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क्या आप जानते हैं इन अंधविश्वासों के वैज्ञानिक कारण----



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प्रिय पाठकों,हमारे पूर्वजो द्वारा बनाए गए इन रिवाजों पीछे विज्ञान काम करता है। जी हां हर अंधविश्वास के पीछे छुपा है एक वैज्ञानिक तथ्य। आएये जानते है | हमारे देश भारत में अधंविश्वास से जुड़ी बातों को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है आज के समय में भी लोग अंधविश्वासों को मानने में पीछे नहीं हैं। लोग अपने आप को सुरक्षित रखने के लिए अंधविश्वास से जुड़ी वो हर चीजों को मानते है जिसमें वो अपना फायदे देखते है। उन्हें शुभ अशुभ मानते हुए उन सभी नियमों का पालन करते हैं जो काफी समय से चले आ रहें हैं। पर क्या आप जानते हैं कि इनके पीछे कुछ वैज्ञानिक तर्क छुपे हुए हैं। जाने उन सभी बातों को जिसे आप अंधविश्वास मान उसे शुभ अशुभ का नाम देते है |

 

भारत की हर परंपरा के पीछे वैज्ञानिक कारण रहे हैं | हमारे समाज में कुछ रिवाज ऐसे हैं जिन्हें अंधविश्वास की नजर से देखा जाता है। जैस घर के बाहर नींबू मिर्ची टांग देना, दही खा कर घर से बाहर ना निकलना वगैरहा वगैरहा। पर क्या आप जानते है कि हमारे पूर्वजो द्वारा बनाए गए इन रिवाजों पीछे विज्ञान काम करता है। जी हां हर अंधविश्वास के पीछे छुपा है एक वैज्ञानिक तथ्य। आइये जानते हैं उनके कारण --

 

 

 

 

 

 

 

क्यों दिया जाता हैं किसी भी आयोजन/अनुष्ठान/शुभ कार्य आदि के उपहार में एक रुपया देना जोड़ना शुभ ---

 

भारत में किसी भी आयोजन/अनुष्ठान/शुभ कार्य आदि में एक रुपय देने का प्रचलन है। कुल में एक रुपया और देने को शुभ माना जाता है।

इसके कई कारण है। कुछ मानते है कि इसके कारण भाग्य/किस्मत चमकती है, कुछ के लिये यह बड़ों का प्यार और आशीर्वाद, और कुछ के लिये यह जिंदगी के नए पडाव की शुरुआत के बराबर है। कुछ एसा भी मानते है कि एक रुपय बढ़ाने से कुल का भाग करना कठिन हो जाएगा। अगर ना बढ़ाया जाये तो कुल के दो बराबर भाग किये जा सकते है और इसे अशुभ माना जाता है। इसलिए, खासकर व्याह के घरों में ये काफी प्रचलित है।

 

दरवाजे पर नींबू मिर्ची लटकाना----

 

दरवाजे पर नींबू मिर्ची लटकाने पीछे लोगों का अंधविश्वास है कि ऐसा करने से बुरी ताकतो का साया दूर रहता है। इसके पीछे असली लॉजिक है कि नींबू मिर्ची में मौजूद सायटिक एसिड होता है जो कीड़े-मकौड़ों को घर में घुसने से रोकता है।

 

क्यों लगाया जाता हैं नज़र बट्टू--

 

उत्तर भारत और पाकिस्तान में नींबू को शुभ माना जाता है और अनेको अनुशठान मे इसका प्रयोग किया जाता है। नींबू और मिर्च के गाठ-बन्धन नए घरों और दुकानो के द्वार पर लगाया जाता है। माना जाता है कि ऐसे करने से बुरे आत्माओं और अपशगुन दूर करवाता है। इस गाठ-बन्धन का नाम नज़र-बट्टू है और इस्मे ७ मिर्च और १ नींबू का प्रयोग होता है। नज़र बट्टू को दैनिक, साप्ताहिक या पाक्षिक बदला जाता है।

 

क्यों माना जाता हैं शुभ पानी का गिरना---

जब कही पानी गिरता है तो कुछ अच्छा होने वाला है ऐसा लोग का मानना है या कह सकते है की वह उनका अंधविश्वास है। कहा जाता है की कोई व्यक्ति के जाने के बाद अगर पानी गिरते है या गिराया जाता है तो उस व्यक्ति का यात्रा अछा जाता है और अगर वह व्यक्ति कोई काम के लिए बहार निकला है तो उसका काम किस्मत उसका साथ देगी। यह तब भी किया जाता है जब कोई बच्चा परीक्षा देने के लिए जाता है या फिर कोई व्यक्ति जब नौकरी ढूँढने जाता है। यह माना जाता है की पानी गिरना या पानी का बहना शुभ होता है और सब कुछ आराम से चलता है कोई बाधा नहीं होती।

 

यह हैं कारण छींकना तथा टोकना---

जब कोई घर से निकल रहा हो तब उससे यह पूछकर टोकना कि कहा जा रहे हो अपशगुन है। ऐसा करने से जिस काम के लिए बाहर जाना था वो खराब हो जाएगा। इसी विश्वास के कारण भारत में बड़े हमेशा बताते है कि घर से निकलते समय किसी को कभी टोकना नहीं। घर से निकलने से पहले छीकना भी अपशगुन माना जाता है। छीक आने पर बोला जाता है कि बैठकर पानी पीना चाहिए वरना काम बिगड़ जाएगा। लेकिन अगर २ बार छीके तो ऐसा कुछ नहीं होगा।

 

मंगल और गुरुवार को बाल न धोना ----

आपने अक्सर देखा होगा अक्सर महिलाएं मंगल और गुरूवार को बाल धोने से परहेज करती है। क्योंकि उन्हें लगता है कि इस दिन बाल धोने से बुरे वक्त की शुरूआत होती है। 

लेकिन आपको बता दें कि पुराने वक्त में लोग अपने घरों में पानी स्टोर करके रखते थे। बाल धोने में पानी ज्यादा खर्च होता है , तो इन दो दिन पानी बचाने के लिए बाल नहीं धोए जाते थे।

 

तस्य  कण्ठमनुप्राप्ते दानवस्यामृते तदा।

आख्यातं चंद्रसूर्याभ्यां सुराणां हितकाम्यया।।

 

वैदिक व पौराणिक ग्रथों में ग्रहण के संदर्भ में कहा गया है कि ग्रहण काल मे सौभाग्यवती स्त्रियों को सिर के नीचे से ही स्नान करना चाहिए, अर्थात् उन्हें अपने बालों को नहीं खोलना चाहिए, जिन्हें ऋतुकाल हो ऐसी महिलाओं को जल स्रोतों में स्नान नहीं करना चाहिए। उन्हे जल स्रोतों से बाहर स्नान करना चाहिए। सूतक व ग्रहण काल में देवमूर्ति को स्पर्श कतई नहीं करना चाहिए। ग्रहण काल में भोजन करना, अर्थात् अन्न, जल को ग्रहण नहीं करना चाहिए। सोना, सहवास करना, तेल लगाना तथा बेकार की बातें नहीं करना चाहिए। बच्चे, बूढे, रोगी एवं गर्भवती स्त्रियों को आवश्यकता के अनुसार खाने-पीने या दवाई लेने में दोष नहीं होता है। सावधानी-गर्भवती महिलाओं को होने वाली संतान व स्व के हित को देखते हुए यह संयम व सावधानी रखना जरूरी होता है कि, वह ग्रहण के समय में नोकदार जैसे सुई व धारदार जैसे चाकू आदि  वस्तुओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए। 

 

----मंदिर में घंटे का बजाना का अर्थ भगवान को खुश करना मन जाता हैं  कइँती इसका कारण/लॉजिक यह हैं की मंदिर घंटे को बजाने से उसके वाइब्रेशन से साकारात्मक उर्जा पैदा होती है। चारों ओर का वातावरण साफ रहता है। इसलिए हमारे घरों में भी घंटे और शंख का प्रयोग किया जाता है।

 

यह हैं पीपल पेड़ की छाया का महत्त्व ---

पीपल के पेड़ का हिंदुस्तान और विदेश में भी बहुत मानता है। कहा जाता है की पीपल के पेड़ में विष्णु, शनि, हनुमान तथाः अन्य भगवानो का वास है। इस कारन लोगो पीपल के पेड़ के नीचे नहीं बैटते बल्कि पेड़ की पूजा करते है। पीपल पेड़ पे लोग कुमकुम और हल्दी पूजा करने पर लगाते है और औरते पेड़ के चारो ऒर धागा बांधती है। पीपल का पेड़ हमे आक्सीजन देता है।

कुछ लोगो का यह भी कहना है की जहा भगवान का वास होता है, वहा बुरे का भी वास होता है। कहते है की शाम होने के बाद पीपल पेड़ के नीचे या आस पास भी नहीं जाना चाहिए, कक्युकी माना जाता है की उस समय पीपल के पेड़ पर भूत प्रेत का वास होता है। तो जिस तरह से हम पीपल के पेड़ को मानते है उतना ही उससे डरते है।

 

इसलिए नहीं करनी चाहिए सूर्य डूबने के बाद सफाई---

भारत के अनेक अन्धविश्वासो में से एक यह कहता है कि सूर्य डूबने के बाद हमे घर की सफाई नही करना चाहिए। एसा करना हमारे जीवन में दुर्भाग्य लाएगा। माना जाता है कि इस कार्य करने से हम अपने जीवन से भाग्य को निकाल रहे है। लेकिन इस अन्धविश्वास के पीछे एक कारण है। पहले के ज़माने में प्रकाश प्रणालियों अच्छे नहीं थे। सफाई करने के समय कुछ छोटा गिरा हो तो धूल के साथ भूल से उसे भी फेंक दिया जाता। इस कारण क़ीमती सामान का खो जाने का डर रहता था। अन्य कारण यह है कि झाड़ू के टुकड़े दीपक पर गिर सकते थे, जिस्से आग का खतरा पैदा होता। इन कारणों की वजह से यह अन्धविश्वास पैदा हुअ।

 

इसलिए अशुभ हैं कांच का टूट्ना---

 

हमारी भारत संस्कृति में में यह अपशगुन माना जाता है खास कर किसी शुभ काम से पेहले। कुछ लोग मानते है की शीशे में हमारे आत्मा को कब्ज करने की ताकत मॉजूद है। इसीलिए उसका टूट्ना का मत्लब है हमारा आत्मा से अलग होना। समय के साथ यह विश्वास कांच के अंधविश्वास में बदल गया। एक और विवरण यह है कि पेह्ले कांच बहुत महंगा था, इसिलिए बच्चों को उससे दूर रखने के लिए ऐसी कहनियाँ बनाई गई हो। यह भी हो सकता है कि ताकि टूटे कांच से किसी को चोट ना लगे ऐसी अफ्वाहे फैलाई गई हो।

 

13 का अंक भी मानते हैं अशुभ--

 

काफ़ी लोगो का मानना है कि १३ अशुभ अंक है। यह सबसे ज़्यादा माने अंधविश्वासों में से एक है। पार्टी में १३ लोगो क होना, घर या गाड़ी का नंबर १३ होना, ये सब अपशगुन है। कुछ इमारतों में तेरहवां माला है हि नहीं। बारह के बाद सीधा १४ होता है। इसका कोई सर्तक वजह नहीं है। ईसा मसीहा के आखिरी खाने पर उनको मिलाकर १३ लोग थे, और उन में से एक उनका विश्वासघातक निकला। इसके अलावा महीने के तेरहवां दिन पर कफ़ी दुर्घतनाएँ भी हुई है जिससे यह अंधविश्वास और भी गहरा हो गया। लेकिन यह सिर्फ़ इत्त्फाक है। इसका कोई वैज्ञानिक कारण नहीं है। १३ अंक से भी ज़्यादा अशुभ शुक्रवार को माना जाता है जो महीने के तेरहवे दिन को आता है।

 

क्यों लगाया जाता हैं तिलक--

 

भारतीय संस्कृति में तिलक लगाना शुभ संकेत माना जाता है लेकिन क्या आपको पता है आखिर तिलक लगाते क्यों हैं ? इसके पीछे के कारण क्या है जो ये प्रथा सदियों से चली आ रही है ? आइये हम आपको इसके वैज्ञानिक कारणों के बारे में बताते हैं !

 

माथे पर तिलक लगाना हिन्दू धर्म की एक पहचान होती है जो माथे के बीचों बीच लगाया जाता है ! जब भी कोई सुबह कार्य किया जाता है तो माथे पर तिलक लगाया जाता है जो हल्दी, सिन्दूर, केशर, भस्म और चंदन आदि का इस्तेमाल किया जाता है ! तिलक लगाने की प्रथा आज से नहीं सदियों से चली आ रही है, युद्ध में जाते समय राजा महाराजा भी तिलक लगाकर ही युद्ध में जाते थे ! आज भी हमारे सैनिक जब युद्ध में जाते हैं तो उन्हें तिलक लगा कर उनकी सफलता की कामना की जाती है ! जब भी कोई मेहमान घर से प्रस्थान करता है तो उनकी यात्रा मंगलमय हो ऐसी कामना के साथ उन्हें तिलक लगाकर विदा किया जाता है !स्त्रियां में अक्सर अपने माथे पर लाल कुंकुम का तिलक लगाने की प्रथा है और इसके पीछे भी एक कारण है ! दरअसल लाल रंग ऊर्जा और स्फूर्ति का प्रतीक माना गया है और तिलक लगाने से स्त्रियों का सौंदर्य बढ़ता है ! इसके आलावा तिलक को देवी की आराधना से भी जोड़ा गया है और इसे देवी के आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है !

 

हमारे शरीर में 7 सूक्ष्म ऊर्जा केंद्र होते हैं इन्हीं में से एक है आज्ञाचक्र जो माथे के बीच में होता है जहां तिलक लगाया जाता है ! इस आज्ञाचक्र से शरीर की प्रमुख तीन नाडि़यां इड़ा, पिंगला व सुषुम्ना आकर मिलती हैं इसी कारण इसे त्रिवेणी या संगम भी बोला जाता है ! आज्ञाचक्र को शरीर का सबसे पूजनीय स्थान माना गया है और इसे गुरु स्थान बोला जाता है क्योंकि यहीं से पूरे शरीर का संचालन होता है और यही हमारी चेतना का मुख्य स्थान भी होता है !ध्यान लगाते समय भी इसी स्थान पर मन को एकाग्र किया जाता है !

 

साधारणतः तिलक लगाने के लिए चन्दन का इस्तेमाल किया जाता है और चन्दन लगाने से मस्तिष्क में शांति और तरावट बनी रहती है साथ ही चन्दन से मस्तिष्क ठंडा रहता है ! जब भी दिमाग पर जोर पड़ता है तो हमे सिर दर्द की शिकायत होती है लेकिन चन्दन का तिलक लगाने से हमारे मस्तिष्क को ठंडक मिलती है और सिरदर्द की समस्या से निजात मिलती है ! इसी कारण कहा जाता है जो लोग सुबह उठकर नहाने के बाद सिर पर चन्दन का तिलक लगाते हैं उन्हें सिरदर्द जैसी समस्या नहीं होती ! इसके आलावा तिलक के साथ साथ चावल भी लगाए जाते हैं और चावल लगाने के पीछे ऐसी धार्मिक मान्यता है की चावल लगाकर लक्ष्मी को आकर्षित किया जाता है !

 











 










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