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पी. एम. फेसबुक छोड जमीन पर काम करें : अखिलेश



पी. एम. फेसबुक छोड जमीन पर काम करें : अखिलेश

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लखनऊ--देश के सबसे युवा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री को सलाह दी है कि उन्हें फेसबुक के बजाय जमीनी स्तर पर ज्यादा काम करना चाहिए। एनडीटीवी के शो "वॉक द टॉक" में अखिलेश ने कहा कि पीएम को अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और सहयोगी दलों को ज्यादा प्रोग्रेसिव होने की सलाह देनी चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी को दुनिया में सोशल मीडिया का सर्वाधिक प्रयोग करने वाले नेताओं में गिना जाता है। 
अखिलेश से सवाल पूछा गया था कि अगर वह और पीएम मोदी आमने-सामने आएं तो वह उन्हें क्या संदेश देना चाहेंगे। इसके जवाब में अखिलेश ने कहा, फेसबुक पर कम बात हो, जमीन पर ज्यादा काम हो। 28 सितंबर को नोएडा के बिसाहडा गांव में बीफ की अफवाह पर मोहम्मद अखलाक की हत्या के मामले में 42 साल के अखिलेश ने भाजपा पर खूब हमले किए। इस मामले में गिरफ्तार लोगों में से सात ऎसे हैं, जिनका स्थानीय भाजपा नेताओं के साथ कनेक्शन है। इस मुद्दे पर भाजपा के कई नताओं ने असंवेदनशील बयान भी दिए थे। 

पीएम मोदी ने बुधवार को पहली बार इस मुद्दे पर सीधी प्रतिक्रिया दी। मोदी ने कहा कि इस घटना से वह दुखी हैं, लेकिन सवाल उठता है कि इसमें केंद्र सरकार की क्या भूमिका है! अखिलेश यादव और सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने आरोप लगाए थे कि यह अचानक नहीं हुई थी, बल्कि इसके पीछे राज्य में सांप्रदायिक दंगे भडकाने की भाजपा की रणनीति थी। अखिलेश ने कहा, मैं व्यक्तिगत तौर पर बीफ खाने के खिलाफ हूं, लेकिन दुनियाभर में लोग इसे खाते हैं। क्या उन्हें अपनी इंडस्ट्री बंद कर देनी चाहिए। आप कानून अपने हाथ में नहीं ले सकते। एक आदमी अपने घर में कुछ खा रहा है, और अब देखिए कि बहस किस मुद्दे पर हो रही है। 
लोग कह रहे हैं कि मैंने बीफ खाया है... आओ और मुझे मार डालो। क्या यही भारतीय संस्कृति है! दुनिया क्या कहेगी! अखिलेश ने कहा, दादरी मामले पर अंतरराष्ट्रीय प्रेस में जो भी छपा है, उसे देखकर भाजपा और पीएम को बेहद शर्मिदगी होगी। 

अखिलेश के इन बयानों का जवाब देते हुए भाजपा प्रवक्ता नलिनी कोहली कि अखिलेश को यूपी की कानून व्यवस्था और प्रशासन पर ध्यान देना चाहिए, जिस पर हर कोई हंस रहा है। नलिनी ने कहा, अखिलेश को जवाब देना चाहिए कि यूपी पुलिस लोगों को खोजने के बजाय भैंस क्यों खोज रही है। फेसबुक और टि्वटर संचार के माध्यम हैं, सरकार चलाने के नहीं, और सरकार काम कर रही है। इसकी उपलब्धियों को देखिए।

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