aapkikhabar aapkikhabar

पांच सरल नियम अपनाये, मां दुर्गा की कृपा अवश्य प्राप्ति होगी



पांच सरल नियम अपनाये, मां दुर्गा की कृपा अवश्य प्राप्ति होगी

aapkikhabar.com

जगत् जननी, शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की उपासना एक ऎसा मार्ग है जिस पर चलकर मनुष्य सभी सुखों का उपभोग व अपने कर्त्तव्य का पालन करके मोक्ष प्राप्त करता है। नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा विशेष फलदायी है। मनुष्य की शक्तियां अनंत हैं।
1. शुद्धता और पवित्रता जरूरी

नवरात्र शुद्धता से जुडा पर्व है, जिसमें नौ दिनों तक पूर्ण पवित्रता और सात्विकता बनाए रखते हुए देवी के नौ स्वरूपों की आराधना करने का विधान है। इसलिए नवरात्र के दिनों बहुत से श्रद्धालु कपडे धोने, शेविंग करने, बाल कटाने और पलंग या खाट पर सोने से बचते हैं। 

2. विष्णु पुराण के अनुसार

नवरात्र में व्रत के समय बार-बार पानी पीने, दिन में सोने, तम्बाकू चबाने और स्त्री के साथ संबंध बनाने से भी व्रत खंडित हो जाता है। यानी नवरात्र में पति-पत्नी को साथ सोने से भी बचना चाहिए। 

3. नहीं होता विवाह

नवरात्र के दिनों में विवाह का आयोजन भी नहीं होता है। इसका प्रमुख कारण यह है कि विवाह का उद्देश्य वंश वृद्घि यानी संतान की उत्पत्ति है। जबकि नवरात्र के दिनों में काम और स्त्री प्रसंग से दूर रहने का नियम है। यह भक्ति और आस्था में डूबने का समय होता है। विवाह संस्कार होने से मां की आराधना से व्यक्ति वंचित हो सकता है। 

4. रात्रि में पूजा

शास्त्रों में यह भी बताया गया है कि नवरात्र के दिनों में रात्रि के समय देवी की पूजा अधिक फलदायी होती है क्योंकि देवी रात्रि स्वरूप हैं और भगवान शिव दिन के स्वरूप। इसलिए नवरात्र के दिनों में मन को एकाग्र करके देवी में ही लगाना चाहिए न कि उन्य चीजों में। 

5. ब्रह्मचर्य का पालन

नवरात्रों में लोग अनेक नियमों का भी पालन करते हैं। ऎसा ही एक नियम है नवरात्रों के दौरान खुद को शारीरिक संबंध बनाने से दूर रखना है। जिस बिस्तर पर पति-पत्नी शारीरिक सम्बन्ध बनाते हैं उसी को छूकर देवी का आह्वान करना अशुद्ध माना जाता है। आप अशुद्ध मन से देवी मां की पूजा कर नहीं सकते इसलिए कम से कम उन नौ दिनों तक खुद पर नियंत्रण रखिए जिस दौरान स्वयं देवी मां हमारे घर पधारती हैं। 

-



सम्बंधित खबरें



खबरें स्लाइड्स में


खबरें ज़रा हट के