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झूठे मामलों में और भी वर्ग के लोग "गिरफ्तार" होते हैं" सदानंद गौड़ा "जी

झूठे मामलों में और भी वर्ग के लोग गिरफ्तार होते हैं सदानंद गौड़ा जी
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लखनऊ -देश अब जाति और धर्म से ऊपर उठ कर सोच ही नहीं पा रहा है एक तरफ जहाँ पीड़ितों की कोई जाती नहीं मानी जाती है वहीँ केंद्रीय मंत्री ने इस पर केवल मुस्लिमों की चिंता जाता कर एक बार फिर से राजनीती को गरमा दिया है कानून जहाँ केवल क्राइम और उसके आरोपियों को देखता है वहीँ नेता इसे जाति में बाट देते हैं सबसे अहम् यह है कि यह बयान किसी और का नहीं कानून मंत्री का है देश के उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में विकास पर्व में शामिल होने आए केंद्रीय कानून मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने मुस्लिमों पर बढ़ रहे कानूनी दबाव पर चिंता जाहिर की. उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा कि मु्स्लिम युवाओं को झूठे आरोप में गिरफ्तार करना सचमुच चिंता का विषय है. इन्हें गिरफ्तार करने के बाद जब सबूत नहीं मिलता है तो उन्हें छोड़ दिया जाता है. ऐसे मामलों में कानूनी सुधार की जरूरत है. ऐसा कहते हुए कानून मंत्री यह भूल गए कि खास कर उत्तर प्रदेश में पुलिस किसी भी वर्ग के लोगों को अकारण ही उठा लेती है मारती पीटती है उनके ऊपर गलत तरीके से आपराधिक मुक़दमे कायम करती है जबकि थोड़ी सी समझदारी दिखाए तो मामला सुलह समझौते से निबट सकता है। मोदी सरकार के दो साल की उपलब्धियां गिनाते हुए गौड़ा ने कहा कि लॉ कमीशन मुस्लिम युवाओं को इस तरह गिरफ्तार करने को लेकर आपराधिक प्रक्रिया में बदलाव की तैयारी का मन बना रहा है जिससे इन्हें परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा. इसके तहत गड़बड़ियों को दूर करने में मदद मिलेगी. गौड़ा ने जानकारी दी कि इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के जज की अगुवाई में एक पैनल को चुना गया है जो रिपोर्ट तैयार कर रहा है. रिपोर्ट तैयार करने में कई कानूनी जानकारों की भी मदद ली जाएगा. ये बात गौड़ा ने तब कही जब उनसे पूछा गया था कि झूठे आरोपों में मुस्लिम युवाओं के पकड़े जाने और उसके बाद छूटने पर उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है. गौरतलब है कि पिछले हफ्ते गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि सरकार आतंकी जांच के लिए एक प्रावधान तैयार कर रही है साथ ही उन्होंने पुलिस को ये सलाह भी दी जा रही है कि वे अपना रवैया सख्‍त न रखें.साभार सहारा
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