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चिंकारा को "गोली "मारने के मामले में फिर "घिर" सकते हैं सलमान" ड्राइवर "हरीश आया सामने

चिंकारा को गोली मारने के मामले में फिर घिर सकते हैं सलमान ड्राइवर हरीश आया सामने
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नयी दिल्ली -अभी अदालत से सलमान को रहत मिली ही थी कि दूसरे विवाद ने जन्म ले लिया राजस्थान में 1998 में बॉलीवुड स्टार सलमान खान की कथित हिरण शिकार के दौरान उनकी जीप चला रहे ड्राइवर ने आज अपना दावा दोहराया कि अभिनेता ने ही चिंकारा की हत्या की थी. धमकियों से डरा है हरीश जिस ड्राइवर को बताया गया था कि वह गायब है और दुबई में रह रहा है उसी ‘‘गुमशुदा'' बताए जा रहे हरीश दुलानी का यह बयान उच्च न्यायालय द्वारा सलमान को बरी किए जाने के दो दिन बाद आया है. राजस्थान उच्च न्यायालय ने जोधपुर में वर्ष 1998 में चिंकारा के शिकार के दो मामलों में 50 वर्षीय अभिनेता को बरी कर दिया है. दुलानी ने यह भी कहा कि वह फरार नहीं हैं, बल्कि धमकियों की वजह से डरा हुआ है. निजी चैनल को दिए गए इंटरव्यू में हरीश ने कहा कि ‘मैं 18 साल पहले मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए बयान पर कायम हूं कि सलमान कार से उतरे और हिरण को गोली मारी. मैं लापता नहीं था, लेकिन मुझे और मेरे पिता को मिली धमकियों के कारण डरा हुआ था.'' उसने कहा, ‘‘डर से मैं अपने रिश्तेदारों के पास जोधपुर चला गया . हमने सुरक्षा की मांग की थी, लेकिन वह नहीं मिली. यदि मुझे पुलिस सुरक्षा मिली होती, तो मैंने बयान दिया होता. हमेशा से मेरी यही मंशा थी.'' अदालत ने अपने फैसले में कहा कि चिंकारा के शरीर से मिली गोलियां सलमान खान के लाइसेंसी बंदूक से नहीं चलायी गयी थीं. शिकार के इस मामले में दुलानी अभियोजन पक्ष का एकमात्र गवाह था. उसे 2002 से ही गायब बताया जा रहा था, जिसके कारण सलमान के खिलाफ अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर पड गया. ड्राइवर हरिश दुलानी का कहना है कि उसे सलमान खान का ड्राइवर होने की ‘‘सजा'' मिल रही है. उसने कहा, ‘‘मुझे सलमान का ड्राइवर होने की सजा मिल रही है. मैं अपनी जिन्दगी डर में जी रहा हूं.'' लुप्तप्राय जीव चिंकारा को 1998 में गोली मारने के आरोप में सलमान वर्ष 2007 में करीब एक सप्ताह जेल में भी रहे थे. उच्च न्यायालय में दलील पेश करते हुए सलमान के वकील ने कहा कि अभिनेता का नाम इन मामलों में फर्जी तरीके से डाला गया है. वाहन चालक दुलानी के बयान मात्र पर शिकार के दोनों मामलों में सलमान का नाम जोडा गया है. वकील ने कहा कि दुलानी कभी भी जिरह के लिए उनके समक्ष उपलब्ध नहीं थे, ऐसे में सलमान को दोषी करार देने के लिए उसके बयान में यकीन नहीं किया जा सकता. वकील ने कहा कि दोनों मामले परिस्थिति जन्य साक्ष्यों पर आधारित हैं और इनमें कोई प्रत्यक्षदर्शी या सलमान के खिलाफ ठोस सबूत नहीं है. हरीश दुलनि के सामने आने के बाद मुमकिन है की इस मामले को फिर से शुरू किया जा सके ।
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