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भारत के एक कदम से चीन और पाकिस्तान परेशान

भारत के एक कदम से चीन और पाकिस्तान परेशान
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नई दिल्ली -आईएनएस अरिहंत के शामिल होने से भारत जल, थल और नभ तीनों जगहों से परमाणु क्षमता वाली मिसाइलें दागने में सक्षम हो जाएगा।अंग्रेजी अखबार के अनुसार यह स्वदेशी पनडुब्बी है और इस पनडुब्बी के कारण भारत चीनी पनडुब्बियों की हिन्द महासागर में मौजूदगी का जवाब दे सकेगा । जल, थल और नभ से परमाणु क्षमता वाली मिसाइलें दागने में सक्षम होगा भारत देश की पहली स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत को भारतीय नौसेना में शामिल किए जाने की खबर है। अगर यह खबर पक्की है तो इससे चीन और पाकिस्तान की टेंशन बढ़ने वाली है। एक अंग्रेजी समाचार पत्र में छपी खबर के अनुसार, सूत्रों का कहना है कि आईएनएस अरिहंत को अगस्त 2016 में नौसेना में शामिल कर लिया गया है। हल्के वाटर रिएक्टर से चलने वाली इस पनडुब्बी का परीक्षण दिसंबर 2014 से चल रहा था। हलांकि इसके बारे में नौसेना और रक्षा मंत्रालय कुछ कहने को तैयार नहीं हैं क्योंकि इस 'रणनीतिक परियोजना' को प्रधानमंत्री कार्यालय देख रहा है। भारत के पास पहले जमीन से परमाणु क्षमता वाली अग्नि मिसाइलों से दुश्मनों को तबाह करने और फाइटर प्लेन्स से ऐसी मिसाइलों को दागने की क्षमता थी, लेकिन जल के अंदर से परमाणु हमला करने की क्षमता नहीं थी, आईएनएस अरिहंत इस कमी को पूरा करेगा। भारत की नीति है कि वह पहले किसी पर भी परमाणु हमला नहीं करेगा। परमाणु हथियार जवाबी कार्रवाई के लिए है। ऐसे में अरिहंत भारत के लिए एक बड़ी भूमिका निभा सकता है। हिंद महासागर में चीनी पनडुब्बियों की मौजूदगी से भारत पर दबाव बढ़ रहा था, ऐसे में अरिहंत की तैनाती से रणनीतिक और सामरिक लाभ मिलेगा।
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