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मृत्यु के बाद आत्मा क्या करती है कहाँ कहाँ जाति है- देखें विडियो

मृत्यु के बाद आत्मा क्या करती है कहाँ कहाँ जाति है- देखें विडियो
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डेस्क-कुछ भी समय नहीं लगता। यहाँ भी होता है इस देह से अभी निकल रहा होता है यहाँ से और वहाँ योनि में भी हाज़िर होता है, क्योंकि यह टाइमिंग है। वीर्य और रज का संयोग होता है, उस घड़ी। इधर से देह छूटनेवाला हो उधर वह संयोग होता है, वह सब इकट्ठा हो तब यहाँ से जाता है। नहीं तो वह यहाँ से जाता ही नहीं, अर्थात् मनुष्य की मृत्यु के बाद आत्मा यहाँ से सीधा ही दूसरी योनी में जाता है। इसलिए आगे क्या होगा, इसकी कोई चिन्ता करने जैसा नहीं है। क्योंकि मरने के बाद दूसरी योनि प्राप्त हो ही जाती है और उस योनि में प्रवेश करते ही वहाँ खाना आदि सब मिलता है।

किस्से-कहानियों या फिर अफवाहों में तो मौत के पश्चात आत्मा को मिलने वाली यात्नाएं या फिर विशेष सुविधाओं के बारे में तो कई बार सुना जा चुका है लेकिन पुख्ता तौर पर अभी तक कोई यह नहीं जान पाया है कि क्या वास्तव में इस दुनियां के बाद भी एक ऐसी दुनियां है जहां आत्मा को संरक्षित कर रखा जाता है अगर नहीं तो जीवन का अंत हो जाने पर आत्मा कहां चली जाती है?

1. ये जन्म-मृत्यु आत्मा के नहीं हैं। आत्मा परमानेन्ट वस्तु है। ये जन्म-मृत्यु इगोइज़म, अहंकार के हैं। इगोइज़म जन्म पाता है और इगोइज़म मरता है। वास्तव में आत्मा खुद मरता ही नहीं। अहंकार ही जन्मता है और अहंकार ही मरता है।

2. पर कुदरत का नियम ऐसा है कि किसी भी मनुष्य को यहाँ से ले जा सकते नहीं हैं। मरनेवाले के हस्ताक्षर बिना उसे यहाँ से ले जा सकते नहीं है। लोग हस्ताक्षर करते होंगे क्या? ऐसा कहते हैं न कि 'हे भगवान, यहाँ से जाया जाए तो अच्छा' अब ऐसा किस लिए बोलते हैं? वह आप जानते हो? कभी ऐसा भीतर दुःख होता है, तब फिर दुःख का मारा बोलता है कि 'यह देह छूटे तो अच्छा। उस घड़ी हस्ताक्षर करवा लेता है।

3. सारी ज़िन्दगी जो कार्य किए हों वे सारी ज़िन्दगी जो धंधे चलाए हों-किए हों यहाँ पर उनका हिसाब मरते समय निकलता है। मरते समय एक घंटा पहले लेखा-जोखा सामने आता है। यहाँ पर जो बिना ह़क का सब उड़ाया हो पैसे छीने हों औरतें छीनी हों बिना ह़क का सब ले लेते हैं बुद्धि से चाहे किसी भी प्रकार से छीन लेते हैं। उन सभी की फिर जानवर गति होती है और यदि सारा जीवन सज्जनता रखी हो तो मनुष्य गति होती है। मरणोपरांत चार प्रकार की ही गतियाँ हुआ करती हैं। जो सारे गाँव की फसल जला दे अपने स्वार्थ के लिए ऐसे होते हैं न यहाँ? उन्हें अंत में नर्कगति मिलती है। अपकार के सा


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