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भूखे को चाहिए "निवाला" चाहे वह "जूठन" से ही क्यों न मिले



भूखे को चाहिए

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फैजाबाद -जरा इस तस्वीर को गौर से देखिये इस तस्वीर को  यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि किन हालात से गुजर रहा है  यह लाचार और बेबस इंसान जिसे कूड़े के ढेर में पड़े जूठन को उठाकर खाना पड़ रहा है । देश में सरकार चलाने वाली केंद्र और प्रदेश की सरकारें चाहे मेक इन इंडिया डिजिटल इंडिया के जरिये देश को डिजिटल करें या अंत्योदय योजना जैसी गरीबों को भोजन मुहैया कराने वाली योजनाए चलाती रहे लेकिन जब तक शहर के चौक चौराहों पर इस तरह की तस्वीरें देखने को मिलेगी तब तक यह सारी योजनाएं कहीं न कहीं इस पूरे सिस्टम को मुंह चिढ़ाती हुई ही नजर आएंगी अंतर आत्मा को मर्माहत कर देने वाली यह तस्वीर है फैजाबाद जिले के ग्रामीण क्षेत्र गोसाईगंज कस्बे की है कस्बे के ठंडी सड़क दुर्गा पथ पर  एक धार्मिक आयोजन के बाद फेंके गए जूठन से निवाले चुन-चुन कर एक व्यक्ति खा रहा था और उस रोड से सैकड़ों  लोग भी गुजर रहे थे जिनकी अंतर आत्मा को इस तस्वीर ने झिझोड़ने  की कोशिश की लेकिन हर कोई बस इस सिस्टम को कोसते हुए आगे बढ़ गया लेकिन किसी ने इस गरीब और लाचार की मुफलिसी और मजबूरी को समझने की कोशिश नहीं की काफी देर तक यह नजारा चर्चा ए आम रहा जिसके बाद यह आदमी उसी भीड़ भरे बाजार में भीड़ का हिस्सा बनकर कहीं गुम हो गया । इस व्यक्ति ने अपना नाम नरेंद्र उपाध्याय जौनपुर का रहने वाला बताया जो भटक कर कस्बे में पहुच गया और भूख लगी तो फेंके हुए पत्तल से जूठन उठा कर खाने लगा. 
 अभिषेक गुप्ता 

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