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पीलीभीत फर्जी एनकाउंटर पर भी सरकार ने दे दिया था इनाम

पीलीभीत फर्जी एनकाउंटर पर भी सरकार ने दे दिया था इनाम
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पीलीभीत-देर है पर अंधेर नहीं दोषियों को सजा दिलाना मुश्किल तो है लेकिन नामुमकिन नहीं यह साबित हुआ यूपी के पीलीभीत जिले में 12 जुलाई 1991 में दस सिख तीर्थ यात्रियों को आतंकवादी करार देते हुए फर्जी मुठभेड़ में मार डालने के मामले में सीबीआई कोर्ट ने 47 पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया है। कोर्ट ने आरोपी सभी पुलिसकर्मियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। तीर्थयात्रियों को फर्जी मुठभेड़ में मारा था पुलिस ने 12 जुलाई 1991 को नानकमथा, पटनाशाहिब, हुजुरशहिद एवं अन्य तीर्थ स्थलों की यात्रा करते हुये 25 तीर्थ यात्रियों का जत्था बस (सख्ंया यूपी 26, 0245) से वापस लौट रहा था, तभी कछाला घाट के पास आरोपित पुलिसकर्मियों ने सिख युवकों को उतार लिया और अलग-अलग तीन थाना क्षेत्रों में मुठभेड़ दिखाकर उनकी हत्या कर दी। पुलिस ने मारे गये सिख युवकों के विरुद्ध जानलेवा हमले की भी रिपोर्ट दर्ज कराई थी। 47 पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया मामले में सीबीआई कोर्ट के विशेष न्यायाधीश लल्लू सिंह ने आरोपित सभी 47 पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया है। साथ ही अदालत ने इन सभी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। विचाराण के दौरान 10 अरोपितों की मृत्यु हो जाने पर उनका मामला खत्म कर दिया गया। मृतकों में अरोपित तत्कालीन थानाध्यक्ष न्यूरिया क्षत्रपाल सिंह, उपनिरीक्षक बृह्महपाल, कांस्टेबल आशोकपाल सिंह, कांस्टेबल रामस्वरूप, कांस्टेबल आशोक कुमार, उपनिरीक्षक राजेश चन्द्र शर्मा, उपनिरीक्षक एमपींिसंह, कांस्टेबल मुनीश खां, कांस्टेबल कृष्णबहादुर, कांस्टेबल सूरजपाल सिंह शामिल हैं। इन सिखों को मारा गया इनकाउंटर में गुरूदासपुर (पंजाब) के बलजीत सिंह पुत्र बसंत सिंह, जसवंत सिंह उर्फ जस्सा, हरबिंदर सिंह मिन्टा, सुजान सिंह बिट्टू,जसवंत सिंह फौजी, बचित्तर सिंह पुत्र आत्मा सिंह, करतार सिंह पुत्र रौनक सिंह व तरसेम सिंह पुत्र दर्शन सिंह के साथ ही पीलीभीत के लखविंदर सिंह पुत्र सुरमेज सिंह व नरेन्द्र सिंह पुत्र दर्शन सिंह को मारा गया था। घटनाक्रम- प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया था कि 12 जुलाई 1991 की सुबह सिख यात्रियों से भरी बस इटावा से पीलीभीत के लिए रवाना हुई। बस पीलीभीत से करीब 125 किमी पहले बदायूं जिले के कच्चाघाट पहुंची कि उसे एक पुलिस वैन ने ओवरटेक कर रोक लिया। बाद में पुलिस की एक जीप और ट्रक में सवार भारी संख्या में पुलिसकर्मियों ने बस को घेर लिया। बस को रुकवाने के बाद कुछ पुलिसकर्मी उसमें चढ़ गये। इसके बाद पुलिसकर्मी बस को कवर करते हुए पीलीभीत की तरफ चल पड़े। पीलीभीत की तरफ चलने पर कुछ दूर बाद एक गेस्ट हाउस के सामने बस को रोका गया। यहां गेस्ट हाउस के बाहर भी भारी संख्या में पुलिसबल मौजूद था। यहां बस की तलाशी ली गयी। प्रत्यक्षदर्शियों ने तब बताया था कि तलाशी में किसी के पास हथियार नहीं मिला था। बाद में बस को एक नहर के किनारे ले जाया गया और 11 सिखों को नीचे उतार लिया गया। फर्जी पुरूस्कार देने वालों पर कब होगी कार्यवाही तत्कालीन कल्याण सरकार ने पीलीभीत में तब पुलिस द्वारा सिख आतंकियों को मारे जाने की जानकारी देने के बाद वहां के पुलिस अधीक्षक आरडी त्रिपाठी तथा मुठभेड़ में शामिल सभी पुलिसकर्मियों की सराहना करते हुए उन्हें पुरस्कृत किया था। source panjab keshari
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