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जी एस टी "बिल "पर मोदी रखेंगे अपनी बात

जी एस टी बिल पर मोदी रखेंगे अपनी बात
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नई दिल्ली-आखिरकार जी एस टी बिल पेश हो ही गया जो इस सरकार के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है इस मुद्दे पर सरकार को विपक्ष का भी साथ मिला एक देश एक टैक्स वाला जीएसटी बिल आज लोकसभा में पेश किया गया. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी बिल पेश करते हुए विपक्ष का शुक्रिया अदा किया. शाम छह बजे पीएम मोदी जीएसटी को लेकर अपनी बात रखेंगे.बीजेपी और कांग्रेस ने सांसदों को व्हिप जारी कर उपस्थित रहने को कहा है. वित्त मंत्रालय का जोर अगले साल एक अप्रैल से कर उपायों को कार्यान्वित करने पर है.राज्यसभा ने बुधवार को ही जीएसटी विधेयक को पारित किया था. सरकार की ओर से छह संशोधन पेश किए गए जिन्हें सदन ने सर्वसम्मति से मंजूरी प्रदान कर दी थी. यह विधेयक लोकसभा में पहले ही पारित हो चुका है. लेकिन राज्यसभा में मंजूर किए गए संशोधनों को शामिल करने की खातिर इसे फिर से लोकसभा में लाया जाएगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मुद्दे पर रखेंगे अपनी बात
इसके लिए होने वाली बहस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे. सरकार ने आज के निचले सदन के विधायी कार्यो के लिए इस विधेयक को सूचीबद्ध किया है.जीएसटी विधेयक को राज्यसभा ने बुधवार को संशोधनों के साथ पारित किया था, इसलिए इसे फिर से लोकसभा की स्वीकृति की जरूरत है.राज्यसभा से तीन अगस्त को जीएसटी के लिए संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के दौरान प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति पर विपक्षी दलों खासकर कांग्रेस ने निशाना साधा था. सूत्रों ने कहा कि आज प्रधानमंत्री संभवत: बहस में हस्तक्षेप करेंगे.संसदीय कार्यमंत्री ने शनिवार को जीएसटी से जुड़े 122वें संविधान संशोधन की राज्यसभा से आमसहमति से पारित होने को संसद के मानसून सत्र के तीसरे हफ्ते का प्रमाणचिन्ह अंकित करना करार दिया था.लोकसभा से पारित होने के बाद यह विधेयक राष्ट्रपति की सहमति के लिए जाएगा और उसके बाद राज्यों को 30 दिनों के अंदर इसकी अभिपुष्टि करने के लिए कहा जाएगा.राज्यों से जुड़ा संविधान संशोधन होने के कारण कम से कम 50 प्रतिशत राज्यों को इसका समर्थन करना होगा. इस प्रक्रिया में अधिक समय लग सकता है क्योंकि राज्यों के अपनी चिंताएं एवं मुद्दे हैं, जिनका निवारण अधिकार प्राप्त समिति और सरकार को करना होगा. हालांकि इसमें जिससे मदद मिलेगी वह यह है कि देश के 29 राज्यों में 13 में भाजपा की ही सरकार है.इन औपचारिकताओं के अलावा संसद को केंद्रीय जीएसटी एवं एक समेकित जीएसटी विधेयक भी पारित करना होगा, जबकि राज्यों को राज्य जीएसटी के लिए अपना कानून लागू करना होगा. ऐसा इस वजह से कि केंद्र और राज्य में एक ही दर से जीएसटी लागू करने की व्यवस्था बने. सरकार ने कहा है कि अगले वर्ष एक अप्रैल से पूरे देश में जीएसटी लागू करने का लक्ष्य है.
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