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अंतर्मन की बात सुनकर "डॉ पंड्या" ने अस्वीकार किया" राज्यसभा "में जाने का" प्रस्ताव"

अंतर्मन की बात सुनकर डॉ पंड्या ने अस्वीकार किया राज्यसभा में जाने का प्रस्ताव
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हरिद्वार-अपने अंतर्मन की बात सुनते हुए डॉ पंड्या ने राज्यसभा की सदस्यता लेने से इनकार कर दिया इसके लिए उन्होंने सोशल साइट के जरिये रायशुमारी कराई और उनके साधकों ने कहा की उन्हें यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं करना चाहिए इसके पहले हरिद्वार का माहौल बदला बदला था शांतिकुंज के प्रमुख डा. प्रणव पंड्या को राज्य सभा का सदस्य मनोनीत किए जाने को लेकर दो दिन से शहर में खुशी का माहौल था। भाजपा नेता और संत समाज के लोग शांतिकुंज पहुंचकर डा. पंड्या का अभिनंदन कर रहे थे लेकिन खुद डा. पंड्या दो दिन तक असहज रहे। इस नई जिम्मेदारी को संभालें या नहीं इस बारे में अंतर्मन से आ रही विरोधाभासी आवाज के बीच खुद कोई फैसला नहीं कर सके तो उन्होंने रायशुमारी का रास्ता चुना। पूरी दुनिया से राय जानी तो अधिकतर लोगों की राय नकारात्मक आई जिस पर उन्होंने सांसद बनना अस्वीकार कर दिया। शांतिकुंज के प्रमुख डा. प्रणव पंड्या खुद को राज्य सभा सांसद के रूप में मनोनीत कर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने गौरव प्रदान किया था। हरिद्वार को मिले इस गौरव का सभी ने स्वागत किया, लेकिन दो दिन तक अंतर्मन में चले द्वंद्व के कारण डा. पंड्या खुद कोई निर्णय नहीं ले पा रहे थे। सोशल साइट से कराई रायशुमारी इसके लिए डा. पंड्या ने पूरी दुनिया में फैले अपने साधकों की राय जानी। सोशल साइट के जरिये किए गए इस सर्वे में 80 प्रतिशत से ज्यादा लोगों की राय यह आई कि डा. पंड्या को यह पद स्वीकार नहीं करना चाहिए। शांतिकुंज के प्रमुख का पद राज्य सभा के सदस्य से ज्यादा गौरवशाली माना गया है। यह आशंका भी कहीं न कहीं दिखाई दी कि इससे शांतिकुंज पर राजनीति की छाया पड़ सकती है। खुद पंड्या भी पहले ही दिन यह बात कह चुके थे। अधिकतर लोगों की ओर से समर्थन नहीं मिला तो डा. पंड्या ने यह पद अस्वीकार कर दिया। अमर उजाला से बात करते हुए उन्होंने कहा कि शांतिकुंज के ही सेवा के इतने प्रकल्प चल रहे हैं, जिनमें व्यस्त रहने के कारण वे पूरा समय नहीं दे पाते। ऐसे में उन्हें लगा कि वे नई जिम्मेदारी के लिए समुचित समय नहीं दे सकेंगे। इसलिए यह निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि महामहिम राष्ट्रपति और केंद्र सरकार ने उन्हें जो सम्मान दिया इसके लिए वे उनके आभारी हैं मोदी को स्वीकार किया है भाजपा को नहीं डॉ पंड्या ने मीडिया से बात करते हुए कहा की उन्होंने मोदी को स्वीकार किया है भाजपा को नहीं डॉ पांड्य राजनीती से दूर रहना चाहते हैं इसलिए उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता लेने से इनकार कर दिया ।
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