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2 दिन के धरने के लिए आया था राम वृक्ष "280 एकड़" पर कब्ज़ा कर बैठ गया

2  दिन के धरने के लिए आया था राम वृक्ष 280 एकड़ पर कब्ज़ा कर बैठ गया
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मथुरा -उत्‍तर प्रदेश के मथुरा में पिछले दो दिनों से जो स्थिति बनी हुई है उससे कोई भी व्‍यक्ति अपरिचित नहीं है। मथुरा के कलेक्ट्रेट परिसर की दीवारों पर लिखी यह इबारत प्रशासन की विवशता की कहानी बयां कर रही है। जनवरी 2014 में डेढ़ हजार लोगों को मथुरा के प्रशासन ने दो दिन के लिए धरने की इजाजत दी थी, लेकिन दो साल बाद वही इजाजत और अनदेखी 24 लोगों की मौत का कारण बन गई। लेकिन इसके बावजूद भी अभी तक इस कांड के मुख्‍य आरोपी रामवृक्ष यादव का सरकार और प्रशासन के पास कोई अता-पता तक नहीं है रामवृक्ष यादव नाम के एक शख्स ने डेढ़ से दो हजार लोगों को इकट्ठा करके सुभाष चंद्र बोस और सत्याग्रह के नाम पर करोड़ों की जमीन कब्जा करने की सुनियोजित प्लानिंग की। उसकी इस योजना में तड़के का काम मथुरा के कुछ स्थानीय नेताओं और भूमाफियाओं ने किया।

रासुका लगेगा
आपको बता दें कि मथुरा के जवाहरबाग कांड में मुख्य आरोपी रामवृक्ष यादव को उत्‍तर प्रदेश सरकार पेंशन भी देती है। इसमें हैरान होने वाली कोई बात नहीं है क्योंकि इससे पहले भी सपा सरकारें अप‍राधियों को शरण देने के आरोप लग चुके हैं।रामवृक्ष यादव उत्‍तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के बागपुर का रहने वाला है। बाबा जयगुरुदेव का शिष्‍य रह चुका रामवृक्ष दो बेटों और दो बेटियों का पिता भी है। रामवृक्ष सरकारी बाग की जमीन पर कब्‍जे का मास्‍टरमाइंड है। इसको लेकर अखिलेश सरकार ने दंगाइयों के मुखिया रामवृक्ष के खिलाफ राष्‍ट्रीय सुरक्षा कानून लागू कर दिया है। वहीं रामवृक्ष अभी पुलिस के हिरासत से बाहर है। पुलिस के मुताबिक जितने उपद्रवियों को गिरफ्तार किया गया है उन सभी पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जा रही है। वहीं रामवृक्ष कहां है इसका अभी तक पता नहीं चल पाया है।राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम-1980, देश की सुरक्षा के लिए सरकार को अधिक शक्ति देने से संबंधित एक कानून है। यह कानून केंद्र और राज्य सरकार को गिरफ्तारी का आदेश देता है। अगर सरकार को लगता है कि कोई व्यक्ति देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले कार्यों में बाधा उत्‍पन्‍न कर रहा है तो वह उसे गिरफ्तार करने का आदेश दे सकती है।वहीं दूसरी तरफ खबरें यह भी हैं कि रामवृक्ष यादव को मार दिया गया है लेकिन अभी तक उसकी लाश बरामद नहीं की गई है, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वह अभी जिंदा है और फरार है।
मोहन शर्मा

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