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मोदी के "राजनीतिक कौशल "से विरोधी दलों में बेचैनी !

मोदी के राजनीतिक कौशल से विरोधी दलों में बेचैनी !
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मोदी के राजनीतिक कौशल से विरोधी दलों में बेचैनी ! यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अंदाज ही है जो उनके द्वारा सभी को जोड़ने की कला ने उन्हें बेजोड़ बना दिया है चाहे महात्मा गांधी के स्वच्छता मिशन को सरकार का मिशन बनाकर कांग्रेस के एजेंडे से गांधी को झटक लिया पिछड़ों के रूप में सरदार पटेल की आदम कद की मूर्ति को लेकर पिछड़ों के हमदर्द बने हालांकि मोदी खुद भी पिछड़े वर्ग से ताल्लुक रखते हैं अब अंबेडकर को बसपा से भी झटकने की तैयारी है अभी तक बसपा अपना आंबेडकर पर एकाधिकार मानती रही और सारे अन्य पार्टियों को आंबेडकर को काम महत्व देने के लिए कोसती रहती थी अब मोदी के लखनऊ में आकर जो बसपा का राजनितिक उदय का गढ़ माना जाता है वहां भी आंबेडकर को साधकर राजनितिक पंडितों को सोचने के लिए विवश कर दिया है प्रधानमंत्री के लखनऊ दौरे को लेकर प्रशासनिक तैयारियां जहां तेजी से चल रही हैं, वहीं सियासत के अपने अंदाज भी देखने को मिल रहे हैं.वैसे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां तीन कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगेपहला कार्यक्रम होगा बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह दूसरा ई रिक्शा वितरण समारोह और तीसरा अंबेडकर महासभा कार्यालय में बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कार्यक्रम. सबकी निगाहें पीएम मोदी के तीसरे और अंतिम कार्यक्रम पर टिकी है,भारत के गृहमंत्री राजनाथ सिंह के संसदीय क्षेत्र लखनऊ की सियासत पर सबकी निगाहें लगी हैं.क्योंकि संदेश राजधानी से ही दिया जा सकता है.ये दूसरे राजनीतिक दल के लोग भी अच्छी तरह समझते हैं.तभी तो बहुजन समाज पार्टी जहां अंबेडकर पर एकाधिकार मानती थी. अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अंबेडकर की मूर्ति पर माल्यार्पण का कार्यक्रम यानी कि हर दल नहला पर दहला मारने की कोशिश में हैं.कभी दलितों के करीब रहने का दम्भ भरने वाली कांग्रेस भी इसे गरीबों और दलितों को छलने का तरीका बता रही है,जो कांग्रेस ने इनके लिए किया है, वो कोई नहीं कर सकता. दूसरी तरफ बीजेपी इस मुद्दे को सामान्य कार्यक्रम की तरह पेश करना चाहती है.बीजेपी का कहना हैं कि अंबेडकर महान थे,और आज के बच्चों को उनके बारे में पता होना चाहिए। वे प्रधानमंत्री के अंबेडकर महासभा पहुंचकर प्रतिमा का माल्यार्पण करने के बारे में किसी भी तरह के सियासत से इंकार करते हैं.. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा चुनाव से पहले वोट मांगने लखनऊ आए थे.प्रधानमंत्री बनने के बाद ये उनका पहला दौरा है. यह नरेंद्र मोदी का राजनीतिक कौशल ही है जो उनके हर कदम का विरोधी विरोध तो करते हैं लेकिन उनकी विरासत को उनके हाथ से निकलने का मलाल भी रहता है ।
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