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मांगे नहीं मानी तो जीते जी कफ़न पहन लिया

मांगे नहीं मानी तो जीते जी कफ़न पहन लिया
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हज़ारीबाग़ - मुर्दों को तो कफ़न पहने हुए आपने देखा है लेजिं अगर जिन्दा आदमी कफ़न पहन ले तो आप क्या कहेंगे लेकिन ऐसा हुआ है ,झारखंड के हजारीबाग जिला बडकागांव प्रखंड एवं केरेडारी के ग्रामीण पिछले चार दिन से एनटीपीसी के नितियों के खिलाफ तथा भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 को लागू करने,वन कानून लागू करने,2004 से लेकर आज तक जितने भी मुकदमे कंपनी अथवा कंपनी से जुड़े मुकदमे प्रशासन के द्वारा बेगुनाह गरीब भू-रैयतों के ऊपर किया गया,तथा पुलिस के द्वारा जो गर्भवती महिला,वृद्ध तथा दिव्यांग बच्चों पर बर्बरता पूर्वक लाठियां बरसाई गई ।निर्दोष किसानो के उपर किसान महारैली के दौरान गोलियां चलाई गई, जिसमे पांच दलित किसान तथा एक अल्पसंख्यक महिला समेत एक पत्रकार को पुलिस की गोली लगी थी । सभी के उच्चस्तरीय जांच के पश्चात दोषी पदाधिकारीयों पर कार्रवाई करने की मांग को लेकर ग्रामीणों के द्वारा "कफ़न सत्याग्रह" किया जा रहा है ।जिसमे बडकागांव के विधायक तथा झारखंड सरकार के पूर्व कृषि मंत्री भी जनता को सहयोग कर रहे हैं । 2004 ई.मे केंद्र सरकार के द्वारा एनटीपीसी को पंकरी बरवाडीह तथा चट्टी बरियातू कोल ब्लॉक आवंटित किया गया था ।परंतु भू-रैयतों के विरोध के कारण आज तक कम्पनी यहां खनन नही कर पाई है । ग्रामीणों ने बताया कि कंपनी के द्वारा कुछ लोगों को पैसे का लालच देकर फर्जी तरीके से हस्ताक्षर कराकर तथा फर्जी जनसुनवाई के कागजात बनाकर काम करने का प्रयास किया जा रहा है । सेक्शन 9 लगे रहने के कारण लोग दुख,मुसीबत अथवा बेटियों के शादी विवाह मे किसी अन्य व्यक्ति को जमीन नही बेच सके और मजबूरी मे कंपनी को जमीन देकर अपने काम किए, कुछ लोग जो जमीन किसी अन्य को उनके पूर्वजों के द्वारा बेच दिया गया था परंतु किसी कारण वश क्रेता के द्वारा मोटेशन नही कराया गया था वैसे जमीन का नोटिस पुराने जमीन मालिकों को भेजा गया और वो फर्जी तरीके से पुनः रसीद निर्गत कराकर मुआवजा उठा लिए ।कूछ रैयत इसी डर से कम्पनी को जमीन दे दिए कि कहीं हमारे जमीन का भी मुआवजा कोई और ना उठा ले ।इसी का लाभ उठा कर कम्पनी के द्वारा सरकार तथा स्थानीय प्रशासन को मोटी रकम देकर बल पूर्वक खनन करना चाह रही है ।जिसका विरोध लगातार भू-रैयतों के द्वारा किया जा रहा है ।किसानो का कहना है कि हमारे जमीन पर साल मे तीन फसल की पैदावार होती है, हम मरना पसंद करेंगे पर अपना उपजाऊ जमीन किसी भी कीमत पर नही देंगे ।उधर कम्पनी के द्वारा बनाए जा रहे विस्थापितों के लिए आर एन्ड आर कालोनी निर्माण से पहले ही बरसात मे गिर रही है तथा कई के छत से पानी टपक रहा है ।जिससे साफ प्रतित होता है कि निर्माण मे घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है । कुछ दिन पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने रैयतों को रांची बुलाकर 10 दिनो के भीतर कम्पनी के कार्यों के जांच का आश्वासन दिया था, परंतु आज तक कोई भी कार्रवाई सरकार के द्वारा एनटीपीसी पर अथवा त्रिवेनी सैनिक कम्पनी पर नही किया गया ।बताते चले की ग्रामीणों ने पहले भी चिता सत्याग्रह के माध्यम से अपना विरोध दर्ज कराया था तथा जनमत संग्रह कराने के लिये सरकार से आग्रह किया था पर विवश होकर अंत में ग्रामीणों ने जीते जी "कफ़न" पहन लिया ।पर इस गुंगी बहरी पूंजीपतियों की सरकार कान मे तेल डालकर सो रही है । और केंद्र सरकार ने गरीब किसानो के जमीन को जबरन लूटने के लिए हजारों की संख्या मे फोर्स भेजा है ।जो आए दिन लोगों के साथ मारपीट करते रहते हैं और जबरन जमीन देने के लिए विवश करते हैं ।
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