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अपने "निजी "सेना से "सामानांतर" सरकार चलाता था रामवृक्ष

अपने निजी सेना से सामानांतर सरकार चलाता था रामवृक्ष
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मथुरा -प्रदेश में सरकार के सामानांतर एक अलग ही सरकार चल रही है और हौसले इतने बढ़ गए हैं कि अपनी निजी सेना तक बना डाली मथुरा में अतिक्रमण हटाने के दौरान भड़की हिंसा में अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं इस पूरे घटनाक्रम का मास्टरमाइंड रामवृक्ष यादव बताया जा रहा है। साथ ही इस बवाल पर सुबह से ही विरोधी दलों की बयानबाजी जारी है। यूपी सरकार के मंत्री शिवपाल यादव से सीबीआई जांच की सिफारिश की तो सीएम अखिलेश ने हिंसा को अफसरों की चूक का नतीजा बता दिया।  यूपी के मंत्री शिवपाल यादव भले ही रामवृक्ष यादव से रिश्तों से इनकार कर रहे होए लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि इसी रामवृक्ष यादव को यूपी सरकार से पेंशन मिलती है। जी हां अखिलेश सरकार रामवृक्ष यादव को लोकतांत्रिक सेनानी पेँशन देती है। इमरजेन्सी के दिनों में रामवृक्ष के सहयोगी रहे लोकतांत्रिक सेनानी सुदामा यादव जो गांव में ही रहते हैंए वे रामवृक्ष यादव की बहुत तारीफ करते हैं और उन्हें बहुत बड़ा देशभक्त बताते हैं।  इमरजेंसी में गया था जेल रामवृक्ष यादव जेपी आंदोलन से भी जुड़ा था। उसने इमरजेंसी के दौरान गाजीपुर में जुलूस निकालकर जिला मुख्यालय पर धरना दिया था। इसके लिए उसे जेल में डाल दिया गया था। रामवृक्ष यादव भी लोकतांत्रिक पेंशनधारी था। यही नहीं उसने नेताजी सुभाष चंद्रबोस की मौत पर भी सवाल उठाते हुए उस संबंध में आवाज उठाई और सत्याग्रह भी किया। प्राईवेट सेना बना रखी है रामवृक्ष ने अनशन की आड़ में उसने अपराधियों का एक गैंग बना लिया था और भारी मात्रा में राइफलें, बंदूक व गोलियां का जखिरा इकट्ठा कर लिया था। गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक राम किशोर वर्मा ने बताया कि मथुरा कांड का मास्टरमाइंड रामवृक्ष यादव मरदह थाना क्षेत्र का रहने वाला है। विगत कई सालों से जनपद से गायब था। सन 2013 में बरेली जनपद में भी उस पर कई आपराधिक मुकदमें दर्ज हुए हैं। यहाँ चलती थी रामवृक्ष की सल्तनत कैम्प में रहने वालों पर रामवृक्ष की सल्तनत चलती थी ख़बरों के अनुसार कोई भी अपनी मर्जी से कहीं बाहर जा भी नहीं सकता था इन्हें पहले अनुमति लेनी होती थी कैंप में मौजूद इन करीब 3,000 लोगों को देख, ऐसा लगता है, मानो इन्‍हें यहां रहने के लिए मजबूर किया गया। हर निवासी का एक रिकॉर्ड और नंबर था। उनके रिहायशी पते, फोन नंबर, तस्‍वीर और अन्‍य सभी जानकारियां सावधानीपूर्वक बनाकर रखी गई थीं। जमानत के तौर पर रिस्तेदारों को रखना होता था मथुरा जोन के महानिरीक्षक सी मिश्रा ने कहा कि 'दस्‍तावेजों से साफ है कि लोगों को कैंप से बाहर जाने की इजाजत नहीं थी। कैंप से बाहर जाने वालों को एग्जिट और एंट्री पास दिए जाते थे।' पुलिस का कहना है कि बाहर जाने वालों को वापसी के लिए रिश्तेदारों या जानने वालो से जम्मानत दिलानी होती थी।
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