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रिजर्व बैंक गवर्नर के पर कतरने की तैयारी में सरकार!

रिजर्व बैंक गवर्नर के पर कतरने की तैयारी में सरकार!
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नई दिल्ली: ज्यूडिशरी पर अंकुश लगाने में मात खाने के बाद अब मोदी सरकार भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के पर कतरने की तैयारी की है। सरकार ने एक ड्राफ्ट जारी किया है, जिसमें मॉनिटरी पॉलिसी तय करने को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के विशिष्ट अधिकारों में कटौती करने का प्रस्ताव है। इसमें सात सदस्यों की एक कमेटी गठित करने का प्रावधान है, जो मॉनिटरी पॉलिसी का ड्राफ्ट करेगी।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने सात सदस्यीय कमेटी बनाने का प्रस्ताव दिया है। इसमें सरकार के चार और आरबीआई के तीन सदस्य होंगे। सरकार के चार में से एक के पास वोटिंग अधिकार नहीं होगा। आरबीआई के इन्हीं तीन सदस्यों में आरबीआई का गवर्नर भी होगा। नए प्रस्ताव के मुताबिक, गवर्नर भले ही इस समिति का अध्यक्ष होगा, लेकिन उसके पास किसी प्रकार की वीटो पॉवर नहीं होगी, वह केवल वोट कर सकेगा।

सरकार ने प्रस्ताव ने कहा है कि आरबीआई गवर्नर के अलावा बैंक दो सदस्यों को समिति के लिए नामित कर सकता है। इसमें डिप्टी गवर्नर के अलावा एक और अधिकारी होगा। मौद्रिक नीति पर बनने वाली इस समिति का निर्णय आरबीआई पर बाध्यकारी होगा, और निर्णय बहुमत के आधार पर लिया जाएगा। दो विभिन्न मतों में समान विभाजन की स्थिति में आरबीआई गवर्नर अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेगा।

मौद्रिक नीति पर बनने वाली समिति आरबीआई की तमाम ब्याज दरों को तय करेगी और महंगाई के टारगेट भी तय करेगी। वर्तमान में आरबीआई गवर्नर के पास एक तकनीकि सलाहकार समिति है जो उसे मौद्रिक नीति पर राय दिया करती है। यह राय स्वीकारना या नकारना गवर्नर के विवेक पर निर्भर करता है। इससे पहले भी ऎसे ही एक प्रस्ताव को लेकर विवाद हो गया था जिसमें कहा गया था कि सरकार इस प्रकार की समिति में ज्यादा सदस्यों की नियुक्ति करेगी। उस प्रस्ताव में भी आरबीआई के गवर्नर के वीटो अधिकार को समाप्त करने की बात कही गई थी।

आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन पहले ही कह चुके हैं कि यह सही होगा कि गवर्नर के वीटो अधिकार को समाप्त किया जाए और अच्छा होगा कि एक व्यक्ति के बजाय एक समिति प्रमुख ब्याज दरों पर निर्णय ले। केंद्रीय वित्तमंत्री अरूण जेटली ने कहा कि सरकार और आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति पर एक राय है और यह काम तमाम अन्य देशों में चल रही व्यवस्था के हिसाब से किया जा रहा है। नई समिति हर छह महीने के लिए लक्षित महंगाई दर तय करेगी और यह दर छह महीने से लेकर 18 महीने तक के लिए तय की जाएगी। समिति अपनी बैठकों का लेखा-जोखा तुरंत प्रकाशित करेगी और वोटिंग पैटर्न को भी सार्वजनिक किया जाएगा।
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