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क्या असर होगा "रघु" राम के जाने का .......................

नई दिल्ली : एक तरीके से सरकारी मोर्चा खुलने के बाद जिस तरह से दूसरा विस्तार लेने को मना कर दिया उससे देश की राजनीती में फर्क तो पड़ा ही साथ ही देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है वहीं राजनीतिक दलों ने इस मामले में सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि राजन को दूसरा कार्यकाल न देने के लिए यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा की साजिश है। राजन ने शनिवार को सबको हैरान करते हुए घोषणा की थी कि उनकी दूसरा कार्यकाल लेने में रुचि नहीं है।
क्या फर्क पड़ सकता है रघुराम के जाने पर

अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों ने इसे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अपशकुन बताया है। इस बीच, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) और शेयर बाजारों ने अपनी निगरानी और जोखिम प्रबंधन प्रणाली को मजबूत किया है, जिससे रिजर्व बैंक के गवर्नर राजन द्वारा दूसरा कार्यकाल नहीं लेने की घोषणा के बाद सोमवार को बाजार खुलने पर उतार-चढ़ाव से बचाया जा सके।राजन के उत्तराधिकारी के रूप में डिप्टी गवर्नर उर्जित पटेल, पूर्व कैग विनोद राय, एसबीआई प्रमुख अरुंधति भट्टाचार्य, मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन, विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री कौशिक बसु और आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकान्त दास शामिल हैं। राजन के उत्तराधिकारी के रूप में जिन नामों पर अटकलें चल रही हैं उनमें पटेल को रिजर्व बैंक में महंगाई के मोर्चे पर राजन का लेफ्टिनेंट कहा जाता है। वहीं एसबीआई चेयरपर्सन के रूप मे भट्टाचार्य का कार्यकाल भी सितंबर में समाप्त हो रहा है। इसी महीने राजन का भी कार्यकाल पूरा हो रहा है।पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) राय को 2जी घोटाला खोलने वाला माना जाता है। इस समय वह नवगठित बैंक बोर्ड ब्यूरो (बीबीबी) के प्रमुख हैं, जो सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में नियुक्ति के अलावा बैंकिंग सुधारों के बारे में सलाह देगा। मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन, विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री कौशिक बसु, राजस्व सचिव शक्तिकान्त दास, वित्त मंत्री के पूर्व सलाहकार पार्थसारथी शोम, ब्रिक्स बैंक के प्रमुख केवी कामत और सेबी के चेयरमैन यूके सिन्हा का नाम भी चर्चा में है। राजन की तरह सिन्हा को पूर्व संप्रग सरकार के कार्यकाल में सेबी का चेयरमैन बनाया गया था और राजग सरकार ने इस साल उन्हें विस्तार दिया था। सरकार पर हमला बोलते हुए मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने कहा कि कुछ भाजपा और आरएसएस नेता उनके खिलाफ लामबंद हो रहे थे। उन्होंने इसे देश के लिए बहुत अप्रिय घटना बताया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरप्पा मोइली ने कहा कि राजन जैसा काबिल आदमी इस सरकार को चाहिए ही नहीं। राजद के प्रवक्ता मनोज झा ने कहा कि राजन के फैसलों से लोग काफी सुरक्षित महसूस कर रहे थे।कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि सरकार फरार कारोबारी विजय माल्या को रिजर्व बैंक का गवर्नर बना सकती है क्योंकि उन्हें ‘बैंकिंग व्यवस्था’ का महान अनुभव है। राजन के खिलाफ अभियान छेड़ने वाला भाजपा सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने राजन पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वास्तविकता को छुपाने के लिए गवर्नर जो भी ओट ले रहे हों लोगों को उससे कुछ मलाल नहीं करना चाहिए और उन्हें अलविदा करना चाहिए।

जानिए रघुराम राजन के करियर के बारे में

स्नातक स्तर तक की पढ़ाई के बाद राजन शिकागो विश्वविद्यालय के ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस में शामिल हो गए। सितम्बर 2003 से जनवरी 2007 तक वहअंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष में आर्थिक सलाहकार और अनुसंधान निदेशक (मुख्य अर्थशास्त्री) रहे। जनवरी 2003 में अमेरिकन फाइनेंस एसोसिएशन द्वारा दिए जाने वाले फिशर ब्लैक पुरस्कार के प्रथम प्राप्तकर्ता थे। यह सम्मान 40 से कम उम्र के अर्थशास्त्री के वित्तीय सिद्धान्त और अभ्यास में योगदान के लिए दिया जाता है।
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2005 में ऐलन ग्रीनस्पैन अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सेवानिवृत्ति पर उनके सम्मान में आयोजित एक समारोह में राजन ने वित्तीय क्षेत्र की आलोचना कर एक विवादास्पद शोधपत्र प्रस्तुत किया।[11] उस शोधपत्र में उन्होंने स्थापित किया कि अन्धाधुन्ध विकास से विश्व में आपदा हावी हो सकती है।[12] राजन ने तर्क दिया कि वित्तीय क्षेत्र के प्रबन्धकों को निम्न बातों के लिए प्रेरित किया जाता है:"उन्हें ऐसे जोखिम उठाने हैं जो गम्भीर व प्रतिकूल परिणाम उत्पन्न कर सकते हैं मगर इसकी सम्भावना कम होती है। पर यह जोखिम बदले में बाकी समय के लिए बेहिसाब मुआवजा मुहैय्या कराते हैं। इन जोखिमों को
टेल रिस्क
के रूप में जाना जाता है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण चिन्ता का विषय यह है कि क्या बैंक वित्तीय बाजारों को वह चल निधि प्रदान कर पायेंगे जिससे टेल रिस्क अगर कार्यान्वित हो तो वित्तीय हालात के तनाव कम किये जा सकें? और हानि को इस प्रकार आवण्टित किया जाये कि वास्तविक अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव कम से कम हो।"और इस प्रकार राजन ने विश्व की 2007-2008 के लिए वित्तीय प्रणाली के पतन की 3 वर्ष पूर्व ही भविष्यवाणी कर दी थी।उस समय राजन के शोधपत्र पर नकारात्मक प्रतिक्रिया ज़ाहिर की गयी। उदाहरण के लिए अमेरिका के पूर्व वित्त मन्त्री और पूर्व हार्वर्ड अध्यक्ष लॉरेंस समर्स ने इस चेतावनी को गुमराह करने वाला बताया।
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अप्रैल 2009 में, राजन ने द इकोनोमिस्ट के लिए अतिथि स्तम्भ लिखा जिसमें उन्होंने प्रस्तावित किया कि एक नियामक प्रणाली होनी चाहिए जो वित्तीय चक्र में होने वाले अप्रत्याशित लाभ को कम कर सके।[14]इन सबके अतिरिक्त उन्हें जो सम्मान प्राप्त हुए हैं वो हैं -
2011- में नासकोम द्वारा - ग्लोबल इंडियन ऑफ द ईयर
2012- में इन्फोसिस द्वारा-आर्थिक विज्ञान के लिए सम्मान
2013- वित्तीय अर्थशास्त्र के लिए सैंटर फार फाइनेंशियल स्टडीज़, ड्यूश बैंक सम्मान
(सोर्स विकिपीडिया )
सोर्स वेबनेव्स


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