आरबीआई को पड़ रही है नई मशीनों की जरुरत जानिए क्यों

नई दिल्ली:नोट बंदी के दौरान सरकार के पास इतने पुराने नोट आ गए हैं कि उन्हें गिनने के लिए और नई मशीनों की खरीददारी करनी पड़ रही है | वित्त मंत्री अरुण जेटली ने साफ़ कर दिया है की अभी पुराने नोटों की गिनती के लिए आरबीआई को समय लगेगा | जेटली ने कहा आरबीआई को करीब 14-15 लाख करोड़ रुपयों की गिनती करनी है उसके बाद ही सही आंकड़े बता पाना संभव हो पायेगा |आरबीआई को नोटों को गिनने के लिए नए मशीनों को खरीदने की आवश्यकता पड़ रही है |

वित्त मंत्री ने निजी चैनल को दिए गए इंटरव्यू में कहा कि

  • यह बात स्पष्ट हो जाए कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को हर कीमत के नोटों की गिनती करनी है और आप लाखों करोड़ रुपये के बारे में सोच सकते हैं.
  • आरबीआई को करीब 14-15 लाख करोड़ रुपयों की गिनती करनी है. अवैध करार दे दिए गए हर नोट को गिनना होगा और आरबीआई बिल्कुल सही-सही आंकड़े देगा.
  • आरबीआई पर करना होगा विश्वास
  • इतने पुराने नोटों की गिनती इतनी जल्दी कर पाना संभव नहीं है इसके बाद ही बिलकुल सही आंकड़ा बता पाना संभव होगा |
  • प्रत्येक कीमत के नोटों की गिनती करने के लिए आरबीआई ने बहुत बड़ी प्रणाली तैयार की है. तो जब आपको 14-15 लाख करोड़ रुपयों की गिनती करनी हो तो स्वाभाविक ही है कि इसमें काफी वक्त लगेगा.

ब्याज दरों में कटौती के दिए संकेत

  • वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को कहा कि इस कटौती के लिए बिल्कुल सही समय है क्योंकि मुद्रास्फीति नियंत्रण में है और मॉनसून का पूर्वानुमान भी अच्छा है.
  • लंबे समय से मुद्रास्फीति नियंत्रण में है. मॉनसून अच्छा होने की संभावना है.
  • पेट्रोल और शेल गैस के बीच संतुलन को दर्शाता है कि तेल की कीमतें अधिक नहीं बढ़ेंगी. विकास और निवेश में बढ़ोतरी की जरूरत है. इन परिस्थितियों में कोई भी वित्त मंत्री चाहेगा कि दरों में कटौती हो.
  • रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) प्रमुख ब्याज दरों पर निर्णय लेने के लिए 6-7 जून को बैठक करेगी.
  • हमें एमपीसी के निर्णय का इंतजार करना चाहिए. एमपीसी प्रयोग का यह पहला साल है.
  • जेटली ने कहा कि सरकार का जोर निजी निवेश और बैंकिंग क्षेत्र के पुनरुत्थान पर है. तीन-चार साल की मंदी के बाद दुनिया में अर्थव्यवस्था के विकास का सकारात्मक संदेश मिल रहा है. उन्होंने कहा कि बैंकों द्वारा अतीत में अंधाधुंध उधार दिए जाने से फंसे हुए कर्ज की समस्या बढ़ी है.

जिस तरह से वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संकेत दिए है उसको देख कर लगता है की भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत है जिसका असर आम आदमी की जिंदगी पर भी पड़ सकता है |


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