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महिलाओ को भी हो रहा है फेफड़ो का कैंसर

महिलाओ को भी हो रहा है फेफड़ो का कैंसर
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नई दिल्ली-- फेफडों का कैंसर अब केवल धूम्रपान करने वाले लोगों तक ही सीमित नहीं है। इस खतरनाक और जानलेवा बीमारी की चपेट में सबसे ज्यादा भारतीय पुरूष हैं और आने वाले कुछ सालों में इसका असर महिलाओं में भी देखने को मिल सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि जितनी जल्दी इस बीमारी का पता चलता है, उतना ही बेहतर इलाज किया जा सकता है।
सर गंगा राम हॉस्पीटल के सेंटर फॉर चेस्ट सर्जरी के चेयरमैन अरविंद कुमार ने बताया कि पूरे विश्व में फेफ़डों के कैंसर से पीडितों में सबसे अधिक संख्या भारतीय पुरूषों की है जिसकी सबसे बडी वजह समय रहते इलाज न मिल पाना है और आने वाले समय में इसका असर महिलाओं में भी देखने को मिल सकता है। कुल मिलाकर आने वाले समय में हमारा देश फेफ़डों की बीमारियों से ग्रसित हो सकता है। ठीक समय पर बीमारी की पहचान और सही इलाज से इस बीमारी को वश में किया जा सकता है।
डॉक्टरों और वैज्ञानिकों की तरह पूरी दुनिया इस बीमारी को बेहतर तरीके से समझने की कोशिश कर रही है। रोगियों में इस खतरनाक बीमारी के प्रति जागरूकता की कमी होना ही चिंता का सबसे ब़डा विषय है। अरविंद कुमार कहते हैं कि तग़डी सर्दी, बलगम और कफ जैसे लक्षण दिखाई देने पर सावधानी बरतते हुए किसी अच्छे डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, लेकिन जागरूकता की कमी की वजह से लोग अक्सर मौसम को जिम्मेदार बताते हुए हल्दी दूध और घरेलू नुस्खों को आजमाते हैं जो इन बीमारियों के बढ़ने की मुख्य वजह है।
हकीकत में सही समय पर इलाज न मिल पाना ही इस बीमारी की ब़डी वजह है। कुमार के अनुसार, सिगरेट में निकोटीन, कोकीन, हेरोइन और 4000 से ज्यादा केमिकल्स मौजूद होते हैं, जिनमें 50 केमिकल्स कैंसर के कारक होते हैं। ये फेफडों को बुरी तरह प्रभावित करते हैं। राजीव गांधी कैंसर संस्थान के थोरेसिक सर्जन एल.एम. डारलोंग कहते हैं कि स्मोकिंग एक फेमस रिस्क फैक्टर है। यह कोल और बॉक्साइट खनन की तरह न केवल फेफ़डों को प्रभावित करता है, बल्कि आसपास के वातावरण को भी जहरीला बनाता है।
इसलिए सभी लोगों के बीच यह संदेश जाना चाहिए कि फेफडों का कैंसर धूम्रपान करने वालों तक सीमित नहीं है। मेदांता हॉस्पीटल के सर्जन अली जामिर खां ने बताया कि सिगरेट का धुआं सबसे पहले सांस की नली के उन बालों को नष्ट कर देता है जोकि कीटाणुओं और अन्य कणों को अंदर जाने से रोकते हैं। इसके बाद कफ को बाहर फेंकने वाली श्वास नली जाम हो जाती है। कफ को हल्के में नहीं लेना चाहिए यह कैंसर का शुरूआती लक्षण हो सकता है। डॉक्टर खान ने बताया कि उन्होंने अपना काफी समय सीनियर स्कूल के छात्रों के बीच स्मोकिंग के दुष्प्रभावों और इससे होने वाले कैंसर की जानकारी देने में बताया है।

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