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शिक्षा का बन गया मजाक ,आर टी आई ने किया खुलासा !

शिक्षा का बन गया मजाक ,आर टी आई ने किया खुलासा !
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आपको सुनकर शायद अचम्भा होगा परन्तु यही सच है ! जिस विश्वविध्यालय को भारत सरकार ने देश का नंबर एक तकनीकी विश्वविध्यालय का तगमा दिया है व जिसे हरियाणा के नंबर एक विश्वविध्यालय की ख़िताब मिला है, उसने जनता के जानकारी के अधिकार का भद्दा मजाक बनाने में कोई कसर ना छोड़ रखी है ! इस विश्वविध्यालय के दूरवर्ती शिक्षा विभाग में वर्षो तक यह प्रावधान लागु रहा कि कोई भी छात्र चाहे तो एक साथ कोई भी दो डिग्रीज कर सकता है व इस प्रावधान को वर्ष 2012 में भारत सरकार के दूरवर्ती शिक्षा कौंसिल के निर्णय अनुसार सिमित किया गया ! लेकिन जब इस बारे विश्वविध्यालय से सूचना के अधिकार के तहत पूछा गया तो दूरवर्ती शिक्षा विभाग के निदेशक की तरफ से आई जानकारी में दावा किया गया की आज तक इस विश्वविध्यालय में एक भी विद्यार्थी को एक से ज्यादा डिग्री की अनुमति न दी गई ! जबकि हकीकत यह है कि इस विश्वविध्यालय में ना केवल वर्षो तक यह प्रावधान लागु रहा कि कोई भी छात्र चाहे तो एक साथ कोई भी दो डिग्रीज कर सकता है, बल्कि यह भी प्रावधान रहा कि यदि कोई विद्यार्थी एक डिग्री रेगुलर करते हुए दूसरी डिग्री इस विश्वविध्यालय से दूरवर्ती शिक्षा विभाग से करेगा तो उसे उसकी फीस में 25% की छूट भी दी जाएगी ! यहाँ यह भी बताना जरुरी होगा की आखिर क्या मजबूरी हो गयी कि विश्वविध्यालय के जन सूचना अधिकारी ने ये भ्रामक सूचना आवेदक को भेज दी !दरअसल वर्ष 2013 में विश्वविध्यालय में हुई भर्तियों में जमकर धान्द्ली हुई थी, जिसे लेकर अनेक मामले तो अदालतों में भी चल रहे हैं व एक मामले में आवेदक को बिना किसी प्रावधान के उसके डिग्री के आधार पर बनने वाले पांच नंबर इस बात का बहाना बनाकर ना दिए थे कि उसने दो डिग्रीज इकठी कर रखीं थी, जबकि ना तो ऐसा कोई प्रावधान था व इस विश्वविध्यालय का दूरवर्ती शिक्षा विभाग तो वर्षो से खुद ही एक साथ कोई भी दो डिग्रीज करने के लिए लोगो को आमंत्रण दे रहा था ! यदि एक साथ की दो डिग्रीज में से एक को ये विश्वविध्यालय ही मानने को तैयार ना था तो खुद ही क्यों करा रहा था ! शायद बच्चों से फीस बटोरने की इच्छा से ऐसा तो नहीं कर रहा था ! जी हाँ ! यह सच है की हरियाणा में सरकारी नोकरियों में अपने उम्मीदवार को लगाने हेतु चयन प्रावधानों की सरेआम धज्जियाँ उड़ाने का पुराना चलन रहा है व फिर अपनी गलतियों को छुपाने के लिए एक के बाद एक झूठ बोलने का !यहाँ यह भी बताना महत्वपूर्ण होगा की उपरोक्त आवेदक जिसके डिग्रीज आदि के आधार पर दिए जाने वाले 55 अंकों में से 5 अंक काटने के बाद भी 50 अंक थे को इंटरव्यू आदि के 45 अंको में से सिर्फ 14 अंक दिए गए, जबकि इसकी जगह लगाई गई उम्मीदवार जिसके डिग्रीज आदि के आधार पर दिए जाने वाले 55 अंकों में से सिर्फ 25 अंक थे को इंटरव्यू आदि में 42 अंक दिए गए !एक और हमारे मुख्यमंत्री पुराने मुख्यमंत्री की एक के बाद एक CBI जांच करवा रहे हैं वही दूसरी और आज भी हरियाणा में गैर क़ानूनी कार्य बदस्तूर जारी हैं ! इससे तो पूर्व मुख्यमंत्री का यह दावा ठीक ही लगता है कि उनपर मुक़दमे राजनितिक दुर्भावना से दर्ज किये गए हैं क्योंकि हरियाणा में नई सरकार आने व विश्वविध्यालय में नये उपकुलपति व रजिस्ट्रार आने के बावजूद व्यस्था तो पुरानी ही जारी हैं !
S. Garg, R.T.I. Activist, द्वारा भेजे गए मेल पर आधारित


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