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चार लाख युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार उपलब्ध कराएगी पीएम मोदी की यह योजना

चार लाख युवाओं को प्रशिक्षण और  रोजगार उपलब्ध कराएगी पीएम मोदी की यह योजना
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कानपुर ( अवनीश ) - उद्योग नगरी कही जाने वाली कानपुर में सोमवार दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी परिवर्तन रैली को सम्बोधित करने के लिए विमान से पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले कौशल विकास प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। बताते चले की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के युवाओं को अधिक रोजगार पाने योग्य एवं स्वनिर्भर बनने के उद्देश्य से सोमवार को यहां देश के अब तक के पहले ‘भारतीय कौशल संस्थान’ की आधारशिला रखी। इस संस्थान की संकल्पना उन्होंने सिंगापुर के इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन की यात्रा के दौरान की थी। केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय ने सिंगापुर के इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन की साझेदारी में देश में अपनी तरह के ऐसे पहले संस्थान की स्थापना करने का फैसला किया था। यह संस्थान प्रशिक्षण के सिंगापुर मॉडल से प्रेरित है और यह देश के विभिन्न सर्वश्रेष्ठ प्रचलनों को अंगीकार करेगा। मंत्रालय ने ऐसे छह संस्थान खोलने का निर्णय किया है। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए कौशल प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया। इस प्रदर्शनी में विभिन्न क्षेत्रों के अत्याधुनिक स्वरोजगार प्रशिक्षण प्रचलनों को प्रदर्शित किया गया है और यह प्रदर्शनी अगले तीन दिन तक 22 दिसंबर तक रेलवे मैदान में आम जनता के लिए खुली रहेगी।प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री कौशल केंद्रों (पीएमकेके) एवं चालकों के प्रशिक्षण संस्थानों समेत देश के युवाओं के लिए कई प्रकार की कौशल विकास योजनाओं को लांच किया। समारोह के दौरान विभिन्न उद्योगों के बीच कार्यनीतिक साझेदारियों का भी आयोजन किया गया, जो अगले तीन वर्षों के दौरान लगभग चार लाख युवाओं को प्रशिक्षित करेगी तथा उन्हें रोजगार उपलब्ध कराएगी।समारोह के दौरान राज्य में ‘राष्ट्रीय शिक्षु संवर्धन योजना’ की भी घोषणा की गयी, जिसके सफल कार्यान्वयन में राज्य सरकार की एक बड़ी भूमिका है। ऐसी केवल 23000 निजी कंपनियां हैं, जो देश भर में प्रशिक्षुता से जुड़ी हुई है। एमएसडीई की कोशिश राज्य सरकार के समर्थन को प्रोत्साहित करने तथा शिक्षु प्रशिक्षणों पर अधिक कंपनियों के साथ भागीदारी सुनिश्चित करने की है। यह संभावित कर्मचारियों एवं नियोक्ता के बीच की खाई को कम करने का एक प्रत्यक्ष तरीका है। प्रशिक्षुता प्रशिक्षण के तहत इसके मॉडल ने कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं को लाभ पहुंचाया है। 2016-17 के लिए वित्तीय वर्ष लक्ष्य देश भर में कम से कम 5 लाख शिक्षुओं का नामांकन सुनिश्चित करने का है

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