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माँगा "मुआवजा "तो मिली "लाठियां" हज़ारीबाग़ की पुलिस ने" पीटा "महिलाओं और "बूढ़े "अनशनकारियों को

माँगा मुआवजा तो मिली लाठियां हज़ारीबाग़ की पुलिस ने पीटा महिलाओं और बूढ़े अनशनकारियों को
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हजारीबाग- बड़कागाव में पुलिस ने तालिबानी शासन की तरह बच्चो महिलाओ बुढो को पीटा है यहाँ तक की गर्भवती महिलाओ पर भी सितम ढाये गए है , मामला बता दे की बड़का गाव में एन टी पी सी को दो कोल माईन्स मिले है उनसे खनन करने के लिए कंपनी ने त्रिवेणी नामक एक कंपनी को आउट सोर्सिंग का काम दिया है लेकिन कंपनी बगैर मुवावजा दिए रैयतो को डरा धमका कर ज़मीन पर खुदाई का काम करने को उतारू है ,लिहाज़ा लगभग 10 गाव के ग्रामीणो ने पिछले 47 दिनों से खनन स्थल पर धरना दे दिया है सिफ्टिंग में धरना चौबीसों घंटे चल रहा था जिससे कंपनी खनन का काम नहीं कर पा रही थी इसलिए पुलिस और उनके डंडो का सहारा लेकर पहले तो अनशन कारियो को पीटकर भगाया गया फिर उनके गाव जाकर जो भी मिला उसे बेरहमी से पीटा गया ,महिलाओ बच्चो और बुढो पर लाठिया चलायी गयी घर जबरन खुलवाए गए जिसने दरवाज़ा नहीं खोला उनका दरवाज़ा तोड़ डाला गया साथ ही साथ गर्भवती महिलाओ को भी पीटा गया कई महिलाओ के साथ अभद्र व्यवहार किया गया ,कल शाम से यह कार्य आज दोपहर तक ज़ारी रहा ,जो घायल लोग अस्पाताल आये उनका बयान भी नहीं लिया जा रहा है ,पुलिस इस सम्बन्ध में कुछ कहने से बच रही है वही गाव की गलियां और चौबारे सुनसान पड गए है कई गाव के पुरुष पलायन कर गए है वही कई लोगो ने दबी जुबान कहना शुरू कर दिया है की इसने तो बेहतर नक्सली है । बडकागांव विधायक निर्मला देवी ने कहा की ये बात बिल्कुल तालिबानी शासन की याद दिलाता है ,महिलाओ को बहुत बेरहमी से पीटा गया है, कंपनी बिना मुवावजा दिए काम करना चाहती है। यह नियम भी है की जो मुवावजा नहीं ले उसका ट्रेज़री में जामा करा दिया जाता है पर यहाँ एनटीपीसी ग्रामीणों के साथ छलावा कर रही है और कोई पारदर्शिता भी नहीं रखी गयी है । बस चंद दलाल और दबंग लोगो को खड़ा कर कंपनी ग्रामीणों का शोसण करने पर उतारू है ,कंपनी के कई बड़े भाजपा नेताओ को भी ख़रीदा है इसके प्रमाण भी मिले है सरकार के नुमाईदे इनके पीठ पर खड़े है सो कोई भी कार्य में ग्रामीणों की नहीं सुनी जा रही है ,मानो यहाँ अंग्रेजी हुकूमत एक बार फिर से लौट आई है। फलक
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