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क्या क्या न किये हमने सितम "सरकार" की खातिर



क्या क्या न किये हमने सितम

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जाँच रिपोर्ट मिलने से पहले कार्यवाही शुरू

लखनऊ -बात जब निष्ठा की हो तो कुछ भी किया जा सकता है चाहे वह अपने पद के अनुरूप भी न हो और यही खुलासा हुआ जब आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर की इलाहबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में दायर एक याचिका में एसपी विजिलेंस शकील-उज़-ज़मा द्वारा प्रस्तुत हलफनामे से उनके खिलाफ शुरू किये गए सतर्कता जाँच के सम्बन्ध में एक नया तथ्य सामने आया है.



इस हलफनामे के पैरा 07 के अनुसार श्री ठाकुर के खिलाफ 09 मार्च 2015 को गोपनीय जाँच शुरू की गयी जिसकी रिपोर्ट सतर्कता अधिष्ठान द्वारा 22 जुलाई को सौंपी गयी जिसमे श्री ठाकुर के खिलाफ आरोपों में सत्यता पाए जाने पर उनके खिलाफ खुली जाँच की संस्तुति की गयी.



इसके विपरीत हलफनामे के पैरा 08 के अनुसार उनके खिलाफ 09 जुलाई को खुली जाँच शुरू की गयी. इन तथ्यों के सामने आने के बाद श्री ठाकुर ने मुख्य सचिव आलोक रंजन को पत्र लिखकर पूछा है कि जब उनके खिलाफ हुई गोपनीय जाँच में 22 जुलाई को रिपोर्ट ही सौंपी गयी तो उससे 13 दिन पहले उसी रिपोर्ट के आधार पर खुली जाँच कैसे शुरू कर दी गयी. उन्होंने पत्र में आरोप लगाया है कि उनके द्वारा 11 जुलाई को मुलायम सिंह की शिकायत करने के बाद बैक-डेट में यह सब किया गया है.


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