है और यह बड़प्पन दिखाने में मुलायम कभी पीछे नहीं रहे। अब इससे किस पर क्या बीतेगी, इसकी वे चिंता भी नहीं करते।  विधान परिषद् सदस्यों समेत सपा के सात युवा नेताओं ने मुलायम सिंह यादव से मुलाक़ात कर उन्हें अपना माफीनामा सौंप दिया | साथ ही यह भी अस्वस्त किया की वह किसी भी सूरत में मुलायम सिंह के विपरीत टिपण्णी नहीं कर सकते | उनके अपमान की तो कल्पना ही नहीं की जा सकती | मुलायम सिंह ने भी पार्टी के बर्खास्त युवा नेताओं को अनुसासन के दायरे में रहने की नसीहत दी और चुनाव की तैयारियों में जुट जाने को कहा यह इस बात का संकेत है कि सपा से बर्खास्त युवा नेताओं की वापसी पार्टी में किसी भी क्षण हो सकती है| राम गोपाल यादव की पार्टी में सभी पदों पर वापसी के बाद शिवपाल की बौखलाहट जाहिर है ,लेकिन बर्खास्त अखिलेश समर्थकों की मुलायम सिंह यादव से मुलाकात के बाद शिवपाल का हालिया बयान यह बताने के लिए काफी है कि अखिलेश का वर्चस्व पार्टी में फिर बढ़ने लगा है और शिवपाल और अमर सिंह हाशिये  पर जाते नजर आ रहे हैं | यह स्थिति बहुत मुफीद नहीं है खासकर शिवपाल यादव के लिए |हालाकि उदयवीर सिंह ने अभी तक मुलायम सिंह यादव से संपर्क नहीं साधा है | अगर वे संपर्क साधते हैं तो न नुकर के बाद ही सही ,उन्हें भी पार्टी में वापस लिया जा सकता है ,लेकिन झिझक भी कोई चीज होती है | शायद यही वजह है की उदयवीर नेताजी का सामना नहीं कर पा रहे हैं लेकिन इतना तो तय है कि सपा का एक भी बर्खास्त नेता बाहर नहीं रहेगा | अखिलेश यादव की बात पर गौर करें तो जो पार्टी से निकाले गए हैं उनका भी चुनाव चिन्ह तो साइकिल ही है ,यह बताने के लिए काफी है कि सपा आतंरिक कलह के आरोपों को नकारने का एक दांव और आजमाने के लिए प्रयासरत है विरोधी चाहे जितनी आलोचना करें लेकिन सपा को करना वही है जिससे उस पर उसके परंपरागत वोट बैंक का भरोसा बढे |



-

टिप्पणी करें

Your comment will be visible after approval

सम्बंधित खबरें



खबरें स्लाइड्स में


खबरें ज़रा हट के


Latest news with Aapkikhabar

"आज के ताज़े समाचार' के साथ आपकी ख़बर

भारत के सबसे लोकप्रिय समाचार के स्रोत में आपका स्वागत है ताजा समाचार और रोज के ताजा घटनाक्रम के लिए दैनिक समाचार को पढने के लिए हमारी वेबसाइट सही और प्रमाणिक समाचारों को खोजने के लिए सबसे अच्छी जगह है। हम अपने पाठकों को पूरे देश और उसके मुख्य क्षेत्रों में नवीनतम समाचारों के साथ प्रदान करते हैं। हमारा मुख्य लक्ष्य खबरों को एक उद्देश्य के साथ मूल्यांकन भी देना है और इस तरह के क्षेत्रों में राजनीति, अर्थव्यवस्था, अपराध, व्यवसाय, स्वास्थ्य, खेल, धर्म और संस्कृति के रूप में क्या हो रहा है, इस पर भी प्रकाश डालना है। हम सूचना की खोज करते हैं और सबसे महत्वपूर्ण ग्लोबल घटनाओं से संबंधित सामग्री को तुरंत प्रकाशित करते हैं।.

Trusted Source for News

ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए सबसे विश्वसनीय स्रोत है आपकी खबर

आपकी खबर उन लोगों के लिए एक बेहतरीन माध्यम है जिनके कई मुद्दों पर अपनी अलग राय है हम अपने पाठकों को भी एक माध्यम उपलब्ध कराते हैं जो ख़बरों का विश्लेषण कर सकें निर्भीक रूप से पत्रकारिता कर सकें | आपकी खबर का प्रयास रहता है की ख़बरों के तह तक जाएँ पुरी सच्चाई पता करें और रीडर को वह सब कुछ जानकारी दें जो अमूमन उन्हें नहीं मिल पाती है | यह प्रयास मात्र इस लिए है कि रीडर भी अपनी राय को पूरी जानकारी से व्यक्त कर सके |
खबर पढने वाले पाठकों की सुविधा के लिए हमने आपकी खबर में विभिन्न कैटेगरी में बात है जैसे कि विशेष , बड़ी खबर ,फोटो न्यूज़ , ख़बरें मनोरंजन,लाइफस्टाइल, क्राइम ,तकनीकी , स्थानीय ख़बरें , देश की ख़बरें उत्तर प्रदेश , दिल्ली , महाराष्ट्र ,हरियाणा ,राजस्थान , बिहार ,झारखण्ड इत्यादि |

Develop a Habit of Reading

अब अखबार नहीं डिजिटल अखबार पढ़िए “आप की खबर” के साथ

आपकी खबर सामाचार ताजा सामाचारों का एक डिजिटल माध्यम है जो जनता को सच्चाई देने में समाचारों का एक विश्वसनीय स्रोत बनने का प्रयास है। हमारे दर्शकों के पास समाचार पर टिप्पणी करने और अन्य पाठकों के साथ अपनी स्वतंत्र राय साझा करने का अंतिम अधिकार है। हमारी वेबसाइट ब्राउज़ करें और आप की खबर (आज की ताजा खबर) की जाँच करें, साथ ही आपको मिलेगा आपकी खबर के एक्सपर्ट्स की टीम खबरों की तह तक जाने का प्रयास करती है और कोशिस करती है कि सही विश्लेषण के साथ खबर को परोसा जाए जिसमे वीडियो और चित्र की भी प्रमंकिता हो । इसके लिए हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें और भारत में कुछ भी नया घटनाक्रम को घटित होने पर अपने को रखें अपडेट |