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असंतुस्ट भाजपा का मंच न बन जाए शॉटगन शत्रु की आत्मकथा" खामोश"

असंतुस्ट भाजपा का मंच न बन जाए शॉटगन शत्रु की आत्मकथा खामोश
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अपने राजनीतिक पैंतरों से राजनीति में भूचाल मचने वाले शत्रुध्न सिन्हा की किताब खामोश भी राजनीती में हलचल मचाने जा रही है शत्रुघ्न सिन्हा की आत्मकथा ‘खामोश’ बिहार में एक बार फिर सियासी हंगामा खड़ा कर सकती है। पत्रकार भारती एस. प्रधान द्वारा लिखी गई शॉटगन की इस आत्मकथा का लोकार्पण दिल्ली के औरंगजेब रोड स्थित होटल क्लार्ज में 6 जनवरी को भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के हाथों होना है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद, भाजपा से असंतुष्ट चल रहे वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा, मुरली मनोहर जोशी समेत 200 विशिष्ट पर्सनाल्टी आमंत्रित किए गए हैं। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो शत्रुघ्न सिन्हा की ‘खामोश’ के लोकार्पण समारोह में बिहार भाजपा के किसी नेता को आमंत्रित नहीं किया गया है। इससे सियासी हलचल पैदा हो गई है। काबिलेगौर है कि शत्रुघ्न सिन्हा बिहार भाजपा की कार्यशैली से नाराज रहे हैं। समय-समय पर उन्होंने सार्वजनिक रूप से इसका इजहार भी किया है। वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद से अपनी निकटता भी जाहिर करते रहे हैं। शत्रुघ्न सिन्हा की भाजपा के केन्द्रीय नेताओं से भी शिकायत रही है। ऐसे में अपनी किताब के विमोचन पर उन्होंने बिहार भाजपा के नेताओं की अनदेखी की है तो इसके सियासी निहितार्थ भी हैं। इस प्रकरण को भाजपा के अंदर बढ़ रही गुटबाजी से भी जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा का एक धड़ा लालकृष्ण आडवाणी में अपनी आस्था रखता है। उसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कार्यशैली रास नहीं आ रही है। क्या है खामोश में : शत्रुघ्न सिन्हा के सुदीर्घ फिल्मी व पालिटिकल लाइफ से जुड़े कई पहलुओं का संयोजन उनकी आत्मकथा ‘खामोश‘ में हुआ है। भाजपा से नाराज चल रहे शत्रुघ्न के इस पुस्तक से बड़ा राजनीतिक धमाका होने के आसार भी हैं। इससे भाजपा की राजनीति के कई अनकहे पहलू भी सामने आ सकते हैं। ‘खामोश’ का इंट्रोडक्शन कांग्रेस के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरुर ने लिखा है। विरोधियों को मिला मौका जदयू प्रवक्ता नीरज ने सवाल खड़ा किया कि शॉटगन के तीर पर भाजपा खामोश क्यों है। भाजपा क्यों नहीं कुछ बोलती है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता विनोद नारायण झा ने कहा कि नरेन्द्र मोदी, लालकृष्ण आडवाणी आमंत्रित हैं तो पूरी भाजपा आमंत्रित है। नीतीश कुमार मुख्यमंत्री के संवैधानिक पद पर बैठे हैं। पुस्तक लोकार्पण के सामाजिक कार्यक्रम में उन्हें बुलाये जाने का कोई राजनीतिक निहितार्थ नहीं निकालना चाहिए। सोर्स हिन्दुस्तान
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