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रुढ़िवादी परंपरा टूटी ,महिलाओं ने किया शनि शिगनापुर में पूजा

रुढ़िवादी परंपरा  टूटी ,महिलाओं ने किया शनि शिगनापुर में पूजा
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अहमदनगर- वर्षों से चली आ रही रुढ़िवादी परम्परा उस समय टूट गयी जब शनि शिंगणापुर मंदिर में महिलाओं ने चबूतरे पर जाकर पूजा अर्चना की एक तरफ जहाँ पुरुष और महिलाओं को बराबरी का दर्जा दिए जाने की बात हो रही है वहीँ मात्र कुछ लोगों की रुढ़िवादी सोच ने बिना मतलब पूजा जो सभी का अधिकार है उसे लेकर बखेड़ा खड़ा कर दिया और महिलाओं के प्रवेश को संभव तब किया जा सका जब इस मामले में कोर्ट ने हस्तक्षेप किया स्त्री-पुरूष समानता के अभियान में मिली एक बडी जीत में महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर मंदिर में मुख्य पूजा स्थल पर महिलाओं के प्रवेश पर सदियों से चली आ रही पाबंदी को शुक्रवार को हटा लिया गया। यह कदम कार्यकर्ताओं के लंबे संघर्ष और अदालत के निर्देशों के बाद उठाया गया है। मंदिर के न्यास द्वारा पश्चिम महाराष्ट्र के इस मंदिर के मुख्य क्षेत्र में सभी श्रद्धालुओं को अबाधित प्रवेश की सुविधा देने के निर्णय के कुछ ही समय बाद कुछ महिलाओं ने पवित्र स्थल पर प्रवेश किया और पूजा की।निर्णय की घोषणा के कुछ घंटे बाद भूमाता ब्रिगेड की नेता तृप्ति देसाई अहमदनगर के शनि मंदिर पहुंची और उन्होंने पूजा अर्चना की। तृप्ति ने इस मुद्दे पर लंबे अभियान की अगुवाई की थी। तृप्ति के मौके पर पहुंचने से पहले ही दो महिलाओं ने पवित्र स्थल में प्रवेश कर पूजा-अर्चना की और प्रतिमा पर तेल चढाया। यह दोनों महिलाएं कुछ समय पहले भूमाता ब्रिगेड से अलग हुई थीं। इसी के साथ कुछ धार्मिक स्थलों पर स्त्री-पुरूषों के साथ होने वाले भेदभाव के खिलाफ तीन माह तक चले अभियान में एक बडी सफलता मिली है।
अब कोल्हापुर के अंबाबाई मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करने की कुछ महिलाओं ने कोशिश की है। अवनि महिला संस्था की तक़रीबन 40 कार्यकर्ताओं ने गर्भ गृह में घुसने की कोशिश की, लेकिन वहां पहले से मौजूद महिला भक्तों ने ही उनका विरोध किया और प्रवेश नहीं करने दिया।


शनि शिगनापुर के बाद अब कोल्हापुर के महालक्ष्मी मंदिर की बारी
कोल्हापुर के महालक्ष्मी मंदिर को ही स्थानीय लोग अंबाबाई मंदिर के नाम से पुकारते हैं।
2000 साल पुराने इस मंदिर के गर्भगृह में महिलाओं के जाने पर पाबंदी है। हालांकि साल 2011 में तत्कालीन एमएनएस विधायक राम कदम के नेतृत्व में महिलाओं ने जबरदस्ती गर्भगृह में प्रवेश कर सदियों पुरानी परंपरा को तोड़ा था। उसके बाद करीब 6 महीने तक महिलाओं को गर्भगृह में जाने की इजाजत थी, उसके बाद बंद कर दिया गया।

अब बॉम्बे हाई कोर्ट के हाल के आदेश के बाद कि मंदिरों में जहां भी पुरुषों को प्रवेश है वहां महिलाओं को भी प्रवेश देना जरूरी है। अब एक बार फिर महिलाओं ने गर्भ गृह में प्रवेश की कोशिश की है।



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