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कौन बड़ा "दलित" माया और "अठावले" में ठनी

कौन बड़ा दलित माया और अठावले में ठनी
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लखनऊ -मीडिया से दूरी बनाये रखने वाली मायवती अब हर मुद्दे पर मीडिया से मुखातिब हो रही हैं और पहले आलोचनाओं को नजरअंदाज करने वाली मायवती में अब बड़ा बदलाव आ गया है अब वो हर आरोप का जवाब देने लगी हैं अब उनकी चिंता अठावले को लेकर है यूपी में चुनाव से पहले देश के दो बड़े दलित नेताओं के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है. पहले महाराष्ट्र के बड़े दलित नेता और केंद्र सरकार में राज्यमंत्री रामदास अठावले ने अंबडेकर के नाम पर मायावती पर केवल राजनीति करने का आरोप लगाया. अठावले ने कहा कि मायावती बाबा साहेब अंबेडकर के नाम पर राजनीति तो करती हैं लेकिन उनके आदर्शों को नहीं मानतीं. मायावती का अठावले पर पलटवार अठावले के इस बयान में मायावती ने जोरदार पलटवार किया है. मायावती ने कहा कि रामदास अठावले बीजेपी की गुलामी में बाबा साहब के मूवमेंट को आघात पहुंचा रहे हैं. मायावती के बौद्ध धर्म अपनाने की अठावले की सलाह पर भी उन्होंने कहा कि जब समाज जागरूक हो जाएगा, तब कांशीराम की इच्छा के मुताबिक करोड़ों लोगों के साथ बौद्ध धर्म अपनाऊंगी और ये ऐतिहासिक घटना होगी. बीजेपी पर लगाया बहकाने का आरोप मायावती ने कहा बाबा साहब ने भी बौद्ध धर्म अपनाने में जल्दबाजी नहीं की थी और जीवन के आखिरी वक्त में बौद्ध धर्म अपनाया था. मायावती ने प्रेस नोट जारी कर अठावले को आगाह किया कि दलितों को गुलाम बनाने की मानसिकता रखने वाले बीजेपी के एजेंडे पर काम करना बंद करें और दलित एकता को न तोड़े. मायावती की अठावले की नसीहत मायावती की मानें तो रामदास अठावले बीजेपी की गुलामी और अपने स्वार्थ के चलते अंबेडकर की भावना को आहत कर रहे हैं. मायावती ने कहा कि अठावले को बीजेपी के बहकावे में आकर बौद्ध धर्म अपनाने के संबंध में कोई बात नहीं कहनी चाहिए. अठावले ने मायावती पर साधा था निशाना गौरतलब है कि रामदास अठावले मायावती पर हमला करते हुए कहा था कि अगर वो सच्ची अंबेडकरवादी हैं तो वे अबतक क्यों हिन्दू हैं, बौद्ध धर्म क्यों नहीं अपनातीं? केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि मायावती को दलितों के हितों से कोई सरोकार नहीं है, वो केवल दलितों के नाम पर राजनीति कर रही हैं.
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