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राम आखिर किसके !

राम आखिर किसके !
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लखनऊ- राम नाम की लूट है लूट सके तो लूट मौका चुनावी है । अब दिखाया जा रहा है कि राम का आखिर सबसे बड़ा हितैषी कौन है । सपा सरकार ने जहाँ इसे अपना बनाने की कोशिश की है वहीँ इस मामले को अपना पेटेंट करा चुकी मानाने वाली भाजपा में खलबली है । प्रदेश और केंद्र सरकार में 'राम-नाम' जपने की होड़ शुरू हो गई है। सोमवार को यूपी कैबिनेट ने अयोध्या में इंटरनैशनल थीम पार्क बनाने का फैसला किया है। इसमें सैंड स्टोन का इस्तेमाल कर इसे परंपरागत लुक दिया जाएगा। वहीं मंगलवार को केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा अयोध्या में प्रस्तावित रामायण म्यूजियम की कार्ययोजना को लेकर अहम बैठक में शामिल होने पहुंच रहे हैं। माया सरकार पहले ही दे चुकी है सौगात मायावती सरकार में 2007 में ही यूपी में इंटरनैशनल रामलीला संकुल प्रस्तावित किया गया था। 2009 में लोकसभा चुनाव के करीब इसके काम में तेजी आई और 27 एकड़ जमीन चिन्हित की गई। इसके लिए 22 करोड़ रुपए भी मंजूर हुए, लेकिन योजना ठंडे बस्ते में चली गई। अब इसी संकुल के अंतर्गत संस्कृति विभाग के अंतर्गत पहले चरण में इंटरनैशनल थीम पार्क बनाया जा रहा है। इस इकलौते प्रोजक्ट पर करीब 6 करोड़ खर्च होंगे। अयोध्या के संतो को सीएम अपने आवास पर बुलाकर 'आशीर्वाद' ले चुके हैं। भाजपा जुटी रामायण म्यूजियम बनाने की कवायद में केंद्रीय मंत्री के अयोध्या पहुंचने के एक दिन पहले प्रदेश सरकार की इस कवायद को 'काउंटर बैलेंस' के तौर पर देखा जा रहा है। कुल मिलाकर प्रदेश में सक्रिय पार्टियों द्वारा राम को अपना बनाने की कवायद की जा रही है । जाहिर है जो इसे अपना ही मानती थी उस पार्टी भाजपा में खलबली मचना स्वाभाविक है ।
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