एन एस जी मामले में चीन और अमेरिका आमने सामने

नई दिल्ली-चीन के लगातार विरोध के बावजूद भारत एन एस जी में अपनी सदस्यता के लिए मजबूत रणनीति बना रहा है इसे मोदी की मजबूत विदेश निति ही कहेंगे कि 48 में से 29 देश भारत के साथ हैं और चीन का विरोध भी कमजोर पड़ता दिख रहा है भारत को पहले ही अमेरिका, ब्रिटेन, रूस समेत तमाम बड़े देश समर्थन कर चुके हैं। वह भारत के खिलाफ माहौल बना रहा है और यह भी चाहता है कि पाकिस्तान को इस समूह में शामिल कर लिया जाए।

भारत को लेकर चीन और अमेरिका आमने सामने

भारत के मामले में चीन जहाँ अन्य देशों को इस बात के लिए तैयार कर रहा है कि भारत के सदस्यता के बारे में चर्चा सियोल में न की जाए वहीँ अमेरिका ने अपील की है कि वे भारत की सदस्यता का समर्थन करें।अर्जेंटीना का इसमें अहम रोल है क्योंकि मौजूदा दौर में वही की अगुवाई कर रहा है।24 जून की तारीख अहमएनएसजी में भारत की सदस्यता को लेकर 24 जून की तारीख अहम है। इस दिन सिओल में सभी 48 सदस्यों की बैठक होना है। प्लान बी के तहत एक वर्किंग ग्रुप बनाया जाएगा, जो एनपीटी यानी नॉन प्रॉलिफरेशन ट्रीटी पर साइन न करने वालों को एनएसजी में एंट्री के लिए खाका तैयार करेगा। इस प्‍लान के पीछे मकसद यह है कि सिओल में कम-से-कम भारत की सदस्‍यता को लेकर चर्चा तो हो।मालूम हो, चीन ने अपने ताजा बयान में कहा है कि सिओल में होने वाली बैठक के एजेंडे में भारत की सदस्यता पर चर्चा शामिल नहीं है।

23 जून है भारत के लिए महत्वपूर्ण

इसमें सदस्यता के लिए भारत का आवेदन स्‍वीकार कर लिया गया है। इसका मतलब ये कि भारत की सदस्‍यता पर सिओल में चर्चा हो सकता है।चीनी राष्ट्रपति से मिलेंगे मोदी24 जून को सिओल में होने वाली एनएसजी की बैठक से पहले 23 जून को पीएम मोदी उज्बेकिस्तान में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलेंगे। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री चीनी राष्ट्रपति को मनाने की आखिरी कोशिश जरूर करेंगे।

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