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गुजरात में अपना "गढ़ "बचाने में जुटी बी जे पी

गुजरात में अपना गढ़ बचाने में जुटी बी जे पी
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अहमदाबाद -बी जे पी के मजबूत गढ़ गुजरात में सब कुछ ठीक ठाक नजर नहीं आ रहा है गुजरात की पहली महिला मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल के इस्तीफे के बाद इस बात पर भी चर्चा जारी है कि आखिरकार आनंदीबेन को क्यों इस्तीफा वो भी सोशल मीडिया के जरिये देना पड़ा अब इस्तीफे के बाद बीजेपी नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान अगले दो-तीन दिन में कर सकती है. अमित शाह का नाम भी चर्चा में गुजरात में दरकते जनाधार को संभालने के लिए बीजेपी अमित शाह को भी अगला सीएम बना सकती है. ऑनलाइन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गुजरात के अगले सीएम के तौर पर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के नाम पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है. सियासी गलियारे में इस पद के दावेदार के लिए कुछ और नामों पर चर्चा चल रही है. सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री बनने की रेस में सबसे ऊपर गुजरात बीजेपी के अध्यक्ष विजय रुपानी का नाम लिया जा रहा है. दरअसल, विजय रुपानी के लिए कहा जाता है कि संगठन में उनकी अच्छी पकड़ है. अनुभव के साथ ही विश्वसनीय चेहरा हैं रुपानी आनंदीबेन के गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य में पार्टी का संगठन कमजोर हो रहा था. बीजेपी की अंदरूनी उठापठक हाईकमान के पास जा रही थी. यही वजह थी कि संगठन को मजबूत बनाने के लिये विजय रुपानी को अध्यक्ष बनाया गया. हालांकि विजय रुपानी खुद सरकार में भी परिवहन मंत्री की भूमिका में हैं. ऐसे में सरकार चलाने का अनुभव भी उनके पास करीब एक साल का है. शाह के करीबी भी हैं रुपानी विजय रुपानी का नाम इसलिए भी सब से ऊपर लिया जा रहा है कि वो अमित शाह के करीबियों में से एक हैं. साथ ही सरकार और संगठन का समन्वय वो बखूबी कर रहे हैं. यहां तक कि पिछले दिनों सरकार की जितनी भी महत्वपूर्ण योजनाएं घोषित की गईं, वो सभी आनंदीबेन पटेल की जगह विजय रुपानी ने ही की. हालांकि जानकार ये भी मान रहे हैं कि गैर-पाटीदार समुदाय से मुख्यमंत्री बनाए जाने पर बीजेपी को गुजरात में पाटीदार वोटों का नुकसान भी झेलना पड़ सकता है. मोदी के करीबी नितिन पटेल भी रेस में आनंदीबेन के उत्तराधि‍कारी के तौर पर दूसरा नाम नितिन पटेल का आ रहा है. नितिन पटेल एक तो पाटीदार समुदाय से आते हैं, साथ ही वो लंबे वक्त से सरकार में मंत्री बने हुए हैं. नरेन्द्र मोदी जब गुजरात में मुख्यमंत्री थे, उस वक्त नितिन पटेल मोदी के करीबी नेताओ में से एक थे. हालांकि पाटीदार आंदोलन के वक्त पर नितिन पटेल को अपने ही पाटीदार समाज के गुस्से का शिकार होना पड़ा था. यहां तक कि पाटीदारों ने नितिन पटेल को समुदाय में हासिये पर लाकर खड़ा कर दिया था. ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या नितिन पटेल बीजेपी की उम्मीदों पर खरा उतरेंगे. संगठन पर पकड़ भीखू को दिला सकती है कुर्सी तीसरा नाम भीखू दलसानिया का भी है. भीखू दलसानिया पिछले लंबे वक्त से बीजेपी के संगठन में काम कर रहे हैं. नरेन्द्र मोदी जब गुजरात में मुख्यमंत्री थे तब भीखू की संगठन में काफी अच्छी पकड़ थी. वो आरएसएस के भी काफी करीबी रहे है. साफ-सुथरी छवि और जातिवादी समीकरण भी भीखू के पक्ष में जाते दिख रहे हैं. पुरुषोत्तम रुपाला और सौरभ पटेल के नाम पर फुल स्टॉप! पुरुषोत्तम रुपाला और सौरभ पटेल के नाम पर पूर्णविराम लगता दिख रहा है. रुपाला को हाल ही में राज्यसभा का सदस्य बनाया गया है और उन्हें केन्द्र में मंत्री पद भी दिया गया है. वैसे में वो इस्तीफा दें और गुजरात के मुख्यमंत्री बनें, यह बात हर किसी के गले नहीं उतर रही है. दूसरी ओर, अंबानी परिवार के दामाद होने की वजह से सौरभ पटेल के भी मुख्यमंत्री बनने की कोई उम्मीद नहीं दिखती. अगर सौरभ पटेल को सीएम बनाया जाता है तो 2017 में पहली बार गुजरात में विधानसभा चुनाव लड़ने का प्लान बना रही आम आदमी पार्टी को बैठे बिठाए एक मुद्दा मिल जाएगा. जो विधानसभा चुनाव में बीजेपी के लिए घाटे का सौदा भी बन सकता है. राजनीति में जाति व्यवस्था का भी ध्यान रखना होता है कुल मिलाकर पाटीदार समुदाय से ही सी एम चुने जाने का पलड़ा भरी नजर आता है । सोर्स today
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