तेज हुयी यूपी में मुख्यमंत्री के लिए सियासत

लखनऊ(सौरभ शुक्ला )-देश की सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्तर पदेश में तीन चौथाई बहुमत के साथ शानदार तरीके से अपने सत्ता का वनवास खत्म करने वाली भाजपा सूबे के नए सूबेदार के चयन को लेकर किसी जल्दबाजी में नहीं दिखाई दे रही है। राज्य के नवनिर्वाचित विधायकों में से नए नेता के चयन को लेकर मीडिया में चल रही अटकलों को खारिज करते हुए विधायकों के बीच रायशुमारी के लिए नियुक्त हुए वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री एम वेंकैया नायडू के अनुसार 16 और 17 को दिल्ली में व्यस्तता के चलते वह अब 18 मार्च को लखनऊ पहुंचेंगे। उल्लेखनीय है कि रविवार को पार्टी संसदीय दल की बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव भूपेंद्र यादव और पूर्व भाजपा अध्यक्ष एम वेंकैया नायडू को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया था।

जानकारों की मानें तो राज्य के विधायकों से फोन पर नायडू उनकी राय जानने में लगे हुए हैं। वहीं मंगलवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और वेंकैया के बीच लगभग पांच घंटे तक बैठक चली। गुरुवार को भी नायडू ने शाह से मुलाकात के लिए समय मांगा है। वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री पद की रेस में शामिल पार्टी के पदेश अध्यक्ष केशव पसाद मौर्य ने पधानमंत्री से मुलाकात कर अटकलों के बाजार को और गरम कर दिया। हालांकि मौर्य इसे शिष्टाचार मुलाकात बता रहे थे। लेकिन पार्टी हलकों में चल रही खबरों की मानें तो मौर्य अपनी दावेदारी बढ़ाने की गरज से ही मोदी से मुलाकात करने पहुंचे थे। उत्तर पदेश के नए चेहरे को लेकर की जा रही रायशुमारी में शामिल एक वरिष्ठ नेता की मानें तो पार्टी सीएम पद के लिए नए सीएम की जाति से ज्यादा उसकी योग्यता, सबको साथ लेकर चलने की कला और अनुभव को तरजीह दे रही है। पार्टी नेता के अनुसार जब राज्य में जनता ने एक नहीं दो-दो बार जब जाति से ऊपर उठकर मतदान किया तो फिर हम पदेश की राजनीति को उस चश्में से क्यों देखे। हालांकि पार्टी हलकों में एक खबर जरूर बड़ी गंभीरता के साथ तैर रही है कि नया नेता चुने हुए विधायकों के बीच से आना चाहिए न कि उसे दिल्ली से भेजा जाए। संदेश स्पष्ट है कि पार्टी किसी लोकसभा सांसद को इस्तीफा दिलाकर उप चुनाव का खतरा फिलहाल मोल नहीं लेना चाहती है। दूसरा यदि नए नेता का चयन विधायकों के बीच से ही हुआ तो फिर केंद्रीय मंत्रियों के यूपी वापसी का सपना स्वत ही चकनाचूर हो जाएगा।


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