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अधिकारियों द्वारा ‘मुख्यमंत्री ने अनुमति दे दी है’ कहने पर लग सकता है ग्रहण



अधिकारियों द्वारा ‘मुख्यमंत्री ने अनुमति दे दी है’ कहने पर लग सकता है ग्रहण

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सुप्रीम कोर्ट में यूपी सीएम हस्ताक्षर केस में 12 जनवरी को सुनवाई


नई दिल्ली-उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मुख्यमंत्री हस्ताक्षर प्रकरण में सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर के पीआईएल में इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच द्वारा दिए गए आदेश के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका में 02 दिसंबर 2015 को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस प्रफुल्ल सी पन्त की बेंच के सामने सुनवाई हुई.


डॉ ठाकुर ने पीआईएल में कहा गया था कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री कार्यालय के अफसरों द्वारा मुख्यमंत्री के नाम पर यह कहते हुए हस्ताक्षर करना कि ‘मुख्यमंत्री ने अनुमति दे दी है’ अवैध है जिसका व्यापक दुरुपयोग संभव है.



इस पर हाई कोर्ट ने यह प्रश्न रखते हुए कि यह व्यवस्था संविधान के अनुच्छेद 166 (3) के अंतर्गत बनाए गए रूल्स ऑफ़ बिजिनेस के विपरीत तो नहीं है, इस मामले को सुनवाई हेतु वृहत बेंच को सुनवाई हेतु संदर्भित किया था पर वृहत बेंच में सुनवाई होने के पहले ही उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर दिया.



सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को सुनने का निर्णय किया और अब तक 03 बार सुनवाई हो चुकी है. 02 दिसंबर की सुनवाई के समय उत्तर प्रदेश सरकार के अधिवक्ता रवि प्रकाश महरोत्रा के अनुरोध पर कोर्ट ने इसकी अगली सुनवाई 12 जनवरी 2016 को नियत किया है.



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