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किसानों की समस्या को उठाने के लिए मोदी सरकार के खिलाफ 181 संगठन



किसानों की समस्या को उठाने के लिए मोदी सरकार के खिलाफ 181 संगठन

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-किसान मुक्ति यात्रा का पीलीभीत पहुंचने पर हुआ भव्य स्वागत

-181 संगठनों के नेताओ ंका रहा जमावडा

-वीएम सिंह, योगेंद्र यादव, राजू शेट्टी, रामपाल जाट, आर.चंद्रशेखर से किया संबोधन 

 

पीलीभीत- अखिल भारतीय किसान समन्वय संघर्ष समिति की अगुवाई में तैरह राज्यों से होती हुई किसान मुक्ति यात्रा आज पीलीभीत पहुंची। 181 संगठनों के प्रतिनिधि इस यात्रा में शामिल है। यात्रा में शामिल नेताओं ने किसानों से एकजुट होकर आगामी 20 नंवबर को दिल्ली में होने वाली किसान संसद में शामिल होने की अपील की। रैली में आज कभी धुर विरोधी रहे कृष्णा अधिकारी और वीएम सिंह ने किसान हित में मंच साझा किया। यह यात्रा आज दोपहर 12 बजे पीलीभीत आने वाली थी लेकिन आई पौने तीन बजे। जगह-जगह यात्रा का स्वागत हुआ। 

किसान मुक्ति यात्रा दोपहर तीन बजे सभा स्थल यशवंतरी देवी मंदिर मैदान पहुंची। यात्रा अखिल भारतीय किसान समन्वय संघर्ष समिति के संयोजक वीरेंद्र मोहन सिंह, स्वराज इंडिया के योगेंद्र यादव, शेतकारी संगठन के सांसद राजू शेट्टी, किसान महापंचायत के रामपाल जाट, अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रेम सिंह गहलावत, तेलंगाना के किसान नेता आर.चंद्रशेखर, पूर्व सांसद इलियास आजमी, किसान नेता अखिलेंद्र प्रताप सिंह, अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय सचिव ईश्वरी कुश्वाहा, पुरुषोत्तम शर्मा, अर्चना, मुरादाबाद के किसान नेता धर्मपाल के नेतृत्व में यहां आई। सभी बाहर से आये किसान नेताओं का भव्य स्वागत किया गया। 

 

सभा की विधिवत आरंभ तराई की संघर्षशील वामपंथी नेता कृष्णा अधिकारी के भाषण से हुई। उन्होंने कहा कि एक तो किसान वैसे ही मर रहा है। अब पीलीभीत में एक साजिश के तहत दुधवा टाईगर रिजर्व के बफर जोन के नाम पर बरूआ कोठारा में टाईगर सफारी बनाई जा रही है। साजिश के तहत बाघों का किसानों का निवाला बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसान एकजुटता के लिए आये सभी नेताओं का यहां की धरती पर स्वागत है। 

  पंजाब से आये किसान नेता जयवीर सिंह विर्क ने कहा कि अब किसानों की एकता बहुत जरूरी है। क्योंकि इन नेताओं ने किसानों के लिए अपने घरों को छोड दिया है। आप एक जुट हो जाएंगे तो सफेद झूठ बोलने वाले आदमी की सरकार को उखाड फेंक दों अगली सरकार किसानों की बना दो। वामपंथी नेता अखिलेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि पहले ही किसानों को लूटा जा रहा था। पहले नीलहा लूटते थे और मिलीहा लूट रहे है। किसानों के 181 संगठनों के राजनीतिक तानाशाही के खिलाफ एकजुट हो गए है। इस सरकार ने सडक की अर्थव्यवस्था खराब कर दी है। आर्थिक तानाशाही के खिलाफ यह संगठन एक हुए है। किसानों के दो मुद्दों पर एकजुटता देश को एक नई दिशा देगी।  

 

शाहाबाद के पूर्व सांसद इलियास आजमी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश को धोखा दिया है। उन्होने कहा था कि कालाधन वापस लाएंगे। लेकिन वे कुछ भी नहीं कर पायें। उन्होंने कहा कि यह सरकार अडानी और अंबानी की सरकार है। प्रधानमंत्री सफेद झूठ बोलता है। इससे अधिक शर्म की बात क्या होगी। अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय सचिव ईश्वरी कुशवाहा ने कहा कि पूरे देश में किसानों का आंदोलन हो रहे है। 1 से 10 जून पूरे महाराष्ट्र में किसानों ने हडताल की थी। इससे दूध और सब्जी की आपूर्ति मुंबई तथा पुणे में बंद हो गई थी। उन्होने कहा कि सरकार ने घोषणा की थी किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा लेकिन इसमें भी सीमाएं लगा दी गई। आज साठ से सत्तर फीसदी किसान अपनी खेती दूसरे लोगों से करा रहा है। वह लागत लगता है और घाटा भी सहता उसे न तो सूखे का मुआवजा मिला और न बाढ का। 

 

तेलंगाना के किसान नेता आर.चंद्रशेखर ने कहा कि पिछले कुछ साल से खेती किसानी घाटे का सौदा हो गया है। इसलिए देश के अब तक बीस से तीस लाख किसान आत्महत्याकर चुके है। जिस प्रकार 1975 से लेकर 1977 तक देश में 19 महीने तक आपातकाल लगा था। उस समय सारे विचारधाराओं ने मिलकर कांग्रेस के खिलाफ एक विकल्प दिया था। ठीक उसी प्रकार किसी भी विचार धारा का किसान संगठन हो अब एक जुट हो गया है। किसान आंदोलन के एकजुट होने से देश को एक नई दिशा मिलेगी। इससे एक नयी जागृति आयेगी। राजस्थान की किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा कि जल, जमीन, जंगल और जानवर को मित्र माना गया है। इसलिए सरकार ने पहला काम किया कि इनको एक दूसरे का विरोधी बना दिया। पीलीभीत वालों आपने पेड बबूल का बोया तो आप आम कैसे पाओंगे। आपने यदि वीएम सिंह को अपना सांसद बनाया होता तो शायद आज किसानों की दशा यहां खराब नहीं होती। उन्होंने कहाकि विकास और खुशहाली में से आपको एक रास्ता चुनना होगा। विकास अंधेरी गुफा है, जो सत्तर साल में भी नहीं आ पाया। इसलिए आप खुशहाली का रास्ता चुनों। उनका कहना था कि किसानों के लिए जो आयोग बना था उस आयोग ने कहा था कि किसानों को लागत का डेढगुना मूल्य दिया जाए। मोदी ने पहले बायदा किया अब मुकर गए है। उनका कहना था किसान लेनदार है, जबकि सरकार देनदार है। इसलिए अब समय आ गया है कि आप किसान राज लाने के लिए एकजुट हो जाएं। 

 

चिंतक तथा स्वराज इंडिया के योगेंद्र यादव ने कहा कि सौ घंटे के किसानी के काम में 60 से 70 घंटे काम महिलाएं करती है। उन्हांेंने कहा कि इसी पीलीभीत में 2000 में एक किसानों के संगठन का उदय हुआ था। आज यह संगठन किसान मजदूर संगठन 17 साल का हो गया है। इसके अध्यक्ष अखिल भारतीय किसान समन्वय संघर्ष समिति के राष्ट्रीय संयोजक है। आज देश केकिसान मजदूर सभी के नाक से पानी उपर हो गया है। उन्होंने किसानों से सवाल किया कि उनको धान की कीमत पूरी मिली लोगों ने कहा कि नहीं, फिर उन्होंने मजदूरों से सवाल किया कि मनरेगा में उनको सौ दिन काम मिला तो वहां मौजूद महिलाओं ने नहीं में जबाव दिया। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री जैसे पद पर बैठा व्यक्ति झूठ बोल रहा है तो कैसे चलेगा। अब ड्रामा नहीं चलेगा। किसानों के सारे कर्जे सरकार को माफ करना चाहिए। सरकार कहती है उनके पास पैसा नहीं है। केरला में दस साल पहले वहां की सरकार ने इसका प्रयास किया। वहां किसानों के कर्जे माफ हुए। बुलेट ट्रेन के लिए मोदी जी को सवा लाख करोड मिल जाता है लेकिन किसानों के कर्ज माफ करने के लिए उनके पास पैसा नहीं है। उन्होने देश के औद्योगिक घरानों के 12 लाख करोड के कर्ज माफ कर दिये। उसके लिए पैसा है। उन्होंने कहा कि पहली बार देश के 181 संगठन किसान एकता के लिए एकजुट हुए है। 

 

शेतकरी संघटना के अध्यक्ष तथा कोल्हापुर के सांसद राजू शेट्टी ने कहा कि 13 राज्यों से होते हुए यह किसान मुक्ति यात्रा यहां आई है। उन्होंने कहा कि मुझे किसानों ने चुनकर भेजा है। पहले विधायक बनाया। उनके चंदे से डेढ लाख रूपये बचाये। दूसरी बार किसानों ने उनको 2009 और 2014 में सांसद बनाया। अब 2019 में किसान फिर से उनको सांसद बनायेंगे। उनके क्षेत्र के किसानों ने उनको कहा कि वे पूरे देश की यात्रा करें और किसानों को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष करें। उनके आदेश पर मैं यहां आया हूं। उन्होंने कहा कि आप लोग अपने इलाके से किसान नेता को संसद पहुंचाएं। 

सभा को अखिल भारतीय किसान समन्वय संघर्ष समिति के संयोजक वीएम सिंह ने संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने समय-समय यहां के किसानो ंकी लडाई लडी है। 6 जून और 15 अगस्त 2006 को रेलवे स्टेशन पर बडी लाइन के लिए धरना दिया। सोनिया गांधी से बात की और तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पूरनपुर में बडी रेल लाइन की घोषणा की श्रेय उनकी बहन मेनका गांधी लूट ले गई। उन्होंने धान खरीद के लिए आंदोलन किया उसके बाद पूरे प्रदेश में धान की सरकारी खरीद शुरू हुईं। गढा जंगल में जब हनुमान मंदिर उनकी बहन ने तुडवाया तो केंद्र तथा राज्य में भाजपा की सरकार थी। उस समय भी उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली और गढा का मंदिर बनवाया। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट कांग्रेस ने लागू नहीं की। जब मोदी प्रधानमंत्री पद के दावेदार हुए तो उन्होंने स्पष्ट किया वे इस आयोग की रिपोर्ट को लागू करायेंगे। लोगो ंने उन पर भरोसा किया अब वहीं मोदी जी सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहते है कि यह संभव नहीं है।

 

उन्होंने कहा कि हमने मंदसौर से अपनी यात्रा का पहला चरण पूरा किया था। दूसरा चरण चंपारण से शुरू किया। हमने महात्मागांधी से कहा कि वह अपने गुजराती भाई नरेंद्र मोदी को सद्बुद्धि प्रदान करें। उन्होंने सभा में मौजूद किसानों से आग्रह किया कि वो आगामी 20 नंबवर को दिल्ली में होने वाली किसान संसद में भाग लें। और अपनी ताकत मोदी और योगी सरकार को दिखा दें। 181 संगठन अब एकजुट हुए है। बीस नंवबर तक वे पूरे देश का दौरा कर लेंगे। यह संसद एक ताकत के रूप में जंतर मंतर पर एकजुट होगी। इस किसान मुक्ति यात्रा को अन्ना हजारे जैसे नेता ने अपना समर्थन दिया है।  

सभा में स्थानीय नेता जमीर अख्तर हसनी, हारून अहमद, संयुक्तबार के अध्यक्ष किशन लाल एडवोकेट, श्रवणदत्त सिंह, गुल्लू पहलवान, यूसुफ मलिक ने संबोधन किया। संचालन अखिल भारतीय किसान सभा के राज्य कार्यकारिणी सदस्य अफरोज आलम ने किया। सभा में हजारों की संख्या में किसान मौजूद रहे। 

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