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देश की 25 फीसदी आबादी "सूखा" ग्रस्त

देश की 25 फीसदी आबादी सूखा ग्रस्त
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नई दिल्ली। राज्य और केंद्र सरकार के बीच चल रही नूरा कुश्ती के बीच देश के 660 जिलों में से 256 जिले सूखाग्रस्त हैं। किसान आत्महत्या कर रहे हैं इस पर भी राजनीती हो रही है केंद्र सरकार ने इन जिलों में जनसंख्या केआंकड़ों को देखते हुए 33 करोड़ लोगों को सूखे से ग्रस्त होने की बात कही है। अब तक 11 राज्यों ने खुद को सूखाग्रस्त इलाका घोषित कर दिया है।केंद्र सरकार ने मंगलवार को यह स्वीकार किया कि देश की करीब 25 फीसदी आबादी सूखे से पीडि़त है।
सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने बताया
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मनरेगा के तहत वर्ष 2016-17 केलिए अब तक करीब 19000 करोड़ रुपए जारी कर दिए गए हैं। साथ ही सरकार ने यह भी बताया कि 11 राज्यों में मनरेगा के तहत काम करने वालों को उनकी मजदूरी सीधे उनके खाते में पहुंचाने का काम शुरू हो चुका है।केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल(एएसजी) पीएस नरसिंहा ने न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति एनवी रमण की पीठ के समक्ष कहा कि देश में करीब 33 करोड़ लोग सूखे से प्रभावित है। हालांकि उन्होंने एक बार फिर से स्पष्ट किया कि सूखाग्रस्त प्रांत घोषित करने का अधिकार पूरी तरह से राज्य का है।केंद्र सरकार की भूमिका महज सलाहकारी है। एएसजी ने कहा कि केंद्र का काम मनरेगा केलिए फंड जारी करना है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016-17 के लिए इस मद अब तक करीब 195000 करोड़ रुपए जारी कर दिए गए हैं। इनमें से 7331 करोड़ रुपए तो सोमवार को जारी किए गए हैं। इस वित्त वर्ष में सरकार को करीब 38500 करोड़ रुपए जारी करने हैं।एएसजी ने कहा कि सरकार यह प्रयास कर रही है कि मनरेगा के तहत काम करने वाले कामगारों को उनकी मजदूरी जल्द मिले।प्रयास किया जा रहा है कि उन्हें मजदूरी एक हफ्ते में मिल जाए। अधिक से अधिक 15 दिनों में उन्हें मजदूरी मिल ही जाए। एएसजी ने बताया कि सरकार ने कामगारों की मजदूर उनके खाते में डालने का काम शुरू कर दिया है। नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड मैनजमेंट सिस्टम के तहत मनरेगा के तहत काम करने वाले कामगारों को सीधे उनके खाते में मजदूरी पहुंचाने का निर्णय लिया गया है।अब तक 11 राज्यों में इसके तहत कामगारों को उनकी रकम खाते में पहुंचाई जा रही है।शीर्ष अदालत स्वराज अभियान नामक संगठन द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिकाकर्ता संगठन की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने पीठ को फसलों की क्षति होने पर किसानों को मिलने वाले मुआवजे की ओर ध्यान दिलाया।उन्होंने कहा कि किसानों को फसलों की क्षति होने पर 13500 रुपए प्रति हेक्टेयर मुआवजा दिया जाता है, जो बेहद ही कम है। उन्होंने कहा कि फसल की क्षति न होने की स्थिति भी किसान बमुश्किल अपना गुजर-बसर कर पाते हैं।

ड्रिप इर्रीगेशन से हो सकता है फायदा
भारत में पानी को लेकर बीते 16 साल में सबसे बुरे हालात हैं। पिछले 2 सालों में मानसून अच्छा नहीं रहा है। देश के ज्यादातर रिजर्वायर में काफी कम पानी बचा है। उत्तर प्रदेश के बुलंदखंड में पानी की किल्लत है। कई जगहों पर ग्रामीणों को दूर-दूर से पीने के लिए पानी लाना पड़ता है। वर्षों से चली आ रही लापरवाहियों की वजह से देश आज गंभीर जल संकट से जूझ रहा है।पारा 45 डिग्री तक पहुंच गया है। हालात और बदतर होने की आशंका से सरकार किसानों को ड्रिप इरिगेशन के लिए प्रोत्साहित करने के लिए फंडिंग करने पर विचार कर रही है। साथ ही जरूरत से ज्यादा भूजल का इस्तेमाल करने पर पेनल्टी और एक मॉडल वॉटर कानून बनाने की भी तैयारी है। जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा नदी से जुड़े विभाग के सचिव शशि शेखर ने कहा कि पानी की कमी हमारे लिए बहुत बड़ी समस्या है।उन्होंने बताया कि अगर हम आंकड़ों को दखें तो साल 2000 में प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रति वर्ष 2000 क्यूबिक मीटर पानी था।आज हम 1500 घन मीटर पर आ गए हैं और अगले 15 वर्ष में यह आंकड़ा 1100 घन मीटर हो जाएगा। 1500 क्यूबिक मीटर प्रति व्यक्ति प्रति साल भी जल संकट के दायरे के भीतर है। चीन ने 1500 क्यूबिक मीटर प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष के आंकड़े पर क्राइसिस का ऐलान कर दिया था। हम इस स्तर से नीचे जा सकते हैं। जल संकट से निपटना अब सरकार की जिम्मेदारी बन गई है।गत 2 वर्ष से मॉनसून कमजोर रहा है, जिससे देश के कई इलाकों में सूखा है और जलाशयों में बहुत कम पानी है।सबसे ज्यादा सूखा ग्रस्त राज्यों में से एक महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित इलाकों में ट्रेन से पानी भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में जितना भूजल बचा है उसे संभालने के बजाय गन्ने की खेती और बीयर प्लांट पर बहस शुरू हो गई है। ओडिशा के टीटलागढ़ में सबसे ज्यादा 46 डिग्री तापमान है। मौसम विभाग ने कहा है कि अगले कुछ हफ्तों तक लू चलती रहेगी। खेती में पानी की जरूरत कम करने के लिए ड्रिप इरिगेशन जरूरी है और सरकार को किसानों की इस कोशिश में मदद करनी पड़ेगी।
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