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लोकसभा में मोदी ने कहा " ''वसुधैव कुटुम्बकम''

लोकसभा में मोदी ने कहा  वसुधैव कुटुम्बकम
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आइडिया ऑफ इंडिया... ''वसुधैव कुटुम्बकम''

सरकार का एक ही धर्म 'इंडिया फर्स्ट', एक ही धर्मग्रंथ 'संविधान'।

सभी अपने अधिकारों के साथ साथ कर्तव्यों की भी बात करें।

हमने न्यूनतम पेंशन 1000 की।

लोक अदालत, सामाजिक न्याय की व्यवस्थाओं को मजबूत करने की जरूरत।

महात्मा गांधी ने बहुत अच्छी बात कही... ''आज जमींदार, मजदूर, किसान सभी अपने अधिकारों की बात और दूसरों के अधिकारों की अवहेलना करते हैं। अगर सभी ऐसा करने लगें तो इसका परिणाम 'अव्यवस्था' होगी।''... इसलिए अच्छा होगा सभी अपने अधिकारों के साथ साथ कर्तव्यों की भी बात करें।

एक बार राम मनोहर लोहिया ने पंडित नेहरू के सामने विपक्ष की तरफ से जो तथ्य रखे... उसके लिए पंडित नेहरू ने खड़े होकर कहा कि हम आपके आंकड़ों को नकार नहीं सकते। ये थी सांसदों की महानता।

देखें लोकसभा में क्या कहा पीएम मोदी ने:

इतिहास में सांसद मर्यादाओं को स्वीकार करते रहे हैं... ऐसा ही फिर से करने की जरूरत।

सांसदों में कमियां हैं, कभी कभी बुराइयां भी आ सकती हैं। लेकिन हस्ती नहीं मिटती हमारी.. लेकिन कई लोग हुए हैं जिन्होंने बुराइयों को खत्म करने के लिए खुद को खपा दिया। तभी समाज में बदलाव आया।... जैसे कभी समाज में सती प्रथा को माना जाता था लेकिन राजा राममोहन राय के आने के बाद इसका विरोध हुआ।

देखें लोकसभा में क्या कहा पीएम मोदी ने:


संविधान सर्वोच्च है, कानूनों का कानून है।

जिस दिन पंडित नेहरू ने संविधान की नींव रखी। तब प्रारूप समिति के अध्यक्ष के नाते अंबेडकर ने कहा, ''संविधान आधारभूत दस्तावेज है, जो राज्य़ों के तीनों अंगों की शक्तियों को परिभाषित करता है।''

हम सब लोकतंत्र की परिपाटी से पले बड़े लोग हैं।

साधु की सही परीक्षा कठिन समय में होती है।

संविधान लिखते समय सारे शब्द अंबेडकर की पीड़ा से सहज ही निकल रहे थे।


अगर संविधान बनाने में अंबेडकर का योगदान नहीं होता तो यह सामाजिक दस्तावेज नहीं बनता।

किसी को अपने बचाव में भी कुछ कहना है तो अंबेडकर का कथन इस्तेमाल करता है।

अंबेडकर दिव्यदृष्टा महापुरुष थे।

संविधान निर्माताओं ने तपस्या की तब संविधान बना। ये गौरवगान नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी। ये भारत के संविधान को मजबूत करना है।

जिस देश में ईश्वर में विश्वास करने वाले और अविश्वास करने वाले दोनों हो ऐसा देश है।

देखें लोकसभा में क्या कहा पीएम मोदी ने:

कुछ लोगों ने इतनी ऊंचाई हासिल की हैं। जिनका नाम ही काफी है, हमें स्वीकार करना चाहिए।

बाबा साहब अंबेडकर का योगदान महत्वपूर्ण, हमें स्वीकार करना चाहिए।

संविधान के अंदर भी सभी की भूमिका रही है।

पिछली सरकारों से तब शिकायत जब अपेक्षा के अनुरूप काम नहीं।

लालकिले और सदन से कहा है कि देश के विकास में सभी प्रधानमंत्रियों का योगदान।

स्कूल कॉलेजों में संविधान को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत। निबंध व ऑनलाइन प्रतियोगिता आदि से इसकी चर्चा होती रहे इसकी कोशिश की जा सकती है।

संविधान में हम सभी को बांधने की ताकत है।

समय की मांग है संविधान में लिखी गई बातों से लोगों का परिचय कराया जाए।

लोकसभा में सभी सदस्यों जैसा मैं भी एक सदस्य ही हूं।


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