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सचमच वो सरदार थे

सचमच वो सरदार थे
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नई दिल्ली-अचम्भा कर देने वाली खबर यह है कि कांग्रेस पार्टी की फजीहत उसी के लोग करा रहे हैं  कांग्रेस के 131वें स्थापना दिवस से पहले पार्टी की मुंबई शाखा ने उसके लिए मुश्किलें पैदा कर दी हैं। मुंबई कांग्रेस के मुखपत्र में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर तल्ख टिप्पणियां की गई हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि प्रधानमंत्री सरदार पटेल ही बन रहे थे और उनके ही समर्थन में अधिकतर लोग थे परंतु बाद में जवाहर लाल नेहरू को बनाया गया । देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को मुखपत्र में कश्मीर, चीन और तिब्बत नीति के लिए निशाने पर लिया गया है। मुखपत्र के आर्टिकल में दो टूक लिखा गया है कि नेहरू को अंतरराष्ट्रीय मामलों पर स्वतंत्रता सेनानियों और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई की बात सुननी चाहिए थी। फासिस्ट थे सोनिया के पिता ‘कांग्रेस दर्शन’ के दिसंबर इशू में नेहरू के नाती राजीव गांधी की पत्नी और वर्तमान में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर भी फोकस किया गया है। जब पार्टी खुद सोनिया गांधी के विदेशी मूल पर बात करने से कतराती रही है, आर्टिकल में उनके शुरुआती जीवन पर डिटेल में लिखा गया है। इसमें उनकी एयर होस्टेस बनने की ख्वाहिश भी बताई गई है। मुखपत्र में उस आरोप पर भी बात की गई है जिसमें सोनिया के पिता को ‘फासिस्ट’ बताने और रूस के खिलाफ विश्व युद्ध में उनके हारने की बात की जाती रही है। आश्चर्यजनक रूप से, कांग्रेस खुद ही बीजेपी और दक्षिणपंथी गुटों को ‘फासिस्ट’ बताती रही है। कांग्रेस नकारती रही है मतभेद कांग्रेस ने हमेशा से ही नेहरू और पटेल के बीच किसी भी तरह के मतभेद की अटकलों को खारिज ही किया है लेकिन ‘कांग्रेस दर्शन’ (हिंदी एडिशन) के दिसंबर इशू में इसपर बात की गई है। 15 दिसंबर को पटेल की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि भी दी गई है। आर्टिकल में लिखा गया है, ‘पटेल को उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का पद मिला था इसके बावजूद दोनों नेताओं में संबंध तनावपूर्ण बने रहे और दोनों ने कई बार इस्तीफा देने की धमकी भी दी थी। आगाह किया था पटेल ने नेहरू विदेश मामलों के इंचार्ज थे और कश्मीर मामले को उन्होंने अपने पास ही रखा था लेकिन पटेल, उप प्रधानमंत्री रहते हुए कुछ कैबिनेट बैठकों में शामिल हुए थे। आर्टिकल में लिखा गया है कि अगर पटेल की दूरदर्शिता को ध्यान में रखा गया होता तो आज के हालात कभी पैदा नहीं होते। पत्रिका में और भी कई हैरान कर देने वाली बातें हैं। दावा किया गया है कि पटेल की राय न मानने की वजह से नेहरू ने चीन, तिब्बत और नेपाल जैसे अंतरराष्ट्रीय मामलों को अस्त-व्यस्त कर दिया था। इस आर्टिकल के बाद कांग्रेस में बेचैनी है और विरोधी दलों को एक मौका भी मिल गया है ।
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