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ऐसा क्या किया नीलेश ने कि खुशी से फूले नहीं समा रहे माता-पिता!

ऐसा क्या किया नीलेश ने कि खुशी से फूले नहीं समा रहे माता-पिता!
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ऐसा क्या किया नीलेश ने कि खुशी से फूले नहीं समा रहे माता-पिता! कानपुर,। ‘कौन कहता है कि आसमां में सुराग नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालों यारो...‘ दुष्यन्त के इस शेर से प्रेरणा लेकर ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन इण्टर कालेज के दिव्यांग छात्र नीलेश वर्मा ने आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में दिव्यांग व ओबीसी श्रेणी में प्रथम स्थान हासिल किया है। नीलेश का कहना है कि मन में हौसला, परिवार का साथ और आगे बढ़ने की ललक हो तो शारीरिक अक्षमता कभी सफलता में बाधा नहीं बन सकती। उसने बताया कि गणितज्ञ श्रीनिवास रमन की प्रेरणा, स्कूल के अध्यापकों का मार्गदर्शन व माता-पिता के आर्शीवाद अपने मंजिल की पहली सीढ़ी पार कर ली है।नीलेश का सपना है कि वह आगे चलकर अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनना चाहता है। बेटों के सपनों के लिए पिता ने छोड़ा शहर- शहर के बर्रा इलाके के दामोदर नगर निवासी ओमप्रकाश वर्मा बेटों को अच्छी शिक्षा के लिए आठ साल से मध्यप्रदेश के देवास में एक प्राइवेट कंपनी में काम कर रहें हैं।नीलेश की मां अमरावती जो कि गृहणी है, ने बताया कि उनका सपना है कि बेटे अच्छी शिक्षा लेकर देश का नाम रोशन करें। जिसके चलते उन्होंने शहर छोड़ दिया और कंपनी में अधिक से अधिक काम करते हैं। मां ने बताया कि बड़ा बेटा अभिषेक वर्मा जबलपुर में ट्रिपल आईटी से बीटेक कर रहा है। नीलेश का सपना साइंटिस्ट बनना- नीलेश ने बताया कि मैं प्रतिदिन घर में छह से सात घंटे पढ़ाई करता हॅंू, कुछ समय टहलने व महान वैज्ञानिकों की जीवनी पढ़ने में व्यतीत होता है। मेरा एक ही सपना है कि अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनकर देश को अंतरिक्ष के क्षेत्र में आगे बढ़ाना है।हालांकि नीलेश अपना आदर्श महान गणितज्ञ श्रीनिवास रमन को मानता है। इसके बावजूद वह अंतरिक्ष के क्षेत्र में जाना चाहता है। कानपुर पहली पसंद- आईआईटी में टाॅप करने के बाद भी जब नीलेश से पूछा गया कि आईआईटी के किस संस्थान में प्रवेश लेगा।तो उसने तबाक से कहा कि मेरी पहली प्राथमिकता कानपुर है। हालांकि टाॅप करने पर उसको पहली वरीयता में प्रवेश मिल जाएगा। मोदी का कायल है नीलेश- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को विपक्षी पार्टियों के लोग भले ही कहें कि बड़बोले हैं, लेकिन आईआईटी टाॅपर का कहना है कि मोदी के भाषण में लाजिक रहता है। नीलेश ने बताया कि मेरी राजनीति में कोई रूचि नहीं है फिर भी मोदी को ही सुनना पसंद करता हॅंूं। मोदी जी जो कहते है वह करते है यही नहीं वह दूर की सोंचते है। जब कोई राजनेता दूर की सोंचता है तभी वह देश तरक्की करता है। इसके साथ ही उसने बताया कि खेल व फिल्म में भी कोई दिलचस्पी न होते हुए भी सुरेश रैना की बैटिंग व किंग खान की एक्टिंग मेरी पहली पंसद है। बचपन से है दिव्यांग- नीलेश की मां अमरावती वर्मा ने बताया कि जब नीलेश दो साल का था तभी उसकी अचानक तबियत खराब हुई। जब तक इलाज में सही हो पाया तब तक उसका दाहिना हाथ खराब हो गया। मां के अनुसार नीलेश बाएं हाथ से भी अधिक जोर नहीं पाता। इसके बावजूद बाएं हाथ से ही पढ़ाई का पूरा काम कर लेता है। स्कूल प्रबंधन ने बढ़ाया हाथ- नीलेश की प्रतिभा व घर की आर्थिक स्थित को देखते हुए स्कूल प्रबंधन आगे आया और उसकेे खान-पान, काॅपी-किताबें व आने जाने के लिए वाहन की पूरी व्यवस्था कर दी। इसके साथ स्कूल फीस व एक्स्ट्रा क्लासेस को भी निःशुल्क कर दिया। नीलेश ने बताया कि प्रधानाचार्य राममिलन सिंह व एक्स्ट्रा क्लासेज के अध्यापक पृथ्वीपति सचान व महेश सिंह का इस मुकाम तक पंहुचाने में बड़ा योगदान रहा। कानपुर से अवनीश की रिपोर्ट
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