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न बाप हारा फिर भी बेटा जीता



न बाप हारा फिर भी बेटा जीता

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समाजवादी पार्टी में जो घटना क्रम कल से प्रारम्भ हुआ है उस पर बहुत से समाचार चॅनल द्वारा बार बार पिता पुत्र में मत भेद होना और पार्टी टूटने जैसे कयास सिर्फ भ्रम है । इस पुरे घटना क्रम ने यह साबित कर दिया है की मुलायम सिंह यादव एक मझे हुए नेता है ।और बड़ी ही चतुराई से पुत्र को राजनीत में मजबूती के साथ प्रतिस्थापित करने का काम किया है। इस की सुरवात मुलायम सिंह जी ने 2012 के विधान सभा चुनाव के बाद किया जब नेता जी ने खुद मुख्यमंत्री न बनकर अखिलेश जी को  मुख्यमंत्री बनाया गया ।जब की अखिलेश जी के विरोध् में शिवपाल यादव सहित आजम खान जैसे दिग्गज नेताओ का भारी विरोध था। माननीय मुलायम सिंह यादव चाहते तो मुख्यमंत्री बन सकते थे। लेकिन उन्हें ये न कर अपने जीते जी अपने प्रिये पुत्र को समाजवादी पार्टी का वास्तविक उत्तराधिकारी बनाना था।उन्हें पता था की यदि उन्होंने ऐसा नहीं किया तो समाजवादी पार्टी के घाग नेता कभी भी अखलेश जी को नेता नहीं बंनने नहीं देंगे। इस लिए नेता जी ने विरोध का नाटक करते हुए ये बताने का प्रत्यन किया गया है की अखलेश जब मेरी ही नहीं सुन रहे है और मैं अखलेश को पार्टी से निकल रहा हूँ । इस के बाद विधायको की ज़ोर आजमाइश से मुलायम  सिंह सहित सभी को ये सन्देश मिल गया की 175 विधयक और34 एमएलसी के साथ  अखलेश जी ही समाजवादी पार्टी के सर्व मान्य नेता है  । शायद आज के ही दिन के इंतज़ार में मुलायम सिंह यादव  6 माह से ड्रामा कर रहे थे। अब पार्टी के अंदर उनके पुत्र के विरोधी चारो खाने चित हो चुके है। भला कौन पिता अपने जीवन काल में अपने पुत्र को अपने उत्तराधिकारी के रूप में नहीं देखना चाहता है। हो सकता है की गोपनीय तरीके से मुलायम सिंह जी ने खुद ही विधायको को अखलेश की बैठक में भेजा हो ताकि अखलेश जी नेता जी से भी बड़े नेता के रूप में दिखाई पड़े। खैर आज की ताजा खबर में बेटा जीता बाप हरा। 180 विधायक और बहुत से एमएलसी के अखलेश की बैठक में जाने के बाद माननीय मुलायम सिंह जी द्वारा पत्रकारो के सामने प्रशंचित मुख ये बताने के लिए काफी है की बेटा जीत पर बाप न हरा।आज अगर भारत की राजनीत में मुलायम जी की बुद्धिमता का मैं कायल हो गया। लालु यादवसे लेकर सोनिया गांधी,अजित सिंह लोक दल,प्रकाश सिंह बादल सहित तमाम नेताओ को अपने बेटों को राजनीत में लाने के लिए तमाम आलोचनाओ का सामना करना पड़ पर मुलायम सिंह जीने अपने बेटे को बड़े ही अलग अंदाज़ में स्थापित किया । मुलायम सिंह ने सिद्ध कर दिया की वाकई वो राजनीत के माझे खिलाड़ी है।शाम तक सब शांत हो जाये गा।और मुलायम सिंह यादव की मंशा के अनुरूप अखलेश यादव ही समाजवादी पार्टी के सर्वे सर्वा हो चुके होंगे। विरोधि पार्टी के कार्य कर्ताओ से अनुरोध है की अपनी तैयारियो पर ध्यान दे । अखलेश यादव के राज तिलक पर नहीं ।लेखक द्वाराशिव कुमार द्विवेदी

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