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राजनीतिक पार्टियां बन बैठी वोटों की ठेकेदार



राजनीतिक पार्टियां बन बैठी वोटों की ठेकेदार

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(राजीव ) -उत्तर प्रदेश का यह चुनाव कई मायनों में खास है । जो सबसे बड़ा परिवर्तन अब राजनीति में आ रहा है वो है कि राजनितिक पार्टियां अब विचारधारा को छोड़कर केवल जाति की ही राजनीति कर रही हैं ।

राजनीतिक पार्टियां अब प्रतिनिधित्व के बजाय ठेकेदारी करने लगी है ,इससे बड़े विडम्बना क्या होगी कि जो कार्यकर्ता पार्टी को बनाने में वर्षों तक संघर्ष करता रहता है उसे दरकिनार करते हुए ऐसे लोगों को टिकट दिया जाता है जो पानी पीकर कोसने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते ।

पार्टियों ने ऐसे लोगों को टिकट दिया है जिसे जनता अपना नेता मानती ही नहीं अब उसपर भी यह दादागिरी की लीग पार्टी से बंधे हुए है जिसे पार्टी टिकट देगी झखमार लोग उसी की वोट देंगे यह स्थिति लगभग सभी दलों की है ।

चुनाव के बाद यह तय होगा कि लोग पार्टी के थोपे हुए प्रत्याशियों को टिकट देंगे कि अपनी विचारधारा को ।

लेखक आपकीखबर के संपादक हैं

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