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शराबबंदी कानून पर बिहार हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई मुहर

शराबबंदी कानून पर बिहार हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई मुहर
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नई दिल्ली - नीतीश सरकार को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ी रहत मिली है और शराबबंदी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है जिसके द्वारा बिहार सरकार द्वारा शराबबंदी लागु करने के फैसले पर रोक लगा दी थी | सुप्रीम कोर्ट ने शराब पीने एवं उसकी बिक्री पर प्रतिबंध संबंधी बिहार के कानून को दरकिनार करने के पटना हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई. हाईकोर्ट ने जिन शराब निर्माताओं की याचिका पर प्रतिबंध कानून को दरकिनार किया था, सुप्रीम कोर्ट ने उन शराब निर्माताओं समेत सभी प्रतिवादियों से जवाब मांगा.

अगली सुनवाई आठ हफ्ते बाद
इन प्रतिवादियों की याचिका के आधार पर ही हाईकोर्ट ने नीतीश कुमार सरकार के प्रतिबंध कानून को अवैध और असंवैधानिक करार दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई अब 8 सप्ताह बाद करेगा.उल्लेखनीय है कि आज बिहार में शराब बंदी कानून को रद्द किए जाने के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. बिहार सरकार ने 30 सितंबर के पटना हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. बिहार सरकार की याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट के शराबबंदी कानून को रद्द करने से बिहार सरकार की शराबबंदी की मुहिम को झटका लगा.हाईकोर्ट ने पॉलिसी को रद्द करते हुए यह नहीं देखा कि संविधान का आर्टिकल 47 राज्यों को नीति निर्देशक तत्व के तहत ऐसी पॉलिसी बनाने का अधिकार देता है. खुद सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने कई आदेशों में कहा है कि राज्य सरकार शराबबंदी को लेकर नोटिफिकेशन जारी कर सकती है.


हाईकोर्ट में एक जज मानते हैं कि शराब पीना मौलिक अधिकार के तहत है जबकि बेंच में शामिल चीफ जस्टिस के विचार इससे अलग हैं. बिहार में शराबबंदी कानून जनहित में है और इसे समाज के बड़े तबके खासतौर पर महिलाओं ने सराहा है क्योंकि शराब की वजह से उनकी घर की आमदनी जाती रही, कर्ज हो गया और घरवालों के स्वास्थ्य तबाह हो गए.
बिहार में महागठबंधन की सरकार ने 1 अप्रैल से देश में निर्मित शराब का निर्माण, व्यापार, बिक्री और सेवन प्रतिबंधित किया था. लेकिन बाद में उसने राज्य में सभी प्रकार की शराब प्रतिबंधित कर दी थीं और इनमें विदेशी शराब भी शामिल थी|
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