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और मोदी ने चेंज किये गरीबों के नोट



और मोदी ने चेंज किये गरीबों के नोट

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नई दिल्ली -रेखा मोदी कुछ घर के पैसे और बैंक से जाकर कैश निकाल कर निकाल पडी गरीबों की मदद करने के लिए उन गरीबों के लिए जिन के पास न तो कोई आईडी है और न ही कोई बैंक एकाउंट | रेखा मोदी पटना में रहती हैं और इन्होने जो काम किया वह लोगों के लिए आदर्श बन गया जब लोग नोत्बंदी के बाद अपने अपने में उलझे हुए थे उसी बीच रेखा मोदी का यह कदम लोगों के लिए एक बहुत बड़ा सन्देश है इससे साबित होता है कि देश में दो तरह लोग रहते हैं एक तो जो व्यवस्था को कोसने में लगे रहते हैं और दुसरे जो अपने संसाधनों से लोगों की मदद करने को निकाल पड़ते हैं |
रेखा मोदी ने गरीबों के पांच सौ और हजार के नोट चेंज किए।
पटना की रहने वाली रेखा मोदी अपनी बेटी के साथ सेक्टर-119 की एल्डिको आमंत्रण सोसायटी में रहती हैं। उनकी बेटी उर्वशी एमिटी यूनिवर्सिटी से लॉ कर रही है। रेखा पटना में गीता मोदी फाउंडेशन नाम से एनजीओ भी चलाती हैं, जो पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के मरीजों की मदद करता है। उन्होंने बताया कि बुधवार को घर में एक हजार और पांच सौ के नोट बंद होने के बारे में वह बेटी से बातें कर रही थी। उनकी मेड को जैसे ही नोट बंद होने का पता चला वह चिंतित होकर चुपचाप बैठ गई।एक निजी चैनल के वेबसाईट से दिए खबर के हवाले से कहा  गया है कि रेखा मोदी ने जब सुना कि उनके घर में काम करने वाली यह सुनते हुए कि अब 500 और 1000 के नोट बंद हुए तो वह परेशान हो गई |उसने बताया कि उसके पास तो घर का खर्च चलाने के लिए सिर्फ पांच-पांच सौ रुपये के नोट ही हैं। सेक्टर-119 और 120 की सोसायटियों के आसपास झुग्गियों में रहने वाले अधिकांश परिवारों को एक-दो दिन पहले ही सैलरी मिली है। उनके पास बैंक अकाउंट भी नहीं हैं और इन नोट को चेंज करवाने के लिए कोई आईडी भी नहीं है। ऐसे में उन्होंने अपनी बेटी के साथ ऐसे लोगों की मदद करने की सोची।
उर्वशी ने बताया कि पहले उन्होंने अपने घर में रखे चेंज के 5 हजार रुपये इकट्ठा किए। गुरुवार को उन दोनों ने बैंक जाकर 10-10 हजार रुपये अपने-अपने खाते से निकाले। चार-चार हजार रुपये एक्सचेंज भी करवाए। फिर सोसायटी के वॉट्सऐप ग्रुप पर मेसेज डाला कि वे रुपये चेंज करने के लिए जा रही हैं। इसके बाद सोसायटी के तीन अन्य लोग भी एक्सचेंज करवाए हुए रुपयों के साथ उनकी मदद के लिए पहुंचे। 
इस तरह उनके पास 50 हजार रुपये चेंज करने के लिए हो गए। सबसे पहले वे लोग पर्थला की मार्केट में गए, जहां पर उन्होंने रेहड़ी पटरी वालों को रुपये चेंज किए। पांच सौ-एक हजार रुपये के नोट लेकर उन्होंने 100-100 रुपये के नोट बांटे। इसके बाद उन्होंने झुग्गियों में रुपये बदले।
जिस तरह से राजनीतिक पार्टियों ने नोटबंदी के बाद केवल बयां बजी की जा रही है |
सोर्स वेब 

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