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इस शनिवार करें प्रदोष व्रत मिलेगी कष्टों से मुक्ति



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जानिए शनि प्रदोष 19  अगस्त 2017 का महत्व ?? 

जानिए कैसे करें शनि प्रदोष का व्रत और शनि प्रदोष पर क्या करें उपाय ??

 

प्रिय मित्रों/पाठकों, हमारे सनातन हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक मास में कोई न कोई व्रत, त्यौहार अवश्य पड़ता है। दिनों के अनुसार देवताओं की पूजा होती है तो तिथियों के अनुसार भी व्रत उपवास रखे जाते हैं। हमारे सनातन हिन्दू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है । हर महीने 2 बार प्रदोष का व्रत रखा जाता है। एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। यह व्रत त्रयोदशी तिथि के दिन रखा जाता है। सोमवार के दिन त्रयोदशी तिथि पड़ने पर इसे सोम प्रदोष व्रत कहते हैं और मंगलवार के दिन पड़ने पर भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। इसी तरह शनिवार के दिन जब त्रयोदशी तिथि पड़ती है तब इसे शनि प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है और इस व्रत का बड़ा महत्व है। प्रदोष का व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को रखने से शिवजी प्रसन्न होते हैं और व्रती को पुत्र की प्राप्ति होती है।  

 

 

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की शनि प्रदोष के दिन निम्न उपाय करने से आप पर शनि की कृपा बनी रहेगी। इसके साथ ही आपकी जन्म कुंडली में लगा साढ़े साती का प्रभाव भी कम होगा।ज्योतिषशास्त्र के अनुसार शनि प्रदोष व्रत शनि के अशुभ प्रभाव से बचाव के लिए उत्तम होता है। शनि प्रदोष व्रत करने वाले पर शनिदेव की असीम कृपा होती है। व्रत करने वाले को इस दिन प्रातःकाल भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए और इसके बाद शनि देव की पूजा। संध्या काल में सूर्यास्त के बाद रात होने से पहले गोधूली के समय शिव और शनि की पूजा करने से व्रत पूरा होता है। शनि प्रदोष व्रत के दिन ग्यारह बार दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ करने से शनि के अशुभ प्रभाव के कारण जीवन में आ रही परेशानी में कमी आती है। 

 

पुराणों के अनुसार शनि प्रदोष व्रत करने से शनि देव का प्रकोप शान्त हो जाता है। जिन लोगों पर साढ़ेसाती और ढैया का प्रभाव हो, उनके लिए शनि प्रदोष व्रत करना विशेष हितकारी माना गया है। इस दिन विधि-विधान से यह व्रत करना शनिदेव की कृपा प्राप्त करने का एक शास्त्रसम्मत आसान उपाय है। ऐसा करने से न सिर्फ़ शनि के कारण होने वाली परेशानियाँ दूर होती हैं, बल्कि शनिदेव का आशीर्वाद भी मिलता है जिससे सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। शनि प्रदोष वाले दिन जो जातक शनि की वस्तुओं जैसे लोहा, तैल, तिल, काली उड़द, कोयला और कम्बल आदि का दान करता है, शनि-मंदिर में जाकर तैल का दिया जलाता है तथा उपवास करता है, शनिदेव उससे प्रसन्न होकर उसके सारे दुःखों को हर लेते हैं। शास्त्रों में वर्णित है कि संतान की कामना रखने वाले दम्पत्ति को शनि प्रदोष व्रत अवश्य रखना चाहिए। आगे देखिये स्लाइड में ......

 

 

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