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जीत गया समाजवाद सायकिल अखिलेश ही चलाएंगे

जीत गया समाजवाद सायकिल अखिलेश ही चलाएंगे
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लखनऊ - हुआ वैसा ही जैसी की स्क्रिप्ट लिखी गई थी । आखिरकार अखिलेश यद्र्वाअव ही सर्वे सर्व बनकर समाजवादी प्नरटी के नेता बनकर उभरे और यही मुलायम सिंह की रणनीति भी थी । पार्टी में मान्यता तो पहले ही अखिलेश यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में मिली थी जिसे अब वैधानिकता भी मिल गई ।

अखिलेश ही करेंगे सायकिल का उपयोग

आयोग ने एक अहम फैसले में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व वाले खेमे को समाजवादी पार्टी करार दिया और चुनाव निशान साइकिल भी उन्हें इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी। उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए निर्वाचन आयोग का यह फैसला समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के लिए तगड़ा झटका है। निर्वचन आयोग में मुख्य निर्वाचन आयुक्त नसीम जैदी की अध्यक्षता वाले तीन सदस्य आयोग ने विस्तृत सुनवाई के 13 जनवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। आयोग ने दो मुद्दे तय किए थे, पहला, क्या पार्टी में विभाजन हुआ है। दूसरा, यदि विभाजन है तो बहुमत किसके पास है और चुनाव निशान किसे दिया जाए। समाजवादी पार्टी में विभाजन हुआ । आयोग ने माना कि पार्टी में हुआ विभाजन आयोग ने फैसले में कहा कि पार्टी में विभाजन हुआ था। मुलायम यिंह खेमा यह दावा करता रहा कि 1 जनवरी को लखनऊ के जनेश्वर मिश्र पार्क में होने वाले वार्टी को अधिवेशन असंवैधानिक था। इसलिए पार्टी में विभाजन नहीं हुआ है, और मुलायम सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हुए हैं। इस अधिवेशन में अखिलेष यादव को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था। अधिवेशन में पार्टी के 90 फीसदी प्रतिनिधियों, विधायकों और सांसदों ने हिस्सा लिया था। आयोग ने कहा कि मुलायम सिंह यादव की ओर से आयोग को दिए गए पत्र में उन्होंने खुद स्वीकार किया कि पार्टी में विभाजन हो चुका है।

अमर सिंह का पत्र बना अखिलेश के लिए हथियार

आयोग ने पार्टी के महासचिव अमर के 3 जनवरी के पत्र का जिक्र किया जिसमें उन्होंने आयोग को लिखा, हमारा विनम्र आग्रह है कि समाजवादी पार्टी तथा इसके चुनाव निशान के विवाद का निपटारा पार्टी के संविधान के अनुसार किया जाए न कि टूटे हुए धड़े के दावों के अनुसार। आयोग ने कहा कि यह स्वीकारोक्ति मुलायम खेमे के सभी दावों को ध्वस्त कर देती है कि पार्टी में विभाजन नहीं हुआ। इसलिए यह माना जाता है कि पार्टी में विभाजन हो गया। चुनाव निशान पर आयोग ने कहा कि चुनाव निशान आदेश,1968 के पैरा-15 के अनुसार इसका फैसला बहुमत को देखते हुए किया जाता है। अखिलेष यादव खेमे ने दवा किया है उनके पक्ष में पार्टी के सांसद, विधायक, विधान पार्षद तथा पार्टी प्रतिनिधियों का 90 फीसदी समर्थन है। इसके बारे में उन्होंने कहा कि 228 विधायकों में से 205 विधायक, 68 विधानपार्षदों में से 56 तथा लोकसभा और राज्यसभा के 24 सदस्यों में से 15 का समर्थन उन्हें प्राप्त है। इसके अलावा पार्टी के 5731 प्रतिनिधियों में 4716 का समर्थन भी उनके साथ है। जबकि मुलायम खेमे ने ऐसा कोई दावा ही नहीं किया। इसलिए चुनाव निशान साइकिल अखिलेष खेमे को इस्तोमल करने की अनुमति दी जाती है।

जानबूझकर मुलायम ने नहीं दिया जवाब

आयोग ने कहा कि बार बार मौका देने के बाद भी मुलायम सिंह खेमे ने अपने पक्ष में विधायकों, सांसदों और प्रतिनिधियों के समर्थन के सबूत पेश नहीं किए। उनकी ओर से वकील वह बस यह कहते रहे कि समर्थन के पक्ष में दिए गए शपथपत्र गलत हैं और उनमें कई त्रु़टियां हैं। लेकिन उन्होंने कोई लिखित सबूत पेश नहीं किया।


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