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समान नागरिक संहिता जरूरी, आम राय के बाद: कानून मंत्री



समान नागरिक संहिता जरूरी, आम राय के बाद: कानून मंत्री

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नई दिल्ली: कानून मंत्री सदानंद गौडा ने कहा है कि देश की अखंडता के लिए समान नागरिक संहिता जरूरी है लेकिन इस पर कोई भी निर्णय बिना आम सहमति बने नहीं लिया जा सकता। उन्होंने कहा कि संविधान की प्रस्तावना और आर्टिकल 44 में भी कहा गया है कि समान नागरिक संहिता होनी चाहिए। देश की अखंडता के लिए आम नागरिक संहिता की जरूरत है। लेकिन यह बहुत संवेदनशील मुद्दा है और इस पर विस्तार से चर्चा जरूरी है। 

समान नागरिक संहिता लागू करने की समय सीमा के बारे में पूछे जाने पर कानून मंत्री ने कहा कि इस तरह के निर्णय एक-दो दिन में नहीं लिए जा सकते। इसमें समय लगेगा लेकिन निश्चित रूप से इस दिशा में कदम उठाने की जरूरत है। केरल और कर्नाटक के हाईकोर्टों ने भी समान नागरिक संहिता की जरूरत जताई है। सरकार बनने के बाद भी इस मुद्दे पर आगे न बढने के सवाल पर गौडा ने कहा कि आज भी हम इस पर आगे नहीं जा सकते, क्योंकि यह मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है। धीरे-धीरे हम इस पर आगे बढेंगे। 

गौडा ने राम मंदिर और जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने के सवाल पर भी ऎसा ही जवाब दिया और बताया कि पार्टी ने कभी नहीं कहा कि ये चीजें तुरंत बदल जाएंगी। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की बैंच ने समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए थे। जस्टिस विक्रमजीत सेन और जस्टिस शिवकीर्ति ने तीन सप्ताह के भीतर इस मसले पर सरकार से जवाब देने को कहा है। 

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