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कांग्रेस की मरी बछिया में जान डाल रही खटिया

कांग्रेस की मरी बछिया में जान डाल रही खटिया
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लखनऊ:- कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की किसान यात्रा के दौरान गांवों में लगने वाली खाट पंचायत के बाद ग्रामीणों दारा खटिया लुटने की धटनाओं से पार्टी को भले ही मामूली सा आर्थिक नुकसान हो रहा हो लेकिन उसे इस नुकसान के बदले बहुप्रतीक्षित देशव्यापी लोकप्रियता मिल रही है। सूबे में काफी समय से काग्रेंस की स्थिति मरी बछिया जैसी थी। राहुल की इन खाट पंचायतों में लुट रही खटिया ने पार्टी की मरी बछिया में मानो जान फुंक दी है। इलेक्ट्रानिक न्यूज चैनल से लेकर प्रिंट मीडिया तक कांग्रेस दवारा किसानो के बैठने के लिए पंचायतो में डाली जानें वाली खटिया को लुटने की खबरों को इस तरह से दिखाया व प्रकाशित किया जा रहा है कि करोड़ो रुपए खर्च करने पर भी पार्टी को देश विदेश में इतनी पापुलर्टी न मिल पाती।

काग्रेंस की खटिया पर बैठने को तरस रहे किसान:-


राहुल की खाट पंचायतो में शामिल होने वाले ग्रामीणो का कहना है कि किसानों को तो बेकार में बदनाम किया जा रहा है। पंचायत की इन खाटो पर राहुल गांधी के आने के पहले ही लंबी व मंहगी कारो के एसी में बैठकर आने वाले काग्रेंसी नेता अपना कब्जा जमा लेते है। ग्रामीण किसान इन पंचायतो में भी या तो जमीन पर बैठ जाते है या फिर खडे रहते है। राहुल बाबा इतने भोले व सरल है जो काग्रेंसी नेता व ग्रामीण किसानो में फर्क ही नही कर पाते है।


खटिया लूट या प्रचार की रणनीति:-


देवरिया से दिल्ली तक 2500 किलोमीटर की काग्रेंस की किसान यात्रा का सबसे रोचक पहलु यही सामने आया है। बहुत संभव है की प्रचार के मास्टरमाइंड प्रशांत किशोर (पीके) ने खाट पंचायतो का आयोजन सुनियोजित तरीके से किया हो। हो सकता है खाट की लुट को लेकर काग्रेंस को मिलने वाली ये लोकप्रियता पीके की पहले से तय रणनीति का हिस्सा हो।

प्रदेश के नेताओं ने तो पहले से ही खड़ी कर रखी है खाट:-


प्रदेश के काग्रेंसी नेताओं वैसे तो पार्टी की खाट पहले से ही खड़ी कर रखी है। बीते लोकसभा चुनाव में यदि अमेठी और रायबरेली के मतदाताओं ने राहुल औऱ सोनिया को जिता कर देश की सबसे बड़ी पंचायत में न भेजा होता तो अन्य नेताओं के सहारे काग्रेंस का प्रदेश में खाता ही न खुलता । कमो बेस यही स्थिति वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव की रही जिसमें काग्रेंस के 29 उम्मीदवारों को पार्टी से ज्यादा पर्सनालिटी के बल पर जीत मिली थी। कुछ भी हो पीके के रणनीति का ही असर है कि अब काग्रेंस चर्चा में है और हर कार्यक्रम को लोकप्रियता मिल रही है।


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