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जानिए किन लोगों को मिलता हैं शेयर और सट्टे से लाभ और होते हैं मालामाल....



जानिए किन लोगों को मिलता हैं  शेयर और सट्टे से लाभ और होते हैं मालामाल....

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डेस्क -प्रिय पाठकों/मित्रों, वर्तमान में शिक्षा पूर्ण होने के पश्चात अक्सर युवाओं के मन में यह दुविधा रहती है कि नौकरी या व्यवसाय में से उनके लिए उचित क्या होगा। इस संबंध में जन्मकुंडली का सटीक अध्ययन सही दिशा चुनने में सहायक हो सकता है।

कैसे जाने की जातक क्या करेगा या क्या करना उचित रहेगा ??

पंडित दयानंद शास्त्री (मोबाईल--09039390067 ) के अनुसार किसी भी जातक की नौकरी या व्यवसाय देखने के लिए सर्वप्रथम कुंडली में दशम, लग्न और सप्तम स्थान के अधिपति तथा उन भावों में स्थित ग्रहों को देखा जाता है।
लग्न या सप्तम स्थान बलवान होने पर स्वतंत्र व्यवसाय में सफलता का योग बनता है।
पंडित दयानंद शास्त्री (मोबाईल--09039390067 ) के अनुसार प्रायः लग्न राशि, चंद्र राशि और दशम भाव में स्थित ग्रहों के बल के तुलनात्मक अध्ययन द्वारा व्यवसाय का निर्धारण करना उचित रहता है।
---- अग्नि तत्व वाली राशि (मेष, सिंह, धनु) के जातकों को बुद्धि और मानसिक कौशल संबंधी व्यवसाय जैसे कोचिंग कक्षाएँ, कन्सल्टेंसी, लेखन, ज्योतिष आदि में सफलता मिलती है।
---- पृथ्वी तत्व वाली राशि (वृष, कन्या, मकर) के जातकों को शारीरिक क्षमता वाले व्यवसाय जैसे कृषि, भवन निर्माण, राजनीति आदि में सफलता मिलती है।
---- जल तत्व वाली राशि (कर्क, वृश्चिक, मीन) के जातक प्रायः व्यवसाय बदलते रहते हैं। इन्हें द्रव, स्प्रिट, तेल, जहाज से भ्रमण, दुग्ध व्यवसाय आदि में सफलता मिल सकती है।
---- वायु तत्व (मिथुन, तुला, कुंभ) प्रधान व्यक्ति साहित्य, परामर्शदाता, कलाविद, प्रकाशन, लेखन, रिपोर्टर, मार्केटिंग आदि के कामों में अपना हुनर दिखा सकते हैं।

बहरहाल हम बात कर रहे हैं व्यक्ति के रोजगार(Profession) की. चाहे लाल-किताब हो अथवा वैदिक ज्योतिष, अधिकतर ज्योतिषी व्यक्ति के कार्यक्षेत्र, रोजगार के प्रश्न पर विचार करने के लिए जन्मकुंडली के दशम भाव (कर्म भाव) को महत्व देते हैं. वो समझते हैं कि जो ग्रह दशम स्थान में स्थित हो या जो दशम स्थान का अधिपति हो, वो इन्सान की आजीविका को बतलाता है ||

अब उनके अनुसार यह दशम स्थान सभी लग्नों से हो सकता है

जन्मलग्न से, सूर्यलग्न से या फिर चन्द्रलग्न से, जिसके दशम में स्थित ग्रहों के स्वभाव-गुण आदि से मनुष्य की आजीविका का पता चलता है. जबकि ऎसा बिल्कुल भी नहीं होता. ये पूरी तरह से गलत थ्योरी है||

पंडित दयानंद शास्त्री (मोबाईल--09039390067 ) के अनुसार दशम स्थान को ज्योतिष में कर्म भाव कहा जाता है, जो कि दैवी विकासात्मक योजना (Evolutionary Plan) का एक अंग है.यहाँ कर्म से तात्पर्य इन्सान के नैतिक अथवा अनैतिक, अच्छे-बुरे, पाप-पुण्य आदि कर्मों से है. दूसरे शब्दों में इन कर्मों का सम्बन्ध धर्म से, भावना से तथा उनकी सही अथवा गलत प्रकृति से है न कि पैसा कमाने के निमित किए जाने वाले कर्म(रोजगार) से ||
प्रिय पाठकों/मित्रों, शेयर, सट्टा, प्रत‌ियोग‌िता में धन की प्राप्त‌ि अचानक म‌िलने वाले लाभ की श्रेणी में आता है।

पंडित दयानंद शास्त्री (मोबाईल--09039390067 ) के अनुसार ज‌िनकी कुंडली में ग्रहों की यह कुछ खास स्‍थ‌ित‌ि होती है उन्हें इस तरह से लाभ म‌िलता है। तो देख‌िए आपकी जन्मपत्री में भी ऐसे योग तो नहीं बन रहे।

पंडित दयानंद शास्त्री (मोबाईल--09039390067 ) के अनुसार यदि किसी जन्मपत्री में पांचवें घर में गुरू के साथ पहले घर यानी लग्न के स्वामी ग्रह बैठे हों तब व्यक्त‌ि को अचानक से धन लाभ म‌िलता रहता है। उदाहरण के तौर पर आप देख सकते हैं क‌ि इस तस्वीर में मेष लग्न के स्वामी मंगल गुरू के साथ पांचवें घर में बैठे हैं।

यदि किसी कुंडली के पांचवें घर में चंद्र है और उस पर शुक्र की दृष्ट‌ि है तो यह भी अचानक धन प्राप्त होने का योग है।

पंडित दयानंद शास्त्री (मोबाईल--09039390067 ) के अनुसार यदि किसी जन्मपत्री में दूसरे घ्‍ार यानी ध्‍ान भाव और ग्यारहवें घर यानी लाभ स्थ्‍ाान के स्वामी चौथे घर में साथ बैठे हों और उन पर क‌िसी शुभ ग्रह की दृष्ट‌ि है तो आपको अचानक धन म‌िल सकता है।
यदि जन्मपत्री के केन्द्र स्‍थान यानी पहले, चौथे, सातवें और दसवें घर में कोई शुभ ग्रह हैं मजबूत स्‍थ‌ित‌ि में हों तो यह व्यक्त‌ि को अचानक लाभ द‌िलाते हैं।
पंडित दयानंद शास्त्री (मोबाईल--09039390067 ) के अनुसार यदि आपका आपका जन्म मीन लग्न में हुआ है और आपकी कुंडली में पांचवें घर में बुध है और ग्यारहवें घर यानी आय स्‍थान में शन‌ि है तो यह शेयर सट्टे में अचानक लाभ का योग बनाता है।


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