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साहब इन गरीबों को कब मिलेंगे "कम्बल"



साहब इन गरीबों को कब मिलेंगे

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लखनऊ-साहब जब ठण्ड में गर्मी का एहसास ले रहे होंगे तब गरीब भगवान भरोसे होंगे उन्हें ठण्ड से बचने के लिए एक कम्बल तक मयस्सर नहीं होगा पिछले साल कम्बलों के समय से न बंटने से प्रदेश में हजारों लोगों की मौत हुयी थी। इस साल भी वही कहानी दुहरायी जा रही है। अभी तक जिलों में कंबलों की खरीद ही नहीं हो पायी है। बताया जा रहा है कि कंबल खरीद में अफसरों का कमीशन तय न हो पाने के कारण खरीद प्रभावित हो रही है। साफ है इस साल भी गरीबों का कंबल वितरण भ्रष्टïाचारी अफसरों और ठेकेदारों की गठजोड़ का शिकार होने वाली है। जिसका खामियाजा गरीब तबके और फुटपाथ पर जीवन बसर करने वालों को भुगतना होगा।

जाने के कारण हजारों बेघर लोगों की ठंड से मौत हो गयी थी। सरकार भी उनकी मौतों के बाद चेती और ठंडी बीतते बीतते कंबल बांटने की प्रक्रिया शुरू हो पायी थी। इस साल भी यही दोहराया जा रहा है। यदि व्यवस्था इसी गति से चलती रही तो इस साल भी हजारों लोगों की ठंड से मौत होगी। जबकि पिछले साल को देखते हुए इस साल कम्बल बांटने के लिए जरूरी धनराशि बहुत पहले जिलों में भेज दी गयी। पर अभी तक वहां कम्बल खरीद की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो पायी है। जबकि राहत आयुक्त ने ०४ नवम्बर को ही सभी जिलों को एक दिसम्बर तक जरूरतमंदों को चिन्हीत करने और १० दिसम्बर तक कंबल बांटने की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिये थे। बताया जा रहा है कि इस बार भी अफसरों का कमीशन तय न हो पाने से कंबल खरीद में देरी हो रही है।
अब देखना होगा की साहब की नजरें इनायत गरीबों पर कब होती है ।

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