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क्या आपका बच्चा बड़ा हो गया है ,जानिए जरूरी बातें रिलेशनशिप के लिए बहुत जरूरी बातें



क्या आपका बच्चा बड़ा हो गया है ,जानिए जरूरी बातें  रिलेशनशिप के लिए बहुत जरूरी बातें

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ङेस्क-एक बाप और बेटे की बेहतरीन रिलेशनशिप के लिए बहुत जरूरी है कि जब बेटा कंधे बराबर हो जाये यानी 18 वर्ष की उम्र पार कर जाए,तो बेटे को बेटे की तरह नही बल्कि एक दोस्त की तरह पेश आया जाए।ऐसा करने से आपकी घनिष्ठता बनी रहेगी और जीवन में अनावश्यक तनाव से मुक्ति मिलेगी ।
मगर आमतौर पर भारत जैसे देश में ऐसा कम ही देखने को मिलता है


आइये जानते है इसके पीछे क्या वजह हो सकती है ।-


1) तुम अभी बच्चे हो


जब बेटा जवानी की दहलीज पर पहुंचता है तो वह खुद को समझदार मानता है,लेकिन कहावत है कि बाप-बाप होता है और बेटा-बेटा, बस यही एक बात पिता जी के पुरानी सोच वाले दिमाग मे फिट हो गई होती है और अधिकांशतः पिता इस बात को अपने दिमाग से निकाल नही पाते और वह बेटे को नासमझ और बच्चा ही मानते रहते है।और यही बात बाप-बेटे की दोस्ती की राह में रोड़ा बन जाती है।


2)कब लोगे जिम्मेदारी


पता नही क्यो हर पिता को लगता है कि उनका बेटा कोई काम जिम्मेदारी सी नही करता और हर बेटे को लगता है की पाप बिना बात के हर बात में कमी निकालते हैं।
इन conditions में पिता और पुत्र को साथ बैठ कर बात करना चाहिए पर अमूमन ऐसा हो नही पाता है और इसी के चलते पिता और पुत्र के बीच पनप जाती है,एक और तकरार की स्थिति।


 


 


3) तुम्हारे बस का कोई काम नही है


जब कोई पुत्र किसी नये काम की पहल करता है और उस काम का उत्तरदायित्व लेता है,और ऐसे में यदि पिता कह दे :- "सोच लो,ये काम तुम्हारे बस का नही है,कही बाद में मुझे ये न कहना पड़े की मुझसे नही होगा । इस से अच्छा है अभी मना करदो ।"


यह बात कोई भी पुत्र नही चाहेगा कि उसे अपने पिता से सुनने को मिले,पुत्र ऐसे में चाहते है कि पिता उनके साथ खड़े हों,उसे हौसला और हिम्मत दें।ऐसे में जब पिता ऐसी बात करते है,तो पुत्र उनसे हिचकने लगते है और उनसे दूर होने लगते है।


4)ये है तुम्हारे दोस्त


ज्यादातर लड़को को इस दुनिया में अगर कुछ सबसे प्यारा है तो वह है उनके दोस्त,ऐसे में जब भी पिता अपने पुत्र से उसके मित्रों को लेकर खामी निकालते हैं और उनसे दूर रहने की नसीहत देते है तो यह बात पुत्र को कतई रास नही आती।
पर बाप तो आखिर बाप उन्हें समझाने का खतरा कौन मोल ले।


5)तुम्हारे पास घुमने के अलावा भी कोई काम है?


कभी कभी ऐसी स्थितियां पैदा हो जाती है जब पुत्र को लगता है कि उनके पिता जी को उसकी हर चीज से दिक्कत है। इसके पीछे अपने अपने कई वजहें है,जैसे पिता का भरोसा न दिखाना ,बेमतलब शक करना उन्हें झुंझलाने पर मजबूर करता है। ऐसे में यदि पुत्र घर के किसी काम सी बाहर गया हो और लौट के आने पर यही ताना सुनने को मिले तब तो समझो हुई महाभारत । दोस्तो यह लेख आपको कैसा लगा,हमे कमेंट करके जरूर बताएं। इससे हमारा हौसला बढ़ेगा। अगर आपको ये ब्लॉग पसंद आया हो तो इसे शेयर करें,अगले ब्लॉग में हैम जानेंगे कि पिता-पुत्र के बीच बढ़ रही दूरियों को प्यार में कैसे बदला जाए ।
साभार ब्लॉग


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