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सर्वोच्चा अदालत द्वारा जजों की नियुक्ति के लिए गठित राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग को असंवैधानिक कहा



सर्वोच्चा अदालत द्वारा जजों की नियुक्ति के लिए गठित राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग को असंवैधानिक कहा

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नई दिल्ली: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को सुुप्रीम कोर्ट से करारा झटका लगा है। देश की सर्वोच्चा अदालत ने शुक्रवार को मोदी सरकार द्वारा जजों की नियुक्ति के लिए गठित राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) को असंवैधानिक करार दिया है। लंबी-चौ़डी बहस के बाद पांच जजों की पीठ ने 15 जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे आज सुनाया गया। इस पीठ में जस्टिस जेएस केहर, जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस मदन बी लोकुर, जस्टिस कुरियन जोजेफ और जस्टिस एके गोयल शामिल थे। 
गौरतलब है कि वर्तमान राजग सरकार ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्टो में जजों की नियुक्ति के लिए 22 साल पुराने कोलेजियम सिस्टम की जगह एनजेएसी का गठन किया था। वर्तमान में किसी हाईकोर्ट में नए जज की नियुक्ति के लिए उसी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और दो सबसे वरिष्ठ जज नियुक्ति के लिए सिफारिश करते हैं। उन्हें यह अधिकार 1993 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत मिला है। शॉर्टलिस्टेड उम्मीदवारों की स्क्रूटनी 5 सबसे वरिष्ठ जजों के द्वारा किया जाता है जिसे चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया द्वारा फाइनल किया जाता है। 
सुप्रीम कोर्ट जजों की यही टीम हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों का चुनाव करती है जो कि बाद में सुप्रीम कोर्ट में जाते हैं। इस सारे सिस्टम को तोडते हुए केंद्र एनजेएसी लेकर आई थी जो कि भारत के मुख्य न्यायाधीश समेत सुप्रीम कोर्ट के 6 सदस्यों को दरकिनार करता है। एनजेएसी में यह काम केंद्रीय कानून मंत्री और दो प्रख्यात मंत्रियों को करते हैं, जिनका कार्यकाल तीन-तीन साल का होगा। इन दो मंत्रियों कोचीफ जस्टिस ऑफ इंडिया, प्रधानमंत्री और नेता प्रतिपक्ष द्वारा मनोनीत किया जाएगा। 

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